The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Pune child rape murder case convict sentenced death

3 साल की बच्ची का रेप-हत्या करने वाले बुजुर्ग को मौत की सजा, 2 महीने में आया फैसला

Pune child rape murder: पुणे में तीन साल की बच्चे के रेप में एक स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 65 साल के आरोपी भीमराव कांबले को बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के मामले में मौत की सजा सुनाई है. कई नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है.

Advertisement
pic
pic
शेख नावेद
| रितिका
29 जून 2026 (पब्लिश्ड: 04:17 PM IST)
Pune child rape murder
65 साल के आरोपी का पहले भी क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. (फोटो-इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

तीन साल की एक बच्ची अपनी नानी के घर गई थी, मगर वापस अपने घर कभी नहीं लौटी. उसके साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर हत्या कर दी गई. अब इसी मामले में पुणे के एक स्पेशल कोर्ट ने दोषी को ‘फांसी’ की सजा सुनाई है. अदालत ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ कैटेगरी का मामला माना है.

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार इसरार चिश्ती की रिपोर्ट के मुताबिक़, पुणे के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने 65 साल के भीमराव कांबले को तीन साल की बच्ची की किडनैपिंग, रेप और मर्डर के मामले में मौत की सजा सुनाई है.

ये मामला इसी साल 1 मई का है. पुणे ज़िले के नसरापुर गांव में तीन साल की बच्ची गर्मियों में अपनी नानी के घर आई थी. वहीं पर दोषी भीमराव कांबले उसे खाने की चीज़ और एक नवजात बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ ले गया. वहां एक शेड में ले जाकर पहले उसने बच्ची का रेप किया और फिर उसकी हत्या कर दी. घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में भारी आक्रोश देखने को मिला. कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए.

आरोपी का पहले भी रहा है क्रिमिनल रिकॉर्ड

पुलिस ने जांच तेज़ की और महज़ 15 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर दी गई. इसके बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में शुरू होती है. 25 जून को अदालत ने आरोपी को दोषी ठहरा दिया था. यानी क्राइम किए जाने के तकरीबन 60 दिनों के ही अंदर अपराध साबित हो गया. इसके बाद 29 जून को अदालत ने सज़ा पर फैसला सुनाते हुए कांबले को मौत की सज़ा सुना दी.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़ित एक मासूम और लाचार बच्ची थी. उसके साथ ये जुर्म बेहद क्रूर तरीक़े से किया गया. अदालत ने ये भी माना कि प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन पक्ष) ने एविडेंस की ऐसी सीरीज पेश की, उससे किडनैपिंग, रेप और हत्या, तीनों इल्ज़ाम साबित होते हैं. कोर्ट ने ये भी कहा कि मुल्ज़िम का पहले से क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. इस मामले में कोई ऐसी परिस्थिति नहीं मिली, जिसके आधार पर सज़ा कम करने पर सोचा जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी की 65 साल की उम्र भी यहां राहत का आधार नहीं बन सकती.

आरोपी के खिलाफ़, इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अजय मिसर दलीलें दे रहे थे. उन्होंने अदालत में फांसी की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पुराने 12 फैसलों का हवाला दिया. उन्होंने CCTV फुटेज, DNA सबूत, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक सबूत, पोटेंसी टेस्ट और दूसरे वैज्ञानिक सबूत अदालत के सामने रखे. अभियोजन की ओर से 55 गवाह भी पेश किए गए. अब फैसले के बाद अजय मिसर ने इसे महाराष्ट्र का एक लैंडमार्क जजमेंट बताया है.

नेताओं ने किया फैसले का स्वागत

शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP की सांसद सुप्रिया सुले ने इस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच और फास्ट ट्रैक ट्रायल की सराहना की. सुप्रिया ने कहा कि उनकी पार्टी पहले दिन से दोषी के लिए फांसी की सज़ा की मांग कर रही थी. उन्होंने मुख्यमंत्री का भी धन्यवाद दिया कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया गया. साथ ही ये भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत मांग है कि दोषी को जल्द से जल्द सज़ा दी जाए ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए. हालांकि, सज़ा कब और कैसे लागू होगी, इसका फैसला कानून में तय प्रक्रिया के मुताबिक़ ही होना है.

ये भी पढ़ें: डेढ़ साल के बच्चे को सर्दी हुई, सरकारी डॉक्टर ने ऐसी दवा दी आंखों की रोशनी चली गई

शिवसेना (UBT) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने भी कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार फैसला आ गया है, तो सज़ा मुकम्मल भी जल्द-से-जल्द करवा दी जानी चाहिए.

वीडियो: क्या भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर ही पूरी कहानी है, या असली सवाल कहीं और छूट गया?

Advertisement

Advertisement

()