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'39 रुपये का अप्रेजल', 'मां को कुछ नहीं भेज पाता', नोएडा के वर्कर्स ने बताई आपबीती

नोएडा में चार दिन से फैक्ट्री में काम करने वाले वर्कर्स प्रोटेस्ट कर रहे थे. सैलरी बढ़ाने की डिमांड थी. 13 अप्रैल को ये प्रोटेस्ट हिंसक हो गया. पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई. पुलिस ने कई वर्कर्स को हिरासत में भी लिया है. प्रदर्शन कर रहे वर्कर्स का कहना है कि उनको जितना पैसा मिल रहा, उतने में गुजारा संभव नहीं है.

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नोएडा में फैक्ट्री वर्कर्स प्रोटेस्ट कर रहे थे. (इंडिया टुडे)

काम की कोई लिमिट नहीं. रविवार की छुट्टी पर भी आफत. किसी का साल भर का अप्रेजल 39 रुपये. वहीं कोई सालों से काम कर रहा, लेकिन इंक्रीमेंट के नाम पर बढ़े सिर्फ 320 रुपये. ये किसी कहानी का प्लॉट नहीं. नोएडा में मजदूरी कर रहे वर्कर्स की आपबीती है. जो पिछले चार दिनों से मजदूरी बढ़ाने को लेकर प्रोटेस्ट कर रहे थे.

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वर्कर्स का विरोध प्रदर्शन 10 अप्रैल को शुरू हुआ था. इसमें इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट बिजनेस से जुड़े मजदूर शामिल हैं. 13 अप्रैल को ये प्रोटेस्ट हिंसक हो गया. पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी भी हुई. पुलिस ने कई वर्कर्स को हिरासत में भी लिया है. 

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में प्रोटेस्ट में शामिल तीन वर्कर्स ने अपनी परेशानी बताई हैं. सुरेंद्र कश्यप उत्तर प्रदेश के संभल के रहने वाले हैं. उनकी उम्र 18 साल है. वे नोएडा के सेक्टर 49 में अनुभव अपैरल्स नाम की कंपनी में मेजरमेंट चेकर का काम करते हैं. उन्होंने बताया, 

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गुड़गांव के पास मानेसर में काम कर रहे वर्कर्स आठ घंटे काम के लिए 20 हजार रुपये मिल रहे हैं. फिर हमारा पैसा क्यों नहीं बढ़ रहा. मुझे सिर्फ 13 हजार रुपये मिलते हैं. 4 हजार किराया देता हूं. एक गैस सिलेंडर की कीमत 400 रुपये हो गई है, हम कैसे गुजारा करेंगे?

सुरेंद्र ने बताया कि वर्क कंडीशन भी काफी खराब है. कंपनी वाले काम का बहुत मुश्किल टारगेट भी देते हैं. अगर टारगेट पूरा नहीं हुआ तो उनको बेइज्जत भी किया जाता है. वे कई सालों से काम कर रहे हैं, लेकिन उनको सिर्फ 320 रुपये का अप्रेजल मिला है. उन्होंने बताया, 

वे हमें रात में काम करने के लिए मजबूर करते हैं. अगर कोई बीमार होता है तो कहते कि अगली बार मत आना. अगर हम रविवार को काम नहीं करते तो वे हमें नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं.

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यूपी के ही कन्नौज के रहने वाले राहुल 25 साल के हैं. वे एक्सपोर्ट लाइन में काम करते हैं. राहुल 2018 से ये काम कर रहे हैं. उनकी शादी हो गई है. दो बच्चे भी हैं. एक की उम्र तीन और दूसरे की एक साल है. राहुल बताते हैं, 

मेरी इनकम 13,500 रुपये है. मैं कुछ भी बचत नहीं कर पाता. घर पर पैसा नहीं भेज पाता. कमरे के किराए के 5,000 और राशन में 4,000 रुपये खर्च हो जाता है. कुछ पैसा प्रोविडेंट फंड में भी कट जाता है. आखिर में मेरे पास 3,000 रुपये बचते हैं, जिनसे पर चार लोग निर्भर होते हैं. अपने बच्चों को कैसे पढ़ा पाऊंगा?

राहुल ने बताया कि पिछले साल उनकी सैलरी सिर्फ 39 रुपये बढ़ी है. उनकी शिकायत है कि HR उनकी बातों का बिल्कुल नोटिस नहीं लेता. कोई उनकी सुनने वाला नहीं है. 28 साल के मुहम्मद नूर आलम एक कारीगर हैं. बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले हैं. नूर ने बताया,

 मैं 20,000 रुपये कमाता हूं. लेकिन कुछ भी सेविंग नहीं हो पाती. मैं बिहार में अपनी मां को एक भी पैसा नहीं भेज पाता. सारे पैसे मेरे खुद के गुजारे में खत्म हो जाते हैं. क्योंकि महंगाई इतनी बढ़ गई है. 

मुहम्मद नूर ने बताया कि सबको उम्मीद थी कि महंगाई कम होगी. लेकिन अब तो एक सिलेंडर 5,000 रुपये का मिल रहा है. युद्ध के चलते सिलेंडर की दिक्कत है, लेकिन बाकी चीजों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं.

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