उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के पत्थर गिरजाघर धरना स्थल पर TGT-PGT अभ्यर्थी 5 सितंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ छात्र आमरण अनशन पर बैठे हैं. आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि TGT-PGT भर्ती का विज्ञापन पुरानी नियमावली के आधार पर जारी किया जाए.
'मांग पूरी नहीं हुई तो यूपी चुनाव पर...', TGT-PGT प्रोटेस्ट में शामिल अभ्यर्थियों की चेतावनी
Prayagraj TGT PGT candidates protest: प्रयागराज के पत्थर गिरजाघर धरना स्थल पर TGT-PGT अभ्यर्थी 5 सितंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं. आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि TGT-PGT भर्ती का विज्ञापन पुरानी नियमावली के आधार पर जारी किया जाए.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पुरानी नियमावली में प्रवक्ता पद के लिए B.Ed की बाध्यता नहीं थी. नई नियमावली में इसे अनिवार्य किया गया है. नए नियमों में इंटरमीडिएट में संस्कृत कंपलसरी कर दी गई है, जबकि पहले इंटर या ग्रेजुएशन में से किसी एक स्तर पर संस्कृत होने पर छात्र एलिजिबिल होते थे.
छात्रों का कहना है कि उन्होंने जिस नियम और परीक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयारी की, सरकार उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करे. नई नियमावली को लेकर इन अभ्यर्थियों में नाराजगी है और इसी मांग को लेकर आंदोलन लगातार चल रहा है.
नीतू नाम की छात्रा ने कहा,
सरकार से हमारी मांग है जो पुरानी नियमावली थी वही लागू करनी चाहिए. सरकार ने कुछ दिनों में चार-चार नियम लागू किए हैं. सीटेट, जीके, जीएस और माइनस मार्किंग 50%. और 16 सितंबर 2025 को एक नियम आता है कि पीजीटी से बीएड होना चाहिए. जब तक बीएड नहीं होगा तब तक फॉर्म नहीं भर सकते. मैं यही कहना चाहूंगी सरकार से कि पुराने नियम वाली बहाल हो.
अमित नाम के एक छात्र ने कहा,
“यह आंदोलन तब तक चलेगा, जब तक हमारी मांग पूरी ना हो जाए. मांगें पूरी कर देंगे तो हमारा आंदोलन खत्म हो जाएगा. कल हमारी शिक्षा मंत्री से बात हुई. आज भी बात हुई उन्होंने आश्वासन दिया है कि छात्रों के हित में ही फैसला सुनाए जाएगा.”
उन्होंने ये भी कहा कि अगर मांग नहीं मांनी गई तो चुनाव पर असर पड़ेगा. पांच से सात लाख बच्चे हैं, उनसे जुड़े परिवार हैं. ऐसे में पूरे प्रदेश में बड़ा असर पड़ेगा.
अभ्यर्थियों का कहना है कि वह सालों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं. लेकिन फिर भर्ती के नियम बदल दिए जाते हैं.
क्या है छात्रों की मांगें?आंदोलनकारी अभ्यर्थी नई नियमावली और परीक्षा व्यवस्था में किए गए बदलावों का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि TGT-PGT भर्ती में पुराने नियमों के तहत विज्ञापन जारी होना चाहिए. कुछ अभ्यर्थी TET, सामान्य अध्ययन और माइनस मार्किंग जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी आपत्ति जता रहे हैं.
यह आंदोलन सिर्फ प्रयागराज के कुछ छात्रों तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र-छात्राएं पत्थर गिरजाघर धरना स्थल पर पहुंचकर इनके समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं. 9 सितंबर को AISA की प्रेसिडेंट नेहा बोरा प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करने पहुंचीं थीं.
8 सितंबर को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी छात्रों के बीच पहुंचे थे. छात्रों ने उनके सामने अपनी परेशानियां रखीं. इसी दौरान एक छात्र भावुक होकर रोने लगा. संजय सिंह ने एक्स पर लिखा,
“भूख हड़ताल पर 4 दिनों से बैठे प्रवीण यादव अपनी पीड़ा बताते हुए रोने लगे. 3 छात्र 2 छात्राएं 4 दिन भूख हड़ताल पर हैं. क्या योगी सरकार जंतर मंतर बनने के बाद जागेगी? नये नियम के कारण 7 लाख से अधिक PG शिक्षित बेरोजगारों का भविष्य संकट में है. इंटर के शिक्षकों के लिए PG के साथ बीएड की बाध्यता कम से कम 2 साल के लिए खत्म की जाए.”

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अब सवाल सरकार के सामने है, क्या इन छात्रों की मांग पर पुरानी नियमावली के तहत भर्ती का विज्ञापन जारी होगा? या फिर प्रयागराज के पत्थर गिरजाघर पर बैठे ये अभ्यर्थी इसी तरह अपनी मांग के लिए आवाज उठाते रहेंगे?
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