मजाक करना भारत के लोगों की आदत है. इसी मजाक को थोड़ा अपग्रेड कर दें तो वो बन जाता है प्रैंक. मजाक में जहां आमतौर सिर्फ बोलकर मजे लिए जाते हैं. वहीं प्रैंक में वाