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क्या वाकई में साफ हो गई है यमुना? सांसद मनोज तिवारी के दावे के उलट हैं आंकड़े

बीजेपी सांसद ने दावा किया कि यमुना का प्रदूषण आधा हो गया है और अब छठ पूजा मनाई जा सकती है. DPCC के सितंबर 2026 के आंकड़े बीजेपी सांसद के दावों से मेल नहीं खाते हैं. यमुना के कई हिस्सों में BOD और फीकल कोलीफॉर्म का स्तर काफी ज्यादा है.

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मनोज तिवारी ने यमुना में डुबकी लगा कर आचमन भी किया (COURTSEY- X/Delhi BJP)

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  • भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 29 अक्टूबर को सोनिया विहार घाट पर यमुना नदी में डुबकी लगाई और दावा किया कि पिछले एक साल में यमुना का प्रदूषण स्तर आधा घटा है।
  • यमुना नदी प्रदूषण के लिए दिल्ली और हरियाणा के बीच उत्तरदायित्व विवाद है, जिस कारण सफाई प्रयासों पर राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ है।
  • प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि यमुना के कई हिस्सों में प्रदूषण स्तर अभी भी तय मानकों से बहुत अधिक है, जिससे नदी पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा ने एक चीज का बहुत जोर-शोर से प्रचार और वादा किया. ये वादा था यमुना नदी को साफ करने का. अब यमुना कितनी साफ हुई, इसका जवाब कायदे से वैज्ञानिक ही दे सकते हैं. इसके अलावा, यमुना के आसपास रहनेवाले दिल्ली के निवासी इसकी पुष्टि कर सकते हैं. लेकिन, भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने दावा कर दिया है कि यमुना साफ हो गई है. दिलचस्प बात ये है कि ये दावा सिर्फ मौखिक नहीं है. 29 अक्टूबर को सांसद मनोज तिवारी ने सोनिया विहार घाट पर यमुना नदी में डुबकी लगा कर दिखाया. 

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उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में प्रदूषण का स्तर आधा हो गया है. इसका श्रेय उन्होंने बीजेपी सरकार के नदी की सफाई के प्रयासों को दिया. उन्होंने कहा कि अब लोग यमुना में फिर से छठ पूजा मना सकते हैं.

सांसद मनोज तिवारी ने कहा, ‘नदी साफ हो है’

मनोज तिवारी ने न सिर्फ डुबकी लगाई, बल्कि पक्षियों को लेकर भी एक दावा किया. उन्होंने कहा कि नदी के कुछ हिस्सों में प्रवासी पक्षियों का आना, नदी की स्थिति में सुधार का संकेत है. उन्होंने कहा,

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अगर नदी साफ नहीं होती, तो ये पक्षी यहां नहीं आते. हो सकता है कि यहां पानी में मगरमच्छ हों, लेकिन मगरमच्छ केवल साफ पानी में ही आते हैं.

उन्होंने सोनिया विहार में आचमन (धार्मिक अनुष्ठान के तौर पर पानी पीना) करने का भी दावा किया. उन्होंने नदी की सफाई के लिए बीजेपी सरकार की तारीफ की. सांसद ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) यमुना साफ करने में नाकाम रही थी. 

बीजेपी दिल्ली के एक्स हैंडल से भी एक पोस्ट शेयर की गई. पोस्ट के मुताबिक,

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AAP यमुना के प्रदूषण के लिए हरियाणा को जिम्मेदार ठहराती थी. जब से बीजेपी सत्ता में आई है, उसने डेढ़ साल में ही आधी नदी साफ कर दी है. बाकी बचा काम अगले तीन सालों में पूरा कर लिया जाएगा. दिल्ली की भाजपा सरकार ने दो सालों में वह कर दिखाया है, जो कांग्रेस और AAP 27 सालों में नहीं कर पाए. उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी चुनौती दी कि वे आकर नदी में डुबकी लगाएं.

