नेपाल में आए फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है. कई इलाके जो पहले लोगों और टूरिस्ट्स से गुलजार रहते थे, अब मलबे का ढेर बन कर रह गए हैं. त्रिशूली कॉरिडोर में बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट इमेज एनालिसिस और भयानक तस्वीरें दिखा रही हैं. सैटेलाइट इमेजरी के मुताबिक, कई पुल बह चुके हैं. वहां मौजूद हाइड्रोपावर प्लांट बेकार हो गया है. रसुवागढ़ी इमिग्रेशन ऑफिस के बह जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हैं.
जहां घर थे वहां अब सिर्फ मलबा, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी नेपाल की तबाही
त्रिशूली कॉरिडोर की सैटेलाइट इमेजरी में 16 पुल क्रॉसिंग को नुकसान, 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित और स्याब्रूबेसी में 114 स्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त या तबाह दिखे.

हालांकि, टूटी हुई सड़कों, पुलों और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की गिनती से इंसानी नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता लेकिन फैले हुए मलबे से तबाही का पैमाना साफ समझ में आता है. शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इंफ्रास्ट्रक्चर को लगभग 200 अरब रुपये का नुकसान हुआ है. सड़क विभाग के प्रमुख बिजय जयशी ने सड़कों और पुलों को हुए नुकसान का अनुमान 15 अरब रुपये से ज़्यादा लगाया है.
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने कमर्शियल सैटेलाइट कंपनियां जैसे वैंटोर और प्लैनेट लैब्स PBC से सैटलाइट इमेजरी प्राप्त की है. टीम ने सैटेलाइट इमेजरी का अलग से एनालिसिस किया. साथ ही नदी कॉरिडोर के किनारे हुए गंभीर नुकसान का पता लगाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड भी खंगाले.

OSINT टीम ने पुल 16 क्रॉसिंग का अलग से एनालिसिस किया. एनालिसिस में भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर पर 16 पुल क्रॉसिंग तक हुआ नुकसान साफ दिख रहा है. इसमें स्याब्रूबेसी, बिदुर और बेत्रावती बाजार के आस-पास की जगहें शामिल हैं. स्याब्रूबेसी के आसपास तीन क्रॉसिंग पूरी तरह खत्म हो गई हैं. बिदुर के आसपास आठ और बेत्रावती बाजार में दो क्रॉसिंग्स पर भारी नुकसान हुआ है. तीन और क्रॉसिंग्स का अलग से एनालिसिस किया गया. इनमें से एक आंशिक रूप से डूबी हुई थी. इमेज को देखें तो लगता है कि बाकी क्रॉसिंग्स बह चुकी हैं.

प्रभावित इलाकों को देखें तो वहां मौजूद नदियों के सिस्टम पर नेपाल के कुछ सबसे महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर बने हैं. OSINT की मैपिंग में प्रभावित कॉरिडोर के किनारे सात बड़े प्लांट्स का पता चला है. 111 मेगावाट के रसुवागढ़ी प्रोजेक्ट की सैटेलाइट इमेजरी सामने आई है. इन्हें देखें तो पता चलता है कि बाढ़ से पहले और बाद प्लांट कॉम्प्लेक्स और उससे जुड़ी इमारतों का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया है.

नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के प्रवक्ता राजन ढकाल के मुताबिक बाढ़ से कुल 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और एक सोलर प्लांट प्रभावित हुए हैं. प्रभावित प्रोजेक्ट्स की वजह से नेपाल के नेशनल ग्रिड से कुल 431.1 मेगावाट बिजली की सप्लाई बंद हो गई है. इस लिस्ट में रासुवागढ़ी, संजेन फैसिलिटीज, लांगटांग खोला, अपर त्रिशूली 3A, अपर मैलुंग, मैलुंग, त्रिशूली और देवीघाट शामिल हैं.

नेपाल में हुई तबाही सिर्फ सड़कों और पावर प्लांट तक ही सीमित नहीं है. सैटेलाइट तस्वीरों के एनालिसिस से स्याप्रु बेसी नदी के किनारे 192 स्ट्रक्चर्स की पहचान की गई है. इनमें से 114 या तो क्षतिग्रस्त हैं या बह गए. जबकि 78 स्ट्रक्चर अभी भी सुरक्षित दिख रहे हैं.
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बाढ़ के बाद की तस्वीरों में नदी और मलबे का दायरा उन इलाकों तक फैल गया है जहां पहले घर हुआ करते थे. नदी के किनारे बसे पूरे इलाके खत्म हो गए हैं. अभी भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि नदी के ऊपरी हिस्से में बनी एक नई बैरियर झील के टूटने का खतरा मंडरा रहा है. रिसर्चर्स का कहना है कि पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है, और साथ ही खतरा भी बढ़ रहा है.
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