सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) को ‘गाली’ देने वाले शख्स के बारे में तो आपने सुन ही लिया होगा. जजों को ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ कहने के बाद प्रबल प्रताप नाम के शख्स ने कुछ पेपर्स जजों की ओर उछालकर कहा कि ‘ये सीजेआई को दे देना.’ उसने इसके साथ अपशब्द का भी इस्तेमाल किया, जिसे सुनकर कोर्ट में मौजूद जज, वकील, मुवक्किल सब चौंक गए. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो फैल गया. प्रबल प्रताप की इस विवादित हरकत को लोगों ने अलग-अलग तरीके से जज किया. सवाल ये भी उठा कि ये प्रबल प्रताप आखिर है कौन? वकील है या मुवक्किल? किस मामले पर उसे ऐसा गुस्सा आया कि उसने देश की सबसे बड़ी अदालत की बेअदबी कर दी.
कौन है प्रबल प्रताप? सुप्रीम कोर्ट में CJI को 'अपशब्द' कहने वाले की पूरी कुंडली मिल गई
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI के लिए अपशब्द बोलने और जजों की ओर कागज फेंकने वाले प्रबल प्रताप की पहचान सामने आ गई है. जानिए वह कौन हैं, किस मामले में कोर्ट पहुंचे थे और अदालत ने उनके खिलाफ क्या रुख अपनाया.


ये सारी जानकारी मिल गई. हम विस्तार से इसके बारे में आपको बताने वाले हैं. लेकिन पहले जान लें कि सुप्रीम कोर्ट में हुआ क्या था?
सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो रही थी. प्रबल प्रताप अपनी पैरवी खुद कर रहे थे. इस दौरान, वह बेंच को अड्रेस करते हुए कहते हैं, ‘मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट. मैं आपको ACP लखनऊ के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए ऑर्डर देने का ऑर्डर देता हूं.’ इससे तो जज भी चौंक जाते हैं कि ये कौन है जो जज को ऑर्डर देने का ऑर्डर दे रहा है? जस्टिस विश्वनाथन हैरानी से पूछते भी हैं- ‘आप मुझे ऑर्डर दे रहे हैं?’ प्रबल प्रताप उनके जवाब को बायपास करते हुए आगे कहते हैं,
मेरी तरफ से बस इतना ही. सब कुछ रिकॉर्ड पर है. यह मेरे पास पेपर्स हैं. दे देना सीजेआई को.
ये कहते हुए प्रबल प्रताप हवा में पेपर्स फेंक देते हैं और माइक के पास आकर जज के सामने ‘सीजेआई’ का नाम लेकर अपशब्द तक बोल जाते हैं. इसके बाद सुरक्षाकर्मी उसे कोर्टरूम से बाहर लेकर चले जाते हैं.
कौन हैं प्रबल प्रताप?इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप ही मच गया. लोग जानना चाहते थे कि ये शख्स कौन है? अब इसका पता चल गया है. इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रबल प्रताप उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के रहने वाले हैं. वह लखनऊ के एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते थे. आरोप है कि प्रबल प्रताप ने अपने दफ्तर में एक महिला सहकर्मी को परेशान किया था. कंपनी ने जांच कराई तो पता चला कि उन्होंने कथित तौर पर महिला सहकर्मी को आपत्तिजनक मेल और संदेश भेजे थे. उन्हें दफ्तर में भी दुर्व्यवहार का दोषी पाया गया. पहले तो सख्त चेतावनियां दी गईं लेकिन जब सुधार नहीं हुआ तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, नौकरी से निकाले जाने के बाद प्रबल प्रताप ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कंपनी पर केस-मुकदमे कर दिए. उस पर 'देश विरोधी गतिविधियों' में शामिल रहने का आरोप भी लगाया. इन्हीं आरोपों पर वो कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए कोर्ट गए थे. उन्होंने लखनऊ की सीजेएम कोर्ट में कंपनी के खिलाफ देशविरोधी काम करने की एफआईआर दर्ज कराने के लिए अर्जी डाली. कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट तलब की. पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल आने पर कोर्ट ने इसी साल 26 फरवरी को प्रबल से अपने आरोपों की पुष्टि के सबूत मांगे. सबूत तत्काल नहीं मिलने पर कोर्ट ने मामले को पुलिस एफआईआर के बजाय सीधे 'कम्प्लेंट केस' यानी निजी शिकायत के रूप में दर्ज कर लिया.
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हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दीकरीब महीने भर बाद 6 अप्रैल को प्रबल प्रताप को इस मामले में कोर्ट के सामने सबूत पेश करने थे लेकिन कथित तौर पर पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने का दबाव बनाते हुए प्रबल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में भी अपील दायर कर दी. उनकी दलील थी कि कम्प्लेंट केस रद्द कर सीधे एफआईआर का आदेश दिया जाए. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि जब निचली अदालत मामले की सुनवाई कर रही है तो कानून के मुताबिक वहीं तथ्य रखे जाएं.
कोर्ट ने क्या रिएक्शन दिया?हाईकोर्ट से निराश होकर प्रबल सुप्रीम कोर्ट आए और यहां उन्होंने जो किया उसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया. हालांकि, कोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना या कोई सख्त एक्शन न लेने का फैसला किया है. लाइव लॉ के मुताबिक जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की हालत देखते हुए अदालत उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहती. जहां तक इस मामले के मेरिट्स का सवाल है, अदालत ने सभी रिकॉर्ड देखे हैं. अदालत को निचली अदालत के फैसले या आदेश में दखल देने का कोई ठोस कारण नहीं मिला.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट के जजों के सामने शख्स ने पेपर्स फेंके, CJI को 'गाली' दी









