दशहरा के वक्त विरोधियों को रावण दिखाना भारत की राजनीतिक परंपरा ही बन गई है. हर साल किसी न किसी पार्टी का एक पोस्टर सामने आता है, जिसमें विरोधी नेताओं को रावण के दस सिरों पर चेपकर प्रतीकात्मक विरोध की रस्म निभाई जाती है. लखनऊ में इस बार ‘सनातन रक्षा संगठन’ नाम के दल के कार्यकर्ताओं ने ऐसा ही एक पोस्टर लगाया है. इस पोस्टर का रावण सिर्फ राजनीतिक विरोध का प्रतीक नहीं है. बल्कि इसे ‘सनातन भारत का विरोधी’ बताया गया है. इसके दसों सिरों पर सिर्फ भारत के नेता नहीं हैं. कुछ विदेशी शक्लों को भी जगह दी गई है. इसमें जो शक्ल सबसे ज्यादा चर्चा में है वो स्पेसएक्स वाले एलन मस्क की है.
'पुष्पक विमान' कार बनाने वाले एलन मस्क को 'रावण' बना दिया, लखनऊ में लगे पोस्टर
दशहरे के मौके पर लखनऊ में सनातन रक्षा संगठन ने एक पोस्टर लगाया, जिसमें रावण के दस सिरों पर एलन मस्क, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और जॉर्ज सोरोस समेत कई हस्तियों के चेहरे लगाए गए.

एलन मस्क वही हैं, जिनकी कंपनी टेस्ला ने हाल ही में ‘पुष्पक विमान’ की तरह हवा में उड़ने वाली कार की पहली झलक बना ली. लखनऊ में वो रावण के दस सिरों में से एक बताए गए हैं. इसके पीछे वजह के बारे में तो साफ-साफ पता नहीं. सिर्फ यही याद आता है कि मस्क ने हाल ही में भारत के उद्योगपतियों खासतौर पर मुकेश अंबानी को लेकर एक्स पर कई आलोचनात्मक पोस्ट किए थे. उन्होंने भारतीय कारोबारियों पर उनके स्टारलिंक प्रोजेक्ट पर अड़ंगा डालने का आरोप लगाया था. अपनी कुछ पोस्ट में मस्क ने मुकेश अंबानी को ‘मिस्टर प्राइम मिनिस्टर’ कहकर ताना भी मारा था.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण के दस सिर बुराई के प्रतीक माने जाते हैं. ‘सनातन रक्षा संगठन’ ने इसी प्रतीक का इस्तेमाल करते हुए एलन मस्क समेत भारतीय राजनीति के विपक्षी दलों के नेताओं के चेहरे भी रावण के सिरों में फिट कर दिए हैं.
रावण के दस सिरों में एलन मस्क के अलावा अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे माफियाओं के साथ समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बांग्लादेश सरकार के पूर्व सलाहकार मुहम्मद यूनुस, भारतीय सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण, इल्हान उमर, जॉर्ज सोरोस और सपा नेता आजम खान के चेहरे लगाए गए हैं. इस पोस्टर से सियासी विवाद भी खड़ा हो गया है.
सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़ा पोस्टरसमाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रविवार, 18 अक्टूबर को ये पोस्टर फाड़ दिया है. इस पोस्टर के हटाने के बाद नीचे ‘विजयादशमी शोभायात्रा’ का पोस्टर लगा दिखा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे लेकर बीजेपी पर हमला बोला है. उन्होंने तंज किया,
भाजपाइयों का लक्ष्य ऊपरवाला झूठा पोस्टर लगाना नहीं था बल्कि नीचे वाले प्रभु राम के पोस्टर को छिपाना था क्योंकि अब जब भी कोई भगवान राम का चित्र देखता है तो उसे भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों द्वारा अयोध्या के रामलला के मंदिर में की गई चोरी की याद आती है. इससे भाजपाई गिरोह के ख़िलाफ़ जनाक्रोश और भी अधिक बढ़ जाता है.
अखिलेश ने आगे लिखा कि याद रहे इसी ‘भाजपाई गिरोह’ ने लखनऊ में रामचरितमानस पर भी लाठी चलवाई थी. भाजपा को डर है कि कहीं इस बार रावण के साथ-साथ ‘राम मंदिर चोरी’ से आहत कहीं कोई आस्थावान श्रद्धालु ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के त्रिदानवों का पुतला न फूंक दे.
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