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राजीव गांधी के हत्यारे को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा किया, जानिए किस कानून का इस्तेमाल हुआ?

वो पेरारिवलन, जिसने राजीव गांधी की हत्या में इस्तेमाल जैकेट के लिए बैटरी सप्लाई की थी

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18 मई 2022 (अपडेटेड: 18 मई 2022, 04:35 PM IST)
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31 साल बाद जेल से छूटेगा पूर्व PM राजीव गांधी का हत्यारा | फाइल फोटो: आजतक
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या (Rajiv Gandhi Assassination) मामले में दोषी एजी पेरारिवलन (AG Perarivalan) को सुप्रीम कोर्ट ने रिहा कर दिया है. एजी पेरारिवलन (AG Perarivalan) इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने पेरारिवलन की रिहाई का आदेश अनुच्छेद-142 के तहत दिया है.

कौन है पेरारिवलन?

21 मई 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में हत्‍या हुई थी. 11 जून 1991 को पेरारिवलन को गिरफ्तार किया गया था. पेरारिवलन पर आरोप लगे कि हत्याकांड में जिस आत्मघाती जैकेट का इस्तेमाल हुआ था, उसमें लगने वाली बैटरी पेरारिवलं ने सप्लाई की थी. दो 9 वोल्‍ट की बैटरी. जांच हुई. कोर्ट में साबित हो गया कि पेरारिवलन ने हत्या के मास्‍टरमाइंड शिवरासन को बैटरी खरीदकर दी थी. घटना के समय पेरारिवलन 19 साल का था. और अभी पिछले 31 सालों से सलाखों के पीछे है. पेरारिवलन ने जेल में रहने के दौरान अपनी पढ़ाई जारी रखी. उसने अच्छे नंबरों से कई डिग्रियां हासिल की.

फांसी की सजा से रिहाई तक

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में पेरारिवलन सहित सात लोगों को दोषी ठहराया गया था. 1998 में इन सभी दोषियों को टाडा कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे आजीवन कारावास में बदल दिया था. इसके बाद पेरारिवलन ने तमिलनाडु सरकार द्वारा सितंबर 2018 में रिहाई के लिए की गई संस्तुति के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिहाई की याचिका दाखिल की थी.

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और बी.आर. गवई की पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी. उच्चतम न्यायालय ने पेरारिवलन की रिहाई याचिका पर अपना फैसला 11 मई को सुरक्षित रख लिया था. अब फैसला आया है तो ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में दोषी नलिनी श्रीहरन, मुरुगन, एक श्रीलंकाई नागरिक सहित मामले में अन्य 6 दोषी भी रिहा किए जा सकते हैं.

संविधान का अनुच्छेद 142 क्या कहता है?

संविधान में सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 के रूप में खास शक्ति प्रदान की है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को पूर्ण न्याय देने के लिए कोर्ट जरूरी निर्देश दे सकता है. संविधान के अनुच्छेद 142 के मुताबिक जब तक किसी अन्य कानून को लागू नहीं किया जाता तब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि होगा. इसके तहत कोर्ट ऐसे फैसले दे सकता है, जो लंबित पड़े किसी भी मामले को पूर्ण करने के लिए जरूरी हों. कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश तब तक लागू रहेंगे जब तक कि इससे संबंधित प्रावधान को लागू नहीं कर दिया जाता है.

आर्टिकल-142 के तहत किन प्रमुख मामलों की सुनवाई हुई है?

आर्टिकल-142 का इससे पहले भी कई मामलों में इस्तेमाल किया जा चुका है. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसका इस्तेमाल कर विवादित भूमि को केंद्र सरकार द्वारा गठित एक ट्रस्ट को सौंपने का फैसला सुनाया था. आर्टिकल-142 के जरिए ही बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ चल रहे केस को रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित किया गया था.

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुआवजा दिलवाने और किसी हाइवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी आर्टिकल-142 का ही इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में स्पॉट फिक्सिंग कांड की जांच के आदेश भी आर्टिकल-142 के तहत ही दिए गए थे.

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