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मोदी सरकार ने बीजेपी नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में उच्चायुक्त क्यों बनाया?

भारत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है. उनको कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है. उनकी नियुक्ति को भारत सरकार की बांग्लादेश से संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

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दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपना परिचय पत्र (क्रेडेंशियल्स) सौंपा. (एक्स)

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  • भारत ने दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है, जो NDA सरकार में राजनीतिक व्यक्ति को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने वाली पहली नियुक्ति है।
  • भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तनाव और पिछले प्रशासनों द्वारा भारत के हितों के खिलाफ नीतियों को उलटने के कारण इस नियुक्ति को एक कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
  • दिनेश त्रिवेदी को कैबिनेट रैंक मिलने से उनकी प्रधानमंत्री से सीधी पहुंच संभव होगी और यह बांग्लादेश को भारत की राजनीतिक प्राथमिकता का संकेत देगा, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावना है।

भारत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में अपना नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है. एनडीए सरकार के 12 सालों में यह पहला मौका है, जब किसी राजनेता को राजदूत या उच्चायुक्त बनाया गया है. दिनेश त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने के चलते कूटनीतिक हलकों में इस नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है. बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त रहीं वीना सिकरी ने सरकार के इस फैसले के मायने और इसके व्यवहारिक और प्रतीकात्मक महत्व को विस्तार से बताया है.

मोदी सरकार में उच्चायुक्त की राजनीतिक नियुक्ति

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दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति एक राजनीतिक नियुक्ति है. इसका मतलब है कि किसी पेशेवर राजनयिक (भारतीय विदेश सेवा अधिकारी) के बजाय दूसरे व्यक्ति को इस पद के लिए चुना जाना. साथ में उनको कैबिनेट का दर्जा भी मिला है, जोकि बड़ी उपलब्धि है. राजदूत या उच्चायोग के पद पर कई मौकों पर राजनीतिक नियुक्ति हुई है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ऐसा कम ही हुआ है. वीणा सिकरी ने बताया,

 अमेरिका में मौजूदा राजदूत विनय मोहन क्वात्रा हाल तक विदेश सचिव थे. रिटायरमेंट के बाद उनको अमेरिका में राजदूत बनाया गया. इसे राजनीतिक नियुक्ति माना जाता है. पूर्व सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग की तैनाती भी इसी कैटेगरी में आती है. उनको साल 2019 में सेशेल्स में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था.

कैबिनेट दर्जा मिलना कितना दुर्लभ

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नरेंद्र मोदी सरकार में यह पहला मौका है जब किसी राजनीतिक तौर पर नियुक्त व्यक्ति को यह सम्मान मिला है. हालांकि, अतीत में कांग्रेसी सरकारों के दौरान भी ऐसे कुछ उदाहरण देखने को मिले हैं. इस लिस्ट में पहला नाम विजया लक्ष्मी पंडित का है, उनको आजादी के तुरंत बाद कैबिनेट दर्जे का साथ राजदूत बनाया गया था. इसके अलावा टी. एन. कौल और डी. पी. धर भी इस लिस्ट में शामिल हैं. इन दोनों को मॉस्को (रूस) में राजदूत नियुक्त होने पर यह दर्जा मिला था. डॉ. करण सिंह को भी अमेरिका में भारत का राजदूत बनाए जाने पर कैबिनेट रैंक दिया गया था.

कैबिनेट दर्जे के पीछे क्या मकसद?

पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी के मुताबिक, दिनेश त्रिवेदी को कैबिनेट मंत्री का दजा दिए जाने के पीछे दोहरा मकसद है. एक तो कैबिनेट रैंक के चलते उनकी सीधी पहुंच प्रधानमंत्री मोदी तक हो जाएगी. विदेश सचिव या फिर विदेश मंत्री वाली हायरार्की फॉलो नहीं करनी पड़ेगी.

दूसरा इससे बांग्लादेश को ये मैसेज जाएगा कि भारत के प्रधानमंत्री इस पद और व्यक्ति को बहुत ज्यादा राजनीतिक सम्मान देते हैं. वहां उनका दायित्व भी बेहद खास होगा. वीना सिकरी ने बताया, 

ढाका में दिनेश त्रिवेदी को मिलने वाली सुविधाएं एक आम उच्चायुक्त से बिल्कुल अलग होंगी. वे केवल बांग्लादेश के कैबिनेट रैंक के मंत्रियों या सीधे वहां के प्रधानमंत्री से ही मिलेंगे. उनका दिया कोई भी मैसेज भारत के प्रधानमंत्री की ओर से आया हुआ मैसेज माना जाएगा.

प्रोटॉकॉल और सिक्योरिटी की बात करें तो यहां भी दिनेश त्रिवेदी को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा. वे जब हवाई अड्डे पर उतरेंगे या देश के भीतर ट्रैवल करेंगे तो उनको वही वीआईपी सिक्योरिटी और प्रोटोकॉल मिलेंगे जो बांग्लादेश अपने देश के किसी कैबिनेट मंत्री को देता है.

बांग्लादेश को भी मैसेज

अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंध काफी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के 18 महीने के शासन के दौरान भारत के हित वाली कई नीतिगत फैसलों और प्रोजेक्टस को उलट दिया गया था.

प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत ने रिश्ते सुधारने की पहल की है. लेकिन बांग्लादेश से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं आया है. तारिक रहमान की चीन यात्रा ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है. ऐसे में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को भारत की ओर से फिर से दोस्ती का हाथ बढ़ाए जाने के पहल के तौर पर देखा जा रहा है.  

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