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अर्नब चक्रवात से थमी आंध्र से दिल्ली तक की रफ्तार, आखिर क्यों पड़ा ऐसा नाम?

'अर्नब' चक्रवात का नाम बांग्लादेश ने दिया था जिसका मतलब होता है समुद्र. चक्रवातों और तूफानों का भी बाकायदा नामकरण होता है. जिस तूफान ने आंध्र प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की रफ्तार रोक दी है, उसके नाम के पीछे ही रोचक वजह है.

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'अर्नब' चक्रवात के नाम रखने के पीछे की कहानी. (courtesy: इंडिया टुडे)

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  • बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात 'अर्नब' 28 अक्टूबर को ओडिशा और आंध्र प्रदेश में पहुंचा, जिसकी रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे थी और इसने पांच लोगों की मौत की पुष्टि की है।
  • WMO/ESCAP के तहत 13 देशों की सूची में से बांग्लादेश द्वारा सुझाया गया नाम 'अर्नब' रखा जाता है, यह नामकरण 2000 में चक्रवातों की पहचान और जागरूकता के लिए शुरू हुआ।
  • इस नामकरण प्रणाली से चक्रवातों की पहचान स्पष्ट होती है, जिससे वार्निंग जारी करना आसान होता है और आने वाले तूफान 'मुरासु' के लिए भी नाम पहले से तय हैं।

बंगाल की खाड़ी से उठा साइक्लोन या हिंदी में चक्रवात ‘अर्नब’ ने अब तक पांच लोगों की जान ले ली है. 28 अक्टूबर को भारत के पूर्वी तट, खास तौर पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में एक भयंकर चक्रवाती तूफ़ान आया. यहां हवाएं 120-135 किलोमीटर प्रति घंटा से चल रही थीं. अर्नब की अब तक की अधिकतम स्पीड 150 किलोमीटर प्रति घंटा रही है. इसने बारिश और बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा दिया है.

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लेकिन हम इसे अर्नब नाम से क्यों पुकार रहे हैं? क्या सिर्फ साइक्लोन नहीं कह सकते? और कौन रखता है ये नाम? एक दिलचस्प बात कि जो साइक्लोन आप आज देख रहे हैं, उसका नामकरण सालों पहले ही कर दिया जाता है.  

‘अर्नब’ का मतलब?      

'अर्नब' नाम बांग्लादेश ने सुझाया था और इसका बांग्ला में उच्चारण 'ऑर्नब' किया जाता है. इस शब्द का अर्थ महासागर या समुद्र होता है. उत्तरी हिंद महासागर में आने वाले चक्रवातों के नामों की आधिकारिक सूची में 'अर्नब' नाम शामिल है.  

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लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि चक्रवात की शुरुआत बांग्लादेश में हुई है. और न ही इसका मतलब ये है कि बांग्लादेश इस तूफान से प्रभावित होगा. चक्रवात कहां बनता है या फिर कहां टकराता है, इससे उसके नाम पर कोई फर्क नहीं पड़ता. अब ऐसा भी नहीं है कि समुद्र में किसी भी ‘डिस्टर्बेंस’ को चक्रवात कह दिया जाए. IMD या भारत मौसम विज्ञान विभाग की ज़िम्मेदारी है कि वो क्राइटेरिया के हिसाब से साइक्लोन की पहचान करे. नाम चुनने का हक़ भी IMD के पास होता है.

कैसे रखे जाते हैं नाम?   

अब आते हैं कि नाम रखने का सिलसिला कब शुरू हुआ था. साल 2000. WMO/ESCAP (विश्व मौसम विज्ञान संगठन/संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग - एशिया और प्रशांत क्षेत्र) नामक देशों के एक समूह ने इस क्षेत्र में आने वाले चक्रवातों का नामकरण शुरू करने का फैसला लिया. शुरुआत में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे. फिर 2018 में ईरान, क़तर, सऊदी अरब, UAE और यमन को भी जोड़ लिया गया. 

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साइक्लोन के नामों की सूची. 

इनका काम है नाम सुझाना. इसके बाद WMO/ESCAP पैनल (PTC) सूची को अंतिम रूप देते हैं. अब देखिए हर 13 देश 13-13 नाम सुझाते हैं. यानी कुल 169 नामों की लिस्ट तैयार की जाती है. मौजूदा नामों की लिस्ट IMD ने अप्रैल, 2020 में जारी की थी. इससे पहले 64 नामों की लिस्ट निकाली गई थी जिसमें से केवल एक नाम (अम्फान) का इस्तेमाल नहीं हो पाया था. इसलिए 169 नामों में उसे भी जोड़ लिया गया.

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क्यों रखे जाते हैं नाम?

नाम रखने की पहली ज़रूरत है कि चक्रवातों की पहचान की जा सके. इसके अलावा नाम जागरूकता फैलाने, वार्निंग जारी करने और किसी भी कंफ्यूशन से बचने के लिए रखा जाता है. नाम रखते समय कुछ बातों का ध्यान भी रखा जाता है. जैसे, 

  • धर्म, संस्कृति, लिंग या राजनीति से जुड़ा नाम न हो, 
  • ठेस पहुंचाने वाला और क्रूर नाम न हो, 
  • नाम छोटे होने चाहिए और तलफ़्फ़ुज़ भी साफ़ होना चाहिए. नाम आठ अक्षरों से बड़ा नहीं होना चाहिए. 
  • सबसे ज़रूरी है कि कोई भी नाम रिपीट नहीं होता. 

अब आ जाइए ऊपर दी गई लिस्ट पर. इस लिस्ट के पहले रो के तीसरे कॉलम में एक नाम है ‘अर्नब’. यही इस बार के चक्रवात का नाम है. इससे ठीक पहले वाला नाम देखिए ‘दितवाह’ लिखा है. ये नाम दिया है यमन ने. पिछले साल 2025 के नवंबर-दिसंबर के महीने में इस चक्रवात ने श्रीलंका पर अपना कहर बरपाया था. मोंगाबे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस चक्रवात से करीब 640 लोगों की जान चली गई थी. इसमें से 221 लोग अभी भी लापता हैं. अब ‘अर्नब’ ने समुद्र में ‘बवंडर मचाना’ शुरू कर दिया है.

एक और बात समझते जाइए. लिस्ट के मुताबिक अगले चक्रवात का नाम ‘मुरासु’ हो सकता है. ये नाम भारत का दिया हुआ है. मुरासु एक तमिल शब्द है, जिसका मतलब होता है एक प्राचीन संगीत यंत्र.    

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