The Lallantop

राजीव गांधी का हत्यारा बना हाई कोर्ट में वकील, सजा के बाद पूरी की कानून की पढ़ाई

AG Perarivalan Lawyer: पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी ठहराए गए एजी पेरारिवलन ने रिहा होने के बाद वकालत की पढ़ाई शुरू की थी. अब उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है और वो वकील हो गए हैं. उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में नामांकन करा लिया है. पेरारिवलन अब मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर सकते हैं.

Advertisement
post-main-image
एजी पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी आर आंबेडकर लॉ कॉलेज से LLB की डिग्री ली है. (फोटो-इंडिया टुडे)

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले (Rajiv Gandhi Assassination Case) में दोषी एजी पेरारिवलन (AG Perarivalan) ने अपनी नई ज़िंदगी शुरू की है. साल 2022 में रिहा होने के बाद उन्होंने वकालत की पढ़ाई शुरू की थी. अब उनकी पढ़ाई पूरी हो चुकी है और वो वकील हो गए हैं. उन्होंने तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल में नामांकन करा लिया है. पेरारिवलन अब मद्रास हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर सकते हैं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

27 अप्रैल को चेन्नई में हुए नामांकन समारोह में चीफ जस्टिस ऑफ़ मद्रास हाई कोर्ट सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी शामिल हुए. एडवोकेट सी.के. चंद्रशेखर ने नामांकन प्रस्ताव पेश किया, जबकि नामांकन समिति के अध्यक्ष के. बालू ने शपथ दिलाई. पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी आर आंबेडकर लॉ कॉलेज से पढ़ाई की. फिर 2025 में ऑल इंडिया बार काउंसिल परीक्षा पास करने के बाद लॉयर बने. उनकी उम्र 54 साल है और उन्होंने अपने जीवन के 31 साल जेल में बिताए हैं. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा, 

'मेरी कोशिश कोई फेमस वकील बनने की नहीं है. बल्कि सलाखों के पीछे बंद उन हजारों कैदियों की आवाज़ बनने की है जिन्हें पैसों की वजह से कानूनी सहायता नहीं मिल पाती. खासकर उन गरीब कैदियों की जिन्हें आजीवन कारावास की सजा मिल जाती है और वे रिहाई का इंतज़ार कर रहे होते हैं.'

Advertisement
कब हुए थे रिहा? 

राजीव गांधी हत्या मामले में एजी पेरारिवलन समेत सात लोगों को दोषी ठहराया गया था. आरोप था कि हत्याकांड में जिस आत्मघाती जैकेट का इस्तेमाल हुआ था, उसमें लगने वाली बैटरी पेरारिवलन ने सप्लाई की थी. जांच में पेरारिवलन दोषी पाए गए. ये बात है साल 1991 की. तब इनकी उम्र 19 बरस थी. 1998 में इन सभी दोषियों को टाडा (TADA) कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. लेकिन, साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में बदल दिया था. फिर पेरारिवलन ने तमिलनाडु सरकार द्वारा सितंबर 2018 में रिहाई के लिए की गई संस्तुति के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिहाई की याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत रिहाई के आदेश दिए थे.

 ये भी पढ़ें: राजीव गांधी के हत्यारे को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा किया, जानिए किस कानून का इस्तेमाल हुआ?

कैसे बने लॉयर?   

जेल में ही अपनी पढ़ाई जारी रखी. कंप्यूटर एप्लीकेशन में बैचलर (BCA) और मास्टर (MCA) डिग्री इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पूरी की. सात अन्य डिप्लोमा कोर्स भी किए. एक डिप्लोमा कोर्स में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला. इनमें से कुछ कोर्स उन्होंने तब किए जब उन्हें मौत की सज़ा दी गई थी. रिहाई के बाद बेंगलुरु से LLB की डिग्री प्राप्त की. 2025 में कोर्स ख़त्म होने के बाद उन्होंने परीक्षा दी जिसके बाद वो लॉयर हुए. देखा जाए तो पेरारिवलन गोल घूमकर उसी बिंदु पर आ गए हैं जहां से उनकी ज़िंदगी बदल गई थी. फर्क सिर्फ इतना है कि अब वो कटघरे के उस तरफ होंगे.  

Advertisement

वीडियो: राहुल गांधी को इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या की खबर मिली, फिर क्या हुआ?

Advertisement