भारत और चीन के रिश्तों में करीब छह साल बाद एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिल सकता है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने वाले हैं, जहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात प्रस्तावित है. अगर ये बैठक होती है, तो गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद भारत में दोनों नेताओं की ये पहली आमने-सामने द्विपक्षीय बातचीत होगी.
गलवान के 6 साल बाद फिर आमने-सामने होंगे मोदी-शी, क्या बदलने वाला है भारत-चीन का रिश्ता?
PM Modi-Xi Jinping Meeting: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 12 सितंबर को नई दिल्ली में संभावित द्विपक्षीय बैठक पर पूरी नजर है. गलवान के बाद भारत में दोनों नेताओं की ये पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी. जानिए सीमा विवाद, LAC, व्यापार और निवेश समेत किन मुद्दों पर चर्चा संभव है.

गलवान के बाद पहली बार भारत में मोदी-शी की बैठक
इस संभावित मुलाकात की जानकारी सबसे पहले India Today की रिपोर्ट में सामने आई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, 12 सितंबर को होने वाली बैठक में दोनों नेता भारत-चीन संबंधों की मौजूदा स्थिति, सीमा पर तनाव, कारोबार और आर्थिक रिश्तों समेत कई अहम मुद्दों पर बात कर सकते हैं. हालांकि, नई दिल्ली और बीजिंग की ओर से अभी तक इस प्रस्तावित बैठक की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है.
यहां एक जरूरी फर्क समझना भी जरूरी है. गलवान के बाद मोदी और शी की पहली द्विपक्षीय मुलाकात 23 अक्टूबर 2024 को रूस के कजान में हुई थी. इसके बाद अगस्त 2025 में तियानजिन में SCO के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई. इसलिए सितंबर 2026 की प्रस्तावित बैठक को भारत में गलवान के बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात कहना ज्यादा सटीक होगा.
रिश्तों में बर्फ पिघलने की कोशिश
जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने भारत-चीन संबंधों को गहरे संकट में डाल दिया था. इस घटना में 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी. इसके बाद LAC पर लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहा और दोनों देशों के बीच राजनीतिक तथा आर्थिक रिश्ते भी प्रभावित हुए. भारत ने लगातार कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद है.
अक्टूबर 2024 में कजान में मोदी और शी की बातचीत के बाद दोनों देशों ने सीमा पर शांति बहाल करने और विशेष प्रतिनिधियों के जरिए सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया था. अगस्त 2025 में तियानजिन की बैठक में भी दोनों नेताओं ने रिश्तों में आए सकारात्मक बदलाव और सीमा क्षेत्रों में शांति की जरूरत को रेखांकित किया.
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इस बार किन मुद्दों पर होगी बात?
12 सितंबर की संभावित बैठक का सबसे संवेदनशील मुद्दा LAC रहेगा. इसके अलावा व्यापार, निवेश, बाजार तक पहुंच और चीन से हाईटेक सामान के आयात से जुड़ी भारतीय चिंताएं भी बातचीत में आ सकती हैं. ब्रिक्स के मंच पर दोनों देश आर्थिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर साथ काम करते हैं, लेकिन सीमा विवाद अब भी रिश्तों की सबसे बड़ी अड़चन है.
शी जिनपिंग का भारत दौरा भी अपने आप में महत्वपूर्ण है. वो करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. ऐसे में मोदी-शी बातचीत सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी, बल्कि ये संकेत भी दे सकती है कि भारत और चीन टकराव से आगे बढ़कर नियंत्रित और सावधानी भरे रिश्तों की ओर कितनी दूर जाना चाहते हैं.
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