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18 महीने का बच्चा खेलते-खेलते गिरा, होठ पर चोट लगी, 5 दिन बाद मौत हो गई

बच्चे के मां-बाप का दावा है कि हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल के कन्नूर यूनिट में ले जाया गया. कहा गया कि वहां उसका खास इलाज किया जाएगा. लेकिन 10 जुलाई की रात करीब 9 बजे बच्चे की मौत हो गई.

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बेबी मेमोरियल अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप है (PHOTO-Google Maps, X)

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  • केरल के कन्नूर में 18 महीने के बच्चे की लापरवाही से एनेस्थीसिया की गलत डोज़ देने के कारण मौत हुई, जिसके बाद अस्पताल के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
  • बच्चे को उसके होंठ पर लगी चोट के इलाज के दौरान दिया गया एनेस्थीसिया और उससे जुड़ी गलतियों के कारण उसकी हालत पांच दिनों तक खराब रही और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।
  • मृत्यु के बाद अस्पताल ने लापरवाही को अस्वीकार किया है और पुलिस ने एनेस्थेटिस्ट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया है।

अस्पताल की लापरवाही से किसी मरीज की हालत बिगड़ने की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं. कभी-कभी तो इस वजह से मरीज की जान भी चली जाती है. ऐसा ही एक मामला केरल के कन्नूर में सामने आया है. यहां के एक अस्पताल में 18 महीने के एक बच्चे की डॉक्टरी लापरवाही से मौत हो गई. मौत की वजह कथित तौर पर एनेस्थीसिया की डोज थी. बच्चे को उसके होंठ पर लगे कट के इलाज के लिए एक छोटी-सी प्रक्रिया से एनेस्थीसिया दिया गया था. इसके बाद पहले तो बच्चे की तबीयत 5 दिनों तक खराब रही. आखिरकार उसकी मौत हो गई.

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क्या है पूरा मामला?

इंडिया टुडे ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया कि ये घटना शुक्रवार, 10 जुलाई को हुई. केरल के कन्नूर जिले के एक प्राइवेट अस्पताल में बच्चे का इलाज चल रहा था. वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था. रिपोर्ट के मुताबिक, शादी के लगभग 8 साल बाद दंपती को बेटा हुआ था. लेकिन अस्पताल की लापरवाही ने मां-बाप से उसके बच्चे को छीन लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, 5 जुलाई को घर पर खेलते समय बच्चे के होंठ पर चोट लग गई थी. इसके बाद उसे पय्यानूर के बेबी मेमोरियल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने घाव पर टांके लगाने के लिए बच्चे को एनेस्थीसिया दिया था.

एनेस्थीसिया वो दवा है जो टांके लगाने या ऑपरेशन के दौरान शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के लिए लगाई जाती है. बच्चे के परिवार का दावा है कि एनेस्थीसिया दिए जाने के कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई. इसके बाद से उसे होश ही नहीं आया.

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दूसरी यूनिट में शिफ्ट किया

बच्चे के मां-बाप का दावा है कि हालत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल के कन्नूर यूनिट में ले जाया गया. कहा गया कि वहां उसका स्पेशल इलाज किया जाएगा. लेकिन 10 जुलाई की रात करीब 9 बजे बच्चे की मौत हो गई. इसके बाद बच्चे के परिवार की शिकायत पर पुलिस ने एनेस्थीसिया देने वाले एनेस्थेटिस्ट के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया है. ये धारा तब लगती है जब किसी इंसानी जान या निजी सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप होता है.  इस धारा के तहत अधिकतम 3 महीने की सजा का प्रावधान है.

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अस्पताल ने क्या जवाब दिया?

बच्चे के मां-बाप अस्पताल पर आरोप लगा रहे हैं. लेकिन अस्पताल के मैनेजमेंट ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज कर दिया. अस्पताल का कहना है कि एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ. इसके बाद वह बच्चे को इंटेंसिव केयर यूनिट में ले गए. कन्नूर स्थित अस्पताल के इंटेंसिव केयर में भेजने से पहले बच्चे को इमरजेंसी वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. बेबी मेमोरियल अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि सही डोज़ और मेडिकल देखभाल के बावजूद एनेस्थीसिया के बाद दिक्कतें हो सकती हैं. अस्पताल का कहना है कि एनेस्थीसिया सही तरीके से दिया गया था और बच्चे की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश की गई थी.

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वीडियो: एनेस्थीसिया, वायग्रा, इंसुलिन जैसी दवाइयों की खोज के पीछे की कहानी दिलचस्प है

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