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ATM से ₹10,000 नहीं निकले लेकिन बैंक ने अकाउंट से काट लिए, कोर्ट ने कहा, 'अब कस्टमर को ₹70,000 दो'

हालांकि, याचिकाकर्ता ने मुआवजे में केवल 10 हजार की ही मांग की थी. लेकिन कमीशन ने कहा कि सर्विस में कमी और शिकायत को सुलझाने में काफी देर हुई है. इसकी वजह से याचिकाकर्ता को ज्यादा मुआवजा देना होगा. कमीशन अपने आदेश में बैंक में महीने भर के भीतर याचिकाकर्ता को 70 हजार मुआवजा देने का आदेश दिया.

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शख्स को ATM से कैश नहीं मिला पर बैंक ने काट लिया. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • त्रिशूर कंज्यूमर कमीशन ने वर्ष 2014 के मामले में बैंक को आदेश दिया कि वह कस्टमर को 70 हजार रुपये का मुआवजा दे, क्योंकि बैंक ने ATM ट्रांजैक्शन की शिकायत का समाधान नहीं किया।
  • शख्स ने दूसरे बैंक के ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की पर कैश नहीं मिला, फिर भी उसका खाता डेबिट हो गया; शिकायत के बावजूद बैंक ने जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
  • कमीशन ने पाया कि बैंक ने विवादित ट्रांजैक्शन की जांच में असफल रहने के कारण ग्राहक को मुआवजा देना जरुरी समझा, और महीने भर के भीतर राशि भुगतान का आदेश दिया।

केरल के त्रिशूर जिला कंज्यूमर कमीशन ने एक बैंक को अपने एक कस्टमर को 70 हजार का मुआवजा देने का आदेश दिया है. मामला साल 2014 का है, जब एक शख्स ने ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की पर मशीन से कैश नहीं निकला. बावजूद इसके ट्रांजैक्शन सक्सेसफुल दिखाने लगा. कस्टमर ने बैंक में शिकायत भी की, लेकिन उनकी समस्या नहीं दूर हुई और मामला कोर्ट पहुंच गया. जांच में कमीशन ने भी पाया कि ATM के रिकॉर्ड में उस ट्रांजैक्शन का कोई डाटा नहीं था.

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केस की सुनवाई 31 अगस्त को कमीशन के अध्यक्ष CT साबू, श्रीजा एस और राम मोहन आर की बेंच कर रही थी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान कमीशन ने पाया कि बैंक अपने कस्टमर की शिकायत को सुलझाने में नाकाम रहा. कमीशन ने अपने आदेश में कहा, 

‘जांच और सपोर्टिंग रिकॉर्ड के आधार पर शिकायत को सुलझाने के बजाय, बैंक ने कैश के ट्रांजैक्शन के बारे में बिना कोई ठोस सबूत दिए ही उसे खारिज कर दिया. बैंक के इस बर्ताव से शिकायतकर्ता को काफी मानसिक परेशानी, असुविधा, आर्थिक तंगी और नुकसान उठाना पड़ा. इसी वजह से मुआवजे की मांग की गई थी.’ 

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मामला 1 मार्च 2014 का है. शख्स ने याचिका में बताया कि वो बैंक का कस्टमर था, लेकिन उसने दूसरे बैंक के ATM से 10 हजार रुपये निकालने की कोशिश की. हालांकि रुपये नहीं निकले. बावजूद इसके ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में वो डेबिडेट दिखा रहा था. साथ ही अकाउंट से 10 हजार कट भी गए. कस्टमर ने मामले की शिकायत बैंक में की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. पीड़ित ने साल 2015 में बैंक को नोटिस भी भेजा. बावजूद इसके बैंक ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया. इसके बाद व्यक्ति ने अपनी मेहनत की कमाई के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. 

बैंक के वकील ने कोर्ट को बताया कि ATM ट्रांजैक्शन की मदद से 10 हजार निकाले गए थे. दावा किया कि कस्टमर की शिकायत के बाद मामले की जांच की गई और ट्रांजैक्शन को सक्सेसफुल पाया गया और इसमें ATM से कैश निकलने की बात भी पता चली. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भले ही पीड़ित ने किसी दूसरे बैंक के ATM से पैसे निकालने की कोशिश की और उन्हें समस्या हुई, लेकिन शिकायत मिलने के बाद जिस बैंक में कस्टमर का अकाउंट था, उस बैंक को शिकायत सुलझानी चाहिए थी.

कमीशन ने कहा कि कस्टमर से इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो दूसरे बैंक के ATM की खराबी को खुद ही साबित करे. कोर्ट ने कहा कि बैंक ने ‘विवादित ATM ट्रांजैक्शन’ की जांच करने में नाकाम रहा. साथ ही यह भी साबित नहीं कर पाया की याचिकाकर्ता को 10 हजार कैश मिल गए थे.

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हालांकि, याचिकाकर्ता ने मुआवजे में केवल 10 हजार की ही मांग की थी. लेकिन कमीशन ने कहा कि सर्विस में कमी और शिकायत को सुलझाने में काफी देर हुई है. इसकी वजह से याचिकाकर्ता को ज्यादा मुआवजा देना होगा. कमीशन अपने आदेश में बैंक में महीने भर के भीतर याचिकाकर्ता को 70 हजार मुआवजा देने का आदेश दिया. इसमें आर्थिक नुकसान, परेशानी और कानूनी काम में खर्च हुए रुपये भी शामिल है. 

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