पुणे के विश्रामबाग पुलिस स्टेशन से जुड़े तीन पुलिसकर्मियों का इंक्रीमेंट 2 साल के लिए रोक दिया गया है. यह आदेश अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर राजेश बनसोडे ने दिया है. इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि इन्होंने घरेलू हिंसा के मामले की जांच में लापरवाही दिखाई. कथित तौर पर सबूत इकट्ठा करने के बजाय सतारा में घूमते रहे. शिकायतकर्ता को रात 1 बजे बीच रास्ते उतारने की कोशिश की.
घरेलू हिंसा की जांच को 'पर्सनल ट्रिप' बना डाला, इन पुलिसकर्मियों को दो साल सैलरी हाइक नहीं मिलेगा
Pune cops lose two years increments: पुणे के विश्रामबाग पुलिस स्टेशन से जुड़े तीन पुलिसकर्मियों का इंक्रीमेंट 2 साल के लिए रोक दिया है.आरोप है कि उन्होंने घरेलू हिंसा के मामले में लापरवाही दिखाई. सबूत इकट्ठा करने के बजाय सतारा में घूमती रहे. शिकायकर्ता को भी असुरक्षित तरीके से छोड़ा.

आरोपी पुलिसकर्मियों में दो महिलाएं हैं- सब-इंस्पेक्टर स्वरूपा नाइकवाड़े और कांस्टेबल कोमल कांबले. तीसरे पुलिस कांस्टेबल श्रीहरि पाटिल हैं. तीनों के खिलाफ विभागीय जांच में सबूत मिले हैं कि उन्होंने जांच में ढील दिखाई.
जांच के बीच कास पठार घूमने चले गएइंडिया टुडे से जुड़े ओमकार की रिपोर्ट के मुताबिक, नाइकवाड़े विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में घरेलू हिंसा को लेकर एक केस दर्ज किया गया था. 4 अप्रैल को तीनों पुलिसकर्मी जांच के सिलसिले में शिकायतकर्ता के साथ सतारा गए थे.
सतारा में तीनों को स्थानीय पुलिस से मदद लेनी थी. घटनास्थल का मुआयना करना था. संबंधित गवाहों के बयान दर्ज करने थे. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. शाहूपुरी पुलिस स्टेशन पहुंचने से पहले ही वे कथित तौर पर सड़क किनारे एक मशहूर खाने की जगह पर समय बिताते रहे. जब घटनास्थल पर पहुंचे, तो स्थानीय लोगों से पूछताछ ही नहीं की. कोई सबूत इकट्ठा नहीं किया. इसके बाद तीनों कथित तौर पर कास पठार (Kaas Plateau) घूमने चले गए. यह एक पर्यटन स्थल है.
शिकायतकर्ता की बातों को किया नजरअंदाज
आरोप है कि शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से बार-बार कहा कि उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं है. उसे जल्द पुणे लौटना है. लेकिन उसकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि अधिकारी खाना खाने के लिए एक महिला पुलिसकर्मी के घर गए थे और रात करीब 1 बजे तक पुणे पहुंचे.
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पुणे आने के बाद उन्होंने शिकायतकर्ता को सुरक्षित घर नहीं छोड़ा. आरोप है कि पहले उन्होंने पीड़िता को स्वारगेट पर छोड़ने की कोशिश की. लेकिन विरोध करने के बाद उसे नारायण पेठ पुलिस चौकी पर अकेला छोड़ दिया. महिला ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की. मामले में विभागीय जांच हुई, जिसमें तीनों कर्मचारियों के लापरवाही बरतने और गंभीर अनुशासनहीनता दिखाने की बात सामने आई.
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेश बंसोडे ने मामले पर कहा कि पुलिसकर्मियों ने गहन जांच करने के बजाय आधिकारिक दौरे को घूमने-फिरने के ट्रिप की तरह लिया. इससे शिकायतकर्ता को न्याय मिलने की कोशिश कमजोर हुई और पुलिस विभाग की छवि खराब हुई. सजा के तौर पर उनका सालाना इंक्रीमेंट दो साल के लिए रोक दिया गया है.
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