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NEET पेपर लीक: चायवाले ने घर में किया था पेपर लीक, एक छात्र की मां से लिए लाखों के गहने

NEET पेपर लीक मामले में चायवाले का नाम सामने आया है. आरोपी चायवाले ने पेमेंट की गारंटी के लिए स्टूडेंट्स के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट और एजुकेशनल सर्टिफिकेट अपने पास रखे थे. इतना ही नहीं लाखों रुपये की डील भी हुई थी.

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NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI ने सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल की. (Courtesy: PTI)

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  • CBI ने पुणे के चायवाले शेशराव बजरंग सूर्यवंशी को NEET-UG पेपर लीक मामले में 14वां आरोपी बनाया और चार्जशीट दाखिल की है, उसे 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
  • जांच में पाया गया कि शेशराव ने नासिक के पंचक गांव में कम से कम 10 छात्रों को रखा था और लाखों रुपये में पेपर लीक कराने का सौदा किया था।
  • NEET परीक्षा लीक होने पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर दी, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

इस साल अप्रैल का महीना. पुणे में दो NEET-UG एस्पिरेंट्स कोचिंग सेंटर से निकले और पास की चाय की दुकान पर बैठ गए. दोनों के बीच NEET एग्जाम की टेंशन को लेकर बातचीत होने लगी. चायवाला शेशराव बजरंग सूर्यवंशी भी कान लगाए बैठा था. बातचीत खत्म हुई तो उसने दोनों को ऑफर दे डाला. 4.5 लाख रुपये दो, NEET का क्वेश्चन पेपर दिला दूंगा. 3 मई को एग्जाम होना था. अब इसी चायवाले को CBI ने NEET-UG पेपर लीक केस में 14वां आरोपी बनाया है. एजेंसी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है.

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इंडियन एक्सप्रेस न्यूजपेपर की रिपोर्ट के मुताबिक, शेशराव बजरंग सूर्यवंशी ने दोनों एस्पिरेंट्स से कहा कि उसका एक दोस्त डॉक्टर है. वो NEET का क्वेश्चन पेपर दिलाने में मदद कर सकता है. शेशराव पुणे में 'मालक चहा' के नाम से एक टी शॉप चलाता है. उसे 2 सितंबर को गिरफ्तार किया गया.

छात्रों को घर में रखकर पेपर लीक कराया

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने NEET पेपर लीक मामले में शेशराव बजरंग सूर्यवंशी को आरोपी बनाया है. आरोप है कि उसका इस केस में नासिक से गिरफ्तार करियर काउंसलर शुभम खैरनार से कनेक्शन है. जांच एजेंसी के साथ उसकी तीन दिन की रिमांड खत्म होने के बाद उसे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया.

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पेमेंट की गारंटी के लिए कागजात रखे

CBI को जांच में पता चला कि शेशराव बजरंग ने नासिक के पंचक गांव में एक घर पर कम से कम 10 छात्रों को रखा. नीट के लीक पेपर के बदले उसे छात्रों से लाखों रुपये लेने थे. आरोप है कि उसने पेमेंट की गारंटी के लिए स्टूडेंट्स के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट और एजुकेशनल सर्टिफिकेट अपने पास रखे थे.

अखबार ने एक सूत्र के हवाले से लिखा,

"इस साल बीच अप्रैल में उनमें से दो लोग एक दुकान में बैठकर पेपर के बारे में चर्चा कर रहे थे, तभी वो शख्स उनके पास आया. एक सौदा तय होने के बाद 28 अप्रैल को वो उन्हें पंचक गांव के एक घर में ले गया. वहां वे आठ अन्य छात्रों के साथ बैठे और उन्हें NEET-UG परीक्षा (जो 3 मई को हुई थी) के कथित तौर पर लीक हुए प्रश्न दिए गए. उन्होंने अगले तीन-चार दिनों तक उन सवालों की पढ़ाई की."

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जांच में आगे पता चला कि इन छात्रों को 2 मई को घर से जाने के लिए कहा गया. लीक सवाल भी वापस करने के लिए कहा गया. लेकिन, एक छात्र ने उन सभी क्वेश्चन को चुपके से अपने मोबाइल में स्कैन कर लिया.

सोर्स के मुताबिक, एग्जाम के बाद शेशराव बजरंग सूर्यवंशी ने एक छात्र से 3 लाख रुपये कैश उसकी चाय की दुकान पर देने के लिए कहा. छात्र की मां ने रकम तो नकद नहीं दी, लेकिन किसी तरह 35.8 ग्राम सोने की ज्वेलरी जुटाकर शेशराव को दे दी. दूसरा छात्र पैसे चुकाने की बात करता रहा, टाइम मांगता रहा, लेकिन पैसे दिए नहीं.

CBI को शेशराव बजरंग के मोबाइल से लीक सवालों की फोटोकॉपी लिए एक लड़की की तस्वीर मिली. उसका संबंध शुभम खैरनार से भी मिला. शुभम ने 2018 में नांदेड़ में एक एजुकेशन कंसल्टेंसी फर्म चलाने वाले नागेश नानाराव ढांढे से मुलाकात की. इस साल अप्रैल में शुभम ने नागेश से चार दिने के लिए एक ठिकाने दिलाने की गुजारिश की. उसने नागेश से ये भी कहा कि उसके पास NEET-UG पेपर के 'गैस पेपर' हैं.

सवाल प्रिंटआउट कराए

नागेश नानाराव ढांढे ने शुभम खैरनार को नासिक के पंचक गांव में एक ग्राउंड फ्लोर किराए पर दिला दिया. CBI ने देखा कि शुभम ने नागेश को बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 550 सवाल प्रिंटआउट निकलवाने के लिए भेजे. नागेश एक फोटोकॉपी शॉप से प्रिंटआउट के 8 सेट लेकर आ गया. अगले दिन नागेश को फिजिक्स के सवाल दिए गए, जिसके वो प्रिंट लेकर आ गया.

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धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने पड़ा था

मेडिकल स्टडी की प्रवेश परीक्षा 'नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) (NEET-UG 2026)' 3 मई को हुई थी. बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने के कारण, 'नेशनल टेस्टिंग एजेंसी' (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी, जिससे लाखों छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के भारी प्रोटेस्ट के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा.

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