NHAI ने 'एक्ट ऑफ गॉड' के नाम पर नहीं दिया मुआवजा, लैंडसाइड से किसानों की फसल बर्बाद हुई थी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी किसनों के लिए मुआवजे के लिए आवाज उठाई थी. अब NHAI का जवाब आया है. इसमें NHAI ने कहा कि दैवीय आपदा की वजह से प्राइवेट प्रॉपर्टी को हुआ नुकसान पर्यावरण से जुड़ा हुआ विवाद नहीं माना जा सकता है.

पिछले साल मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भूस्खलन हुआ था. ये आपदा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के शिमला हाईवे बाईपास प्रोजेक्ट वाले इलाके में भी आई थी. घटना में कुछ किसानों के सेब की फसलों को काफी नुकसान हुआ था, जिसके बाद NHAI से मुआवजे की मांग की गई थी. अब इस मामले में NHAI का स्टेटमेंट आया है. उसने मुआवजा देने से इनकार कर दिया. साथ ही लैंडस्लाइड को ‘Act Of God’ यानी दैवीय घटना बताया.
घटना उस वक्त हुई थी, जब NHAI शिमला के मशोबरा के पास शकराल से ढल्ली तक 4 लेन सड़क बनाने के काम कर रहा था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लैंडस्लाइड में कई किसानों के सेब की फसलों को नुकसान हुआ था. मुआवजे के लिए नरेंद्र सिंह राठौर नाम के एक शख्स ने याचिका दायर की थी. इसमें NHAI पर आरोप लगाया गया कि NH-22 के शिमला बाईपास वाले हिस्से पर पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई और 4-लेन का काम होने से लैंडस्लाइड हुआ है. इसकी वजह से धल्ली इलाके के पास उनकी जमीन को नुकसान पहुंचा है.
उन्होंने अपनी याचिका में यह भी दावा किया कि NHAI के निर्माण कार्य ने पहाड़ी को अस्थिर कर दिया है. इससे उनके प्राइवेट लैंड पर लगे सेब के बागों को नुकसान पहुंचा है. साथ ही घरों तथा आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो गया है.
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी किसनों के लिए मुआवजे के लिए आवाज उठाई थी. अब नरेंद्र की याचिका पर NHAI का जवाब आया है. इसमें NHAI ने कहा कि दैवीय आपदा की वजह से प्राइवेट प्रॉपर्टी को हुआ नुकसान पर्यावरण से जुड़ा हुआ विवाद नहीं माना जा सकता है.
NHAI ने अपने हलफनामे कहा कि 2025 में मानसून की वजह से पूरे शिमला में तेज बारिश हुई थी. इसकी वजह से शिमला के कई जगहों पर लैंडस्लाइड हुआ, जिसमें प्रोजेक्ट वाला इलाका भी शामिल है. NHAI ने हलफनामे में कहा कि चूंकि यह दैवीय घटना है इसलिए वो प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं देंगे.
NHAI ने हॉर्टिकल्चर डिपार्मेंट (बागवानी विभाग) की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़ा कर दिया. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 4-लेन सड़क बनाने से जुड़े काम के दौरान पहाड़ी काटने से लैंडस्लाइड हुआ और प्राइवेट लैंड पर लगे करीब 440 सेब के पेड़ों को नुकसान पहुंचा था. रिपोर्ट में करीब 32.3 लाख रुपये का नुकसान बताया गया था.
NHAI के हलफनामे के मुताबिक, प्राधिकरण के प्रोजेक्ट कंसेशनर Gawar Shimla Highway Pvt Ltd ने खुद से जांच कर दावा किया कि लैंडस्लाइड में मात्र 40 सेब के पेड़ों को नुकसान हुआ था. NHAI ने शिमला के SDM (ग्रामीण) से अपील की है कि हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट की रिपोर्ट की फिर से जांच की जाए.
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