19वीं सदी में अमेरिकन नेवी के एक बड़े अफसर अलफ्रेड थेयर महान कहते थे - 'Whoever rules the waves rules the world'. यानी जो भी लहरों माने समुद्र पर राज करेगा, वो दुनिया पर भी राज करेगा. और इसीलिए मॉडर्न जमाने में नेवी का महत्व बढ़ता जा रहा है. दुनिया का अधिकतर हिस्सा पानी है. इसलिए जिसकी नेवी जितनी बड़ी और ताकतवर होगी, उसकी पहुंच उतनी ही दूर तक होगी. लिहाजा भारत भी लगातार अपनी नेवी को मॉडर्न और बड़ा बनाने में लगा हुआ है. इसी कड़ी में 11 जुलाई को इंडियन नेवी में एक नया जंगी जहाज शामिल हुआ है. नाम है 'महेंद्रगिरी' (INS Mahendragiri).
मोर्चे पर तैनात हुआ INS महेंद्रगगिरी, इंडियन नेवी को मिला ये 'समुद्री योद्धा' कितना शक्तिशाली है?
INS Mahendragiri का नाम ओडिशा के पूर्वी घाट में मौजूद Mahendragiri Mountain Ranges के नाम पर रखा गया है. इसके प्रतीक चिह्न यानी क्रेस्ट पर Crested Goshawk नाम का एक पक्षी बना है. ये शिकार करने वाला एक ऐसा पक्षी है जो अपनी फुर्ती, सटीक निशाने और कभी न हार मानने वाले स्वभाव के लिए जाना जाता है.


INS महेंद्रगिरी का ध्येय वाक्य 'Might, Majestic, Matchless' है. इसका मतलब है कि ये ये जहाज इंटर्नल तौर पर स्थिर और युद्ध में अजेय है. INS महेंद्रगिरी इंडियन नेवी के 'प्रोजेक्ट 17-A' का हिस्सा है. बीते डेढ़ सालों में नेवी में शामिल होने वाला छठा वॉरशिप है. इससे पहले INS नीलगिरि, INS उदयगिरी, INS हिमगिरी, INS तारागिरी और बीते महीने ही INS दूनागिरी को नेवी में शामिल किया जा चुका है. हालिया कमिशनिंग में INS महेंद्रगिरी को रक्षा मंत्री की मौजूदगी में विशाखापत्तनम में नौसेना को सौंप दिया गया.
इस जंगी जहाज को इंडियन नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने डिजाइन किया है और इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने बनाया है. यह जंगी जहाज कई तरह के समुद्री ऑपरेशन्स को अंजाम देने में सक्षम है. इसमें फ्लीट एयर डिफेंस, एंटी-सरफेस वॉरफेयर, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, समुद्री ब्लॉकेड, निगरानी और मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) शामिल हैं.
महेंद्रगिरी एक ऐसा जहाज है जो हमले के लिए ब्रह्मोस और बचाव के लिए बराक जैसी मिसाइलों से लैस है. इस जहाज में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल हुआ है. ये इस बात को दिखाता है कि रक्षा क्षेत्र में भारत लगातार पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने के रास्ते पर है.
INS महेंद्रगिरी जहाज का वजन यानी डिस्प्लेसमेंट लगभग 6,670 टन है. साथ ही यह जहाज 28 नॉट्स यानी 51.856 तक की रफ्तार से चल सकता है. इस जहाज में सुपरसॉनिक रफ्तार वाली सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मीडियम दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-सबमरीन केपेबिलिटीज और एक मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर शामिल हैं. साथ ही, इसमें एडवांस्ड स्टील्थ फीचर्स हैं जिसकी वजह से दुश्मन के लिए इसे डिटेक्ट करना बहुत मुश्किल हो जाता है. ये जहाज कई आधुनिक सेंसर्स, नेटवर्क-सेंट्रिक कॉम्बैट सिस्टम और मॉडर्न हथियारों से लैस है.

इस जंगी जहाज का नाम ओडिशा के पूर्वी घाट में मौजूद महेंद्रगिरि की पर्वत श्रृंखला (Mahendragiri Mountain Ranges) के नाम पर रखा गया है. इसके प्रतीक चिह्न यानी क्रेस्ट पर 'क्रेस्टेड गोशॉक' (Crested Goshawk) नाम का एक पक्षी बना है. ये शिकार करने वाला एक ऐसा पक्षी है जो अपनी फुर्ती, सटीक निशाने और कभी न हार मानने वाले स्वभाव के लिए जाना जाता है.
यह भी पढ़ें: इंडियन नेवी 'त्रिशक्ति' मोर्चे पर तैनात, समुद्र में ताकत तीन गुना बढ़ जाएगी
समंदर में गेमचेंजर हैं स्टेल्थ फ्रिगेट्समॉडर्न वॉरफेयर को देखें तो नेवी का महत्व बढ़ता जा रहा है. वजह है समुद्र और उसमें होने वाला व्यापार. कुलजमा बात ये है कि व्यापार सुरक्षित तो इकोनॉमी सुरक्षित, और इकोनॉमी सुरक्षित तो देश सुरक्षित. और इस कड़ी में फ्रिगेट्स काफी मायने रखते हैं. आजकल के मॉडर्न फ्रिगेट्स को देखें तो इनमें हेलीपैड भी दिखते हैं जिससे ये सबमरीन पर हमला करते हैं. क्योंकि फ्रिगेट के पानी में रहने के दौरान उन पर सबमरीन से हमला होने के खतरा बना रहता है.
वहीं, हेलीकॉप्टर्स आसमान से पानी में माइंस आदि का इस्तेमाल कर आसानी सबमरीन को निशाना बना सकते हैं. वर्तमान में कई देशों की नेवी इनका इस्तेमाल बड़े जहाजों को सुरक्षा देने, निगरानी करने या पानी से जमीन ओर हमले करने के लिए भी करती हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध में ऑपरेशन ट्राइडेंट के समय भारत ने फ्रिगेट्स का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के कराची बंदरगाह को तहस-नहस कर दिया था.
वीडियो: इंडियन नेवी वॉरशिप महेंद्रगिरी समुद्र में उतरा, लेकिन सेना को कब मिलेगा?









