एक तरफ़ पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर की आर्थिक मदद जैसी एक स्पेशल अरेंजमेंट की मांग की है. दूसरी तरफ़ करीब 20 साल बाद कनाडा के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का दौरा किया है और 4.70 करोड़ डॉलर की नई मदद का ऐलान किया है. ऐसे में पाकिस्तान इस वक्त सिर्फ़ कूटनीतिक रिश्ते नहीं, बल्कि आर्थिक सहारे भी तलाशता दिख रहा है.
दुनिया भर से पैसे क्यों मांग रहा पाकिस्तान? IMF के बाद अब अमेरिका से 10 अरब डॉलर मांगे
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है. देश के हालात देखते हुए मौजूदा सरकार ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर मांगे हैं. अगर यह मांग मान ली जाती है, तो पाकिस्तान के Forex Reserve को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है. इससे पाकिस्तानी रुपए पर दबाव कम होगा.


न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान ने अमेरिकी ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट को एक प्रस्ताव भेजा है. इसमें अमेरिका और पाकिस्तान के बीच 10 अरब डॉलर की द्विपक्षीय एक्सचेंज स्टेबिलाइज़ेशन सपोर्ट फैसिलिटी बनाने की मांग की गई है. इसकी अवधि पांच साल तक रखने का प्रस्ताव है. ये बायलैटरल एक्सचेंज स्टेबलाइज़ेशन सपोर्ट फैसिलिटी एक तरह का ऋण है. इसे अमेरिका जैसे देश किसी दूसरे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने और उसकी करेंसी को गिरने से बचाने के लिए देते हैं.
क्या पाकिस्तान को सपोर्ट करेगा अमेरिका?अगर अमेरिका इस मांग को मंज़ूरी देता है, तो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को बड़ा सपोर्ट मिल सकता है. इससे पाकिस्तानी रुपए पर दबाव कम होगा और IMF या दूसरे देशों से बार-बार आर्थिक मदद लेने की ज़रूरत भी घट सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक़, पाकिस्तान ने ये मांग ऐसे वक़्त पर की है, जब हाल ही में अमेरिका-ईरान जंग के दौरान बातचीत कराने में उसके रोल की चर्चा हुई थी. माना जा रहा है कि इस डिप्लोमेटिक रोल के बाद इस्लामाबाद अब वॉशिंगटन के साथ रिश्तों को आर्थिक फ़ायदे में भी बदलना चाहता है.
इस समय पाकिस्तान 7 अरब डॉलर वाले IMF प्रोग्राम के अंतर्गत आता है. इसके लिए उसे टैक्स बढ़ाने, सरकारी खर्च कम करने और कई आर्थिक सुधार लागू करने पड़े हैं. उससे पहले 2023 में पाकिस्तान 3 अरब डॉलर के IMF स्टैंडबाय डील की मदद से डिफ़ॉल्ट होने से बचा था. बाद में उसे 7 अरब डॉलर की विस्तारित फंड फैसिलिटी और जलवायु पुनरुत्थान के लिए 1.3 अरब डॉलर का अलग लोन भी मिला. इसके बावजूद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अब भी बाहरी मदद पर काफी हद तक निर्भर है. अप्रैल में उसे अपने फॉरेक्स रिज़र्व्स का लगभग पांचवां हिस्सा, करीब 3.5 अरब डॉलर, UAE को लौटाना पड़ा था. तब सऊदी अरब ने 3 अरब डॉलर की नई मदद देकर स्थिति संभाली थी.
पहले अर्जेंटीना, अब पाकिस्तान को दी मददरॉयटर्स के मुताबिक़, अमेरिका की ऐसी एक्सचेंज स्टेबिलाइज़ेशन फैसिलिटी बहुत कम देशों को मिलती है. 2025 में अर्जेंटीना को ऐसी सुविधा मिली थी. उससे पहले 2002 में उरुग्वे को. मेक्सिको के साथ तो अमेरिका की ऐसी व्यवस्था कई दशक पुरानी है. अब पाकिस्तान अमेरिका के साथ क्रिप्टो, रियल एस्टेट, माइनिंग और खास तौर पर रेको डिक कॉपर-गोल्ड प्रोजेक्ट में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. इसी प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक पहले ही 1.2 अरब डॉलर की फाइनेंसिंग का ऐलान कर चुका है. रेको डिक प्रोजेक्ट बलूचिस्तान में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी सोने और तांबे की खदानों में से एक है.
कनाडा-पाकिस्तान का बढ़ता यारानाइसी बीच पाकिस्तान को कनाडा से भी एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक संदेश मिला है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारतीय मूल की कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने पाकिस्तान का दौरा किया. करीब दो दशक में किसी कनाडाई विदेश मंत्री का ये पहला पाकिस्तान दौरा था. इस दौरान अनीता आनंद ने 4.70 करोड़ डॉलर की नई मदद का ऐलान किया. इसमें 22 लाख डॉलर बॉर्डर सिक्योरिटी, आतंकवाद प्रतिरोध, वित्तीय अपराध जांच और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए दिए जाएंगे.
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इस दौरे में कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़, उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार, गृह मंत्री मोहसिन नकवी और पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से भी मुलाक़ात की. इसी दौरान इशाक डार ने कनाडा से सिंधु जल संधि बहाल कराने में समर्थन भी मांगा. भारत ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि को स्थगित कर दिया था.
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