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पटना संग्रहालय दुनिया के टॉप 10 म्यूजियम में शामिल, न्यूयॉर्क-पेरिस के ऐतिहासिक संग्रहालयों को पछाड़ा

जर्मनी की ट्रैवल गाइड ‘वर्थ अ जर्नी’ ने पटना म्यूजियम को दुनिया के 100 बेहतरीन संग्रहालयों की लिस्ट में 9वां स्थान दिया है. यह एशिया का टॉप रैंक वाला म्यूजियम है और इस लिस्ट में शामिल होने वाला अकेला भारतीय संग्रहालय भी है.

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बिहार म्यूजियम को दुनिया के 100 बेस्ट म्यूजियम में 9वीं रैंकिंग मिली है. (फोटो- India Today)

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  • बिहार के पटना म्यूजियम को जर्मनी की ट्रैवल गाइड पत्रिका 'वर्थ अ जर्नी' ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ 100 म्यूजियमों में 9वां स्थान दिया है।
  • 2015 में स्थापित पटना म्यूजियम को बिहार की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को संरक्षित करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया था, जिसे जापानी आर्किटेक्ट फुमिहिको माकी ने बनाया।
  • म्यूजियम की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग से यहां की लोकप्रियता और मान्यता बढ़ी है, जिससे स्थानीय प्रशासन आगामी वर्षों में सुविधाओं और प्रचार में वृद्धि करने पर विचार कर सकता है।

बहुत प्राचीन संस्कृति हो. खान-पान हो या कथा-कहानियों की बात. अपनी पुरातनता में भारत देश किसी ‘संग्रहालय’ से कम नहीं. इस देश की धनी सांस्कृतिक विरासत ने सारी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. यहां घूमने-फिरने की तमाम जगहें तो हैं ही. कई सारे म्यूजियम भी हैं, जिनमें संरक्षित पुरानी चीजों के जरिए इतिहास के किसी दूर समय में टाइम ट्रैवेल किया जा सकता है. बिहार का पटना म्यूजियम उन्हीं में से एक है, जिसे जर्मनी की एक ट्रैवेल गाइड पत्रिका ने दुनिया की 100 बेहतरीन म्यूजियम की लिस्ट में शामिल किया है. वहीं, एशिया से संग्रहालयों की लिस्ट में पटना म्यूजियम पहले नंबर पर है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी में एक इंडिपेंडेंट ट्रैवल गाइड है, ‘वर्थ अ जर्नी’. इस पत्रिका ने बिहार के पटना संग्रहालय को दुनिया के बेस्ट 100 म्यूजियम में 9वां स्थान दिया है. ये रैंकिंग न्यूयॉर्क के ‘मेट्रोपॉलिटन म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट’ से भी एक पायदान ऊपर है. पेरिस का मशहूर लूव्र संग्रहालय भी इस लिस्ट में 31वें नंबर पर है. 

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बिहार म्यूजियम में ऐतिहासिक वस्तुएं रखी हैं.

‘वर्थ अ जर्नी’ की लिस्ट में मेक्सिको सिटी का ‘म्यूजियो नैशनल डी एंट्रोपोलोजिया’ को पहला नंबर मिला है. इसके बाद मैड्रिड का ‘म्यूजियो डेल प्राडो’ है. डेनमार्क का ‘लुइसियाना म्यूज़ियम ऑफ़ मॉडर्न आर्ट’ तीसरे नंबर पर है. सेंट पीटर्सबर्ग का स्टेट हर्मिटेज म्यूजियम चौथे और वियना का कुन्थिस्टोरिस्चेस म्यूजियम पांचवे नंबर पर है. 

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बिहार म्यूजियम में क्या खास है?

बिहार म्यूजियम पत्रिका की 2026 की लिस्ट में शामिल 100 म्यूजियम में अकेला भारतीय इंस्टिट्यूशन है. 13 एकड़ में फैला यह म्यूजियम बिहार के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के मकसद से डिजाइन किया गया है. साल 2015 में इसका उद्घाटन किया गया था. इस संग्रहालय में बिहार के प्राचीन इतिहास के साथ-साथ ऐतिहासिक कलाकृतियां, मूर्तियां, सिक्के, मैन्युस्क्रिप्ट और आर्कियोलॉजिकल मटीरियल का कलेक्शन मौजूद है. गैलरी में अलग-अलग समय में इलाके के इतिहास को दिखाया गया है, जिसमें 18वीं सदी से लेकर पुरानी सभ्यताओं तक की चीजें मौजूद हैं. 

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बुद्ध से जुड़ी कलाकृति.

इस म्यूजियम को जापानी आर्किटेक्ट फुमिहिको माकी ने मुंबई के ओपोलिस आर्किटेक्ट्स के साथ मिलकर डिजाइन किया था. म्यूजियम की मेन गैलरी मंगलवार से रविवार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती है. सोमवार को यहां छुट्टी रहती है. सोविनियर शॉप, कैफे और कुछ दूसरी सुविधाएं शाम 5 बजे के बाद भी चलती हैं. एंट्री टिकट की कीमत भारतीय वयस्कों के लिए 100 रुपये और बच्चों के लिए 50 रुपये है. इंटरनेशनल विजिटर्स के लिए टिकट की कीमत 500 और 250 रुपये है. 

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म्यूजियम शहर में आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना है.

म्यूजियम को अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में 9वां स्थान मिलने के बाद यहां के डायरेक्टर जनरल अंजनी कुमार सिंह ने कहा,

ये रैंकिंग संस्था बनाने के पीछे की इच्छा को दिखाती है. हमारा विजन एक ऐसा म्यूजियम बनाना था जो वर्ल्ड-क्लास स्टैंडर्ड को पूरा करे. आज जब म्यूजियम को इंटरनेशनल पहचान मिली है तो हमें गर्व और उपलब्धि का एहसास हो रहा है.

बता दें कि म्यूनिख से प्रकाशित मैगजीन ‘वर्थ अ जर्नी’ म्यूज़ियम, लाइब्रेरी, पार्क, महल और होटल जैसी कैटेगरी में रैंकिंग पब्लिश करती है. यह दुनिया भर की जगहों से डेटा जुटाती है और खुद जाकर उसका वेरिफिकेशन करती है.

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