AAP का पलटवार

दिल्ली बीजेपी और मनोज तिवारी की इस पोस्ट पर AAP ने तुरंत जवाब दिया. AAP के दिल्ली अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर लिखा,

बीजेपी के ये धोखेबाज दिल्ली के बारे में कुछ नहीं जानते. यह सबको पता है कि पल्ला से वजीराबाद तक यमुना का 26 किलोमीटर का हिस्सा हमेशा से काफी साफ रहा है. DPCC की रिपोर्ट के अनुसार भी, आप सरकार के दौरान यह हिस्सा और भी साफ था.

इसके बाद सौरभ भारद्वाज ने मनोज तिवारी और दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा को एक चैलेंज भी दिया. उन्होंने लिखा,

मैं मनोज तिवारी और जल मंत्री प्रवेश वर्मा को कालिंदी कुंज घाट (ओखला बैराज के पास) पर पानी पीने के लिए आमंत्रित करता हूं. पिछले साल भी वे इस चुनौती से भाग गए थे.

आंकड़ों में यमुना अभी भी काफी प्रदूषित 

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक जैसे-जैसे यमुना दिल्ली से गुजरती है, वैसे-वैसे उसका पानी प्रदूषित होता जाता है. वजीराबाद और ओखला के बीच का 22 किलोमीटर का हिस्सा सबसे ज्यादा प्रदूषित माना जाता है. सरकार ने यहां कई बार सुधार के प्रयास भी किए हैं. लेकिन कुछ खास हासिल नहीं हुआ. लेकिन क्या नदी में एक डुबकी लगाने से यह साबित हो सकता है कि इसका पानी छठ मनाने की तैयारी कर रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित है? इसके लिए एक टेस्ट होता है जिसे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड, शॉर्ट में BOD कहते हैं.

इससे यह मापा जाता है कि पानी में मौजूद जैविक कचरे (Organic Waste) को तोड़ने या खत्म करने के लिए सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) को कितने ऑक्सीजन की जरूरत है. इसे नदी की सेहत का एक अहम पैमाना माना जाता है. BOD का लेवल जितना ज्यादा होता है, पानी में जैविक प्रदूषण उतना ही अधिक माना जाता है. नहाने के पानी के लिए BOD का मानक 3 मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/l) या उससे कम तय किया गया है. हालांकि, यमुना के कई मॉनिटरिंग सेंटर्स पर BOD का स्तर लगातार 3 मिलीग्राम से ऊपर ही रहा है.

पल्ला में, जहां यमुना दिल्ली में एंटर करती है, वहां BOD का स्तर 2 mg/l है. लेकिन आगे बढ़ने पर स्थिति पूरी तरह बदल जाती है. ISBT पुल के पास BOD का स्तर बढ़कर 30 mg/l हो जाता है. ITO पर यह 18 mg/l है. कुल मिलाकर ये दोनों ही आंकड़े तय सीमा से कहीं अधिक हैं. हालांकि, इसमें कुछ सुधार भी हुआ है. ITO पर BOD का स्तर जुलाई 2025 में 70 mg/l था, जो सितंबर 2026 में घटकर 18 mg/l रह गया है. यह एक अच्छा संकेत तो है, लेकिन अभी भी तय सीमा से छह गुना ज्यादा है.

(यह भी पढ़ें: यमुना की सफाई पर नजर, करोड़ों की नाव पर बैठकर, सरकार ने टेंडर निकाला)

पानी की क्वालिटी को चेक करने का दूसरा पैमाना फीकल कोलीफॉर्म काउंट है. ये इंसानी और जानवरों के कचरे से होने वाले प्रदूषण को दिखाता है. इसका स्तर और भी ज्यादा चिंताजनक है. ISBT पुल के पास, यह आंकड़ा 100 मिलीलीटर पानी में 35 हजार MPN है. नहाने के पानी के लिए तय सीमा 100 मिलीलीटर में 2500 MPN है. यानी यह आंकड़ा तय सीमा से 14 गुना ज्यादा है. कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि नदी के कुछ हिस्से शायद साफ हो गए हों, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यमुना पूरी तरह सुरक्षित हो गई है. इतनी तो बिल्कुल नहीं की कहीं भी डुबकी लगाई जा सके.

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