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उत्तराखंड बॉर्डर पर निहंग सिखों का हंगामा थमा, रात भर चली बातचीत के बाद विवाद हुआ शांत

Nihang Sikhs Protest: उत्तराखंड की सीमा के पास निहंग सिखों का प्रदर्शन बातचीत के बाद खत्म हो गया है. रात भर चली बातचीत के बाद प्रशासन ने कहा कि सभी विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कर लिया गया है.

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उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश बॉर्डर पर निहंग विवाद थम गया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर निहंग सिखों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राज्य प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच रातभर चली बातचीत के बाद समाधान निकाला गया।
  • यह विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब से लौट रहे निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव के बाद चार निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में शुरू हुआ था।
  • बातचीत से निहंगों की गिरफ्तारी और पुलिस अधिकारियों की जांच की मांगों पर सहमति बनी और प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक वापस लौटने का निर्णय लिया, जिससे क्षेत्र में हालात सामान्य हुए।

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश की सीमा पर जो तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी, उसका आखिरकार समाधान निकल आया है. सैंकड़ों निहंग सिख विरोध प्रदर्शन करते हुए उत्तराखंड की सीमा पर पहुंचे थे. जिसके बाद राज्य सरकार को बातचीत के लिए आना पड़ा. पूरी रात चली बातचीत के बाद सुबह करीब साढ़े तीन बजे निहंग वापस लौटने पर राज़ी हो गए. मगर उससे पहले ज़ोरदार बवाल हुआ था. आखिर ऐसा क्या हुआ कि पंजाब से जत्था निकलकर उत्तराखंड की बॉर्डर पर इस तरह जा पहुंचा? मामला हल करने के लिए रातभर बातचीत क्यों करनी पड़ी?

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इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अंकित शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़, पूरा मामला उत्तराखंड के ‘कर्णप्रयाग’ और ‘नगरासू’ गुरुद्वारा विवाद से जुड़ा है. 16 जून को कर्णप्रयाग में, हेमकुंड साहिब से लौट रहे कुछ निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच टकराव हुआ था. इसी मामले में चार निहंगों की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया गया था. ये कहा गया था कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के निहंगों का जत्था ‘उत्तराखंड’ की ओर कूच करेगा.

क्या है निहंगों की मांगें?

पहला जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे से निकलकर विकासनगर के पास कुल्हाल चेक पोस्ट तक पहुंचा. ‘पांवटा साहिब’ में प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई. लेकिन मार्च रोकने पर सहमति नहीं बन पाई. इसके बाद जत्था आगे बढ़ गया. इस दौरान निहंग प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका इरादा किसी तरह का टकराव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना नहीं है.

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उनका कहना था कि वो शांतिपूर्वक ‘हेमकुंड साहिब’ की यात्रा करना चाहते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि गिरफ्तार किए गए चार निहंगों को रिहा किया जाए. उनकी मांग है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने निहंगों को गिरफ्तार किया है उनकी जांच हो और उन्हें सस्पेंड किया जाए. 

विरोध प्रदर्शन कैसे बढ़ा? 

⁠⁠⁠⁠इसके बाद करीब 50 निहंग बाइक से देहरादून की तरफ बढ़ने लगे. जबकि करीब 150 निहंग ‘पांवटा साहिब’ लौट गए. कुछ लोग छोटे-छोटे ग्रुप्स में अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ने लगे. इस बीच, देहरादून के प्रेमनगर इलाके को उत्तराखंड पुलिस ने पूरी तरह छावनी में बदल दिया था. मगर कुछ निहंग पुलिस की पहली-घेराबंदी को पार कर ‘ऋषिकेश’ की तरफ़ निकल गए.

इसके बाद देर रात ‘जोगीवाला चेक-पोस्ट’ पर ‘दिल्ली-ऋषिकेश हाईवे’ सहित कई रास्तों पर बैरिकेडिंग करनी पड़ी. कई घंटों तक ट्रैफिक प्रभावित रहा. जैसे ही जत्था वहां पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद अलग-अलग जगह मौजूद निहंग धीरे-धीरे वापस ‘रेस कोर्स गुरुद्वारा’ की तरफ पहुंचे. यहीं से बातचीत का नया दौर शुरू हुआ.

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देहरादून के रेस कोर्स में जो गुरुद्वारा है, वहां जिला प्रशासन, पुलिस अफ़सरों और सिख समाज के प्रतिनिधियों के बीच पूरी रात बातचीत चली. आखिरकार, तड़के करीब साढ़े 3 बजे सहमति बन पाई. जिसके बाद निहंग वापस ‘पांवटा साहिब’ लौटने पर राज़ी हो गए. फिलहाल देहरादून में हालात सामान्य होने लगे हैं.

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रात भर क्या बात हुई?

बातचीत में शामिल कांग्रेस नेता और उत्तराखंड सिख समाज के प्रतिनिधि अमरजीत सिंह ने कहा कि निहंगों का इरादा कभी भी किसी तरह का उन्माद फैलाना नहीं था. वो कहते हैं कि, बयानबाज़ी दोनों तरफ से हुईं, मगर इसे कभी भी पहाड़–बनाम–सिख-समाज की लड़ाई नहीं माना जाना चाहिए.

अमरजीत सिंह ने बताया कि उनकी बातचीत पॉजिटिव रही और सभी पक्षों ने शांति के साथ मामले का समाधान निकालने पर सहमति जताई है. इसमें उन्होंने प्रशासन के रोल की भी तारीफ की. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती स्तर पर सरकार से कुछ चूक हुई थी, जिसकी वजह से विवाद बढ़ा.

वहीं, देहरादून के DM आशीष चौहान ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को शांति और संयम के साथ संभाला गया. उनका कहना है कि लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना और बातचीत के ज़रिए सोल्यूशन निकालना ही प्रशासन की प्राथमिकता थी.

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