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'उस बच्ची की चीख...', पुणे रेप-मर्डर केस में जज की बातें अंदर तक हिला देंगी

Pune child rape murder: स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज आरएस सालुंखे ने दोषी भीमराव कांबले को सजा सुनाते हुए ये बातें कहीं तो वहां मौजूद हर शख्स अंदर से हिल गया. 65 साल के भीमराव कांबले को कोर्ट ने बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के लिए मौत की सजा सुनाई है.

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घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश पैदा हो गया था. (फोटो-इंडिया टुडे/Pexels)

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  • पुणे की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने तीन साल की बच्ची के साथ किडनैपिंग, रेप और हत्या के मामले में दोषी भीमराव कांबले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई।
  • अपराधी का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड था और उसे यह भरोसा था कि अदालत में मामला कमजोर रहेगा, जिसके चलते उसने बिना डर के आरोपी बच्ची के साथ गिरहस्ती अपराध किए।
  • इस फैसले के बाद पुलिस और न्यायपालिका ने मामले की जांच और सुनवाई मात्र 60 दिनों में पूरी की, जिससे समाज में न्याय की प्रक्रिया को तेज करने की मांग बढ़ी है।

तीन साल की बच्ची के साथ रेप और फिर हत्या के केस में कोर्ट को न सिर्फ तथ्यों पर विचार करना है, बल्कि उसकी गंभीरता को भी महसूस करना है. वो चीख, वो मासूमियत, 18 चोटें और उसके माता-पिता का दर्द.

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स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जज आरएस सालुंखे ने दोषी भीमराव कांबले को सजा सुनाते हुए ये बातें कहीं तो वहां मौजूद हर शख्स अंदर से हिल गया. 65 साल के भीमराव कांबले को कोर्ट ने बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के लिए मौत की सजा सुनाई है. उसके अपराध को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर कहा.  

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जज सालुंखे ने सजा के ऐलान से पहले बच्ची पर बात की जो सिर्फ एक बछड़े को देखना चाहती थी. और इसीलिए खुशी-खुशी दोषी के साथ चली गई. जज ने कहा,

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“कोर्ट को ‘तथ्यों’ पर न सिर्फ ‘विचार’ करना है, बल्कि उन्हें अपनी ‘इंद्रियों से महसूस भी करना है. कोर्ट को बच्चे की आखिरी चीख सुनने के लिए अपने सेंस को सचेत रखना होगा. ये चीख इतनी तेज थी कि ऑडियो-वीडियो CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई. यह कोर्ट उस छोटी बच्ची को पहुंचाई गई 18 चोटों को महसूस करेगा.

अदलात CCTV फुटेज को अपने सेंस से महसूस करेगी. जिसमें मासूम बच्ची आरोपी पर भरोसा करके खुशी-खुशी अपने छोटे-छोटे कदमों से उसके साथ चल रही है. वह एक बछड़े के नए जीवन की सुंदरता देखने के लिए उत्सुक थी. उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसकी कीमत उसे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी. ये उसके जीवन की आखिरी यात्रा होगी. कोर्ट अपनी इंद्रियों से उस पीड़िता के माता-पिता की भावनाओं को महसूस करेगा, जो अपनी प्यारी बेटी को न्याय दिलाने के इंतजार में कोर्ट के दरवाजे पर खड़े हैं.”

कोर्ट ने यह भी कहा,

“पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें, तीन साल की बच्ची के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को दर्शाती हैं. आरोपी उस बच्ची के साथ जो कुछ भी करना चाहता था, उसने वह बिना किसी डर के, बेहद बर्बर तरीके से और नतीजों की परवाह किए बिना किया. ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि उसे पहले से लगता था कि अगर उस पर मुकदमा चलाया भी गया, तो भी कोर्ट में कुछ नहीं होगा.”

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आरोपी का पहले भी क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. अदालत ने मामले को लेकर लोगों के गुस्से पर भी बात की. कहा कि समाज के हर वर्ग के लोग पीड़ित बच्ची के शव के साथ मुंबई-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर आ गए. उनकी मांग थी कि आरोपी को उन्हें सौंप दिया जाए, क्योंकि वे खुद उसे सजा देकर न्याय करना चाहते थे. उन्हें कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भरोसा नहीं था. यह सोचने वाली बात है कि लोगों में ऐसी सोच क्यों बनती है.

आखिर में जज सालुंखे ने दोषी पर फैसला सुनाते हुए कहा,

“इस कोर्ट की न्यायिक अंतरात्मा इस पक्के नतीजे पर पहुंचती है कि आरोपी के लिए एकमात्र उचित सजा मौत ही है.”

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इसी साल 1 मई को पुणे में भीमराव कांबले ने तीन साल की बच्ची को अगवा कर पहले उसका रेप किया, फिर हत्या कर दी. घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में आक्रोश पैदा हो गया. पुलिस ने जांच तेज की और महज 15 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी. फिर मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू हुई. 25 जून को अदालत ने कांबले को दोषी ठहराया. यानी क्राइम होने के बाद 60 दिनों के ही अंदर ट्रायल पूरा किया गया. इसके बाद 29 जून को अदालत ने कांबले को मौत की सजा सुना दी.

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