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'Act of God' नहीं आया काम, NHAI से बर्बाद फसल का भारी मुआवजा लेकर ही माना किसान

Shimla Orchard Owner NHAI: तमाम सुनवाइयों के बाद अथॉरिटी ने अपना फैसला बदला है. उसने याचिकाकर्ता को 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई है. इसके बाद उसने केस वापस ले लिया. याचिकाकर्ता का नाम नरिंदर सिंह राठौर है.

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शख्स के घर पर क्रेंट की दीवारें गिरने से उसके बाघ को नुकसान हुआ था. (प्रतीकात्मक फोटो- इंडिया टुडे)

शिमला में धल्ली के पास एक व्यक्ति की जमीन और सेब के पेड़ों को भूस्खलन के कारण नुकसान हुआ था. शख्स ने दावा किया था कि भूस्खलन का कारण हाईवे परियोजना थी. इसके बाद उसने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का रुख किया. नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के खिलाफ केस दर्ज कराया. मगर NHAI ने कहा कि ये सब ‘एक्ट ऑफ गोड’ है. ये एक कानूनी और बीमा संबंधी शब्द है.

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लेकिन तमाम सुनवाइयों के बाद अथॉरिटी ने अपना फैसला बदला है. उसने याचिकाकर्ता को 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई है. इसके बाद उसने केस वापस ले लिया. याचिकाकर्ता का नाम नरिंदर सिंह राठौर है.

440 सेब के पेड़ों के मुआवजे की मांग  

घटना कालका-शिमला राष्ट्रीय मार्ग-5 पर चार लेन की परियोजना के दौरान हुई. नरिंदर सिंह राठौड़ का 50 बीघा सेब का बगीचा प्रोजेक्ट वाली सड़क से 200 मीटर गहरी घाटी में था. विकास कार्य के बीच में 25 मई 2025 को नरिंदर सिंह के बाग पर क्रेट की दीवारें गिर गई. जिससे उनके फलों का काफी नुकसान हुआ. इस नुकसान की भरपाई के लिए नरिंदर सिंह ने NHAI के खिलाफ NGT में केस दायर किया. और लगभग 440 सेब के पेड़ों के मुआवजे की मांग की.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नरिंदर सिंह ने दावा किया कि पिछले साल (2025) जब NHAI और उनकी कंसेशनेयर कंपनी ने क्रेट वॉल लगाई थी, तभी उन्होंने चेतावनी दी थी कि वे कभी भी गिर सकती हैं. क्योंकि उन्हें बिना नींव खोदे ढलान पर लगाया गया था. दीवारों के गिरने से एक हफ्ता पहले NHAI को एक चिट्ठी लिखी थी. जिस पर हमें कहा गया कि 26 मई तक कोई हमसे संपर्क करेगा. लेकिन उससे पहले ही हादसा हो गया.

ये भी पढ़ें: NHAI ने 'एक्ट ऑफ गॉड' के नाम पर नहीं दिया मुआवजा

NHAI ने भूस्खलन के लिए बारिश को ठहराया जिम्मेदार

मामले पर बागवानी विभाग ने NGT को बताया कि भूस्खलन और मलबे के कारण क्रेट वॉल गिरने से लगभग 550 फल देने वाले सेब के पौधे क्षतिग्रस्त हो गए थे. हालांकि, NHAI ने दावा किया कि सिर्फ 40 सेब के पेड़ों को ही नुकसान हुआ था.

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NHAI ने 19 मई की सुनवाई में NGT को भूस्खलन की घटना को ‘दैवीय आपदा’ (Act of God) बताया. साथ ही मौसम विज्ञान विभाग की मई 2025 की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि शिमला में इस बार अत्यधिक बारिश हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, हाइवे अथॉरिटी ने कहा था,

“भूस्खलन एक असाधारण प्राकृतिक घटना है, जिसे ईश्वरीय कृत्य या विस मेजर (Vis Major) माना जाता है. ये NHAI और उसके कंसेशनेयर की उचित उम्मीद और नियंत्रण से बाहर है.”

हालांकि, राठौड़ का कहना है कि इस इलाके में मई में कभी इतनी भारी बारिश नहीं होती. आखिर में NHAI ने अपना रुख बदला और अधिकारियों की मौजूदगी में नुकसान का जायजा लिया.

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, बाग के मालिक को 1 करोड़ 80 लाख रुपये दिए गए हैं. जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनके क्लाइंट केस वापस ले रहे हैं. प्रोजेक्ट डायरेक्टर (कालका-शिमला) नेशनल हाईवे-5, आनंद दहिया ने माना कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स में जरूरी सावधानियां बरतने के बाद भी कुछ नुकसान होना तय होता है.

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