IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी Fairfax को बेचने के फैसले पर विवाद बढ़ता जा रहा है. 30 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बैंक कर्मचारियों की मांग का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से बने बैंक को बेचना गलत है. उन्होंने कहा कि जब बैंक 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा कमा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार बैंक को निजी हाथों में क्यों सौंपना चाह रही है?
IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने पर बोले राहुल गांधी, 'मुनाफे में है बैंक फिर क्यों सरकार बेच रही?'
IDBI Bank: राहुल गांधी ने IDBI बैंक के कर्मचारियों के समर्थन में चिट्ठी लिखी है. बैंक कर्मचारियों ने बैंक को कनाडा की कंपनी Fairfax को बेचने के फैसले पर विरोध किया है. उन्होंने 2 और 3 नवंबर को देशभर में भूख हड़ताल करने की बात भी कही है.

दूसरी तरफ, सरकार ने भी बिक्री की प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, Fairfax ने तय बेंचमार्क कीमत से ज्यादा की बोली लगाई है. लेकिन, बैंक कर्मचारी इससे सहमत नहीं हैं. वे 2 और 3 नवंबर को देशभर में भूख हड़ताल करने जा रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार बैंक में अपना बहुमत बनाए रखे. कर्मचारियों की नौकरी, पेंशन और आरक्षण की सुरक्षा की गारंटी दे.
आखिर IDBI बैंक की बिक्री को लेकर विवाद क्यों है? राहुल गांधी ने कर्मचारियों को चिट्ठी में क्या लिखा और सरकार ने अपने बचाव में क्या दलील दी है? समझते हैं.
राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर को IDBI बैंक के कर्मचारियों को ‘खुली चिट्ठी’ लिखी. इसे 30 अक्टूबर को एक्स पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि यह बैंक जनता के पैसे से बना है, इसलिए इस पर जनता का हक है. इसे बेचा नहीं जाना चाहिए.
उन्होंने लिखा,
‘मार्च 2025 में IDBI बैंक के कुछ कर्मचारी संसद में मुझसे मिले थे. उन्होंने पूछा था कि जिस बैंक को उन्होंने मुनाफे में पहुंचाया, सरकार उसे क्यों बेच रही है? मैंने लोकसभा में भी यह सवाल उठाया था. पूछा था कि कर्मचारियों और खाताधारकों के हितों की सुरक्षा कैसे होगी. लेकिन सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया.’
राहुल ने कहा कि करीब सात साल पहले IDBI बैंक घाटे में था. लेकिन कर्मचारियों की मेहनत से बैंक ने वापसी की. वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. यह पिछले वित्त वर्ष के 7,515 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 27 फीसदी ज्यादा है.
इंडिया टुडे के मुताबिक, राहुल ने अपनी चिट्ठी में साल 2003 का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि उस वक्त सरकार ने संसद में भरोसा दिया था कि IDBI बैंक में उसकी हिस्सेदारी कभी 51 फीसदी से कम नहीं होगी. लेकिन अब इस सौदे के बाद सरकार और LIC की कुल हिस्सेदारी करीब 95 फीसदी से घटकर 34 फीसदी रह जाएगी. राहुल का कहना है कि बैंक के निजी हाथों में जाने से SC, ST और OBC वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था खत्म हो सकती है.

उन्होंने साफ़ लिखा, ‘कांग्रेस के काल में बैंक बनाए जाते थे, मोदी के काल में बैंक बेचे जा रहे हैं.’
कर्मचारियों ने किया भूख हड़ताल का ऐलानIDBI बैंक के कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को देशभर में दो दिन की भूख हड़ताल करेंगे. इसका ऐलान यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज यानी UFIOE ने किया है. इसमें ऑल इंडिया IDBI ऑफिसर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन शामिल हैं.
कर्मचारियों की मांग है कि सरकार कम से कम 6 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदे, ताकि बैंक में उसका बहुमत बना रहे. इसके अलावा नौकरी, पेंशन और आरक्षण कायम रखने की कानूनी गारंटी भी दी जाए.
दरअसल, 14 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने IDBI बैंक की बिक्री के लिए कनाडा की कंपनी Fairfax Financial Holdings की सहायक कंपनी M/s 10955230 Canada Inc को रणनीतिक खरीदार के तौर पर मंजूरी दी.
इस सौदे की कीमत करीब 52 हजार 878 करोड़ रुपये है. इसके तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 फीसदी और LIC अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. यानी कुल 60.72 फीसदी शेयर बेचे जाएंगे. सौदे के बाद सरकार के पास 15 और LIC के पास 19 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी.
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सरकार का दावा, सभी प्रक्रिया का पालन किया गयाइस सौदे पर सवाल उठने के बाद 29 अक्टूबर को वित्त मंत्रालय ने सफाई दी. मंत्रालय के मुताबिक, Fairfax ने 81 रुपये प्रति शेयर की बोली लगाई. जबकि दो स्वतंत्र एजेंसियों ने बेंचमार्क कीमत 75.99 रुपये प्रति शेयर तय की थी. यानी Fairfax की बोली तय कीमत से ज्यादा थी.
मंत्रालय ने कहा कि पहले दौर में मिली बोलियां तय कीमत से कम थीं. इसलिए उन्हें मंजूरी नहीं दी गई. इसके बाद योग्य कंपनियों से दोबारा बोली मंगाई गई. सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में बोली लगाने वाली कंपनियों और कीमतों का आकलन करने वाली एजेंसियों को एक-दूसरे की जानकारी नहीं थी.
IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी. शुरुआत में पांच कंपनियों ने बैंक खरीदने में दिलचस्पी दिखाई. जांच के बाद चार कंपनियां योग्य पाई गईं. इनमें से दो कंपनियों ने आखिरी दौर में तकनीकी और वित्तीय बोली लगाई. आखिरकार Fairfax को रणनीतिक खरीदार चुना गया. हालांकि, अभी सौदा पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है. Fairfax को RBI की जरूरी जांच और दूसरे Regulatory approvals से गुजरना होगा.
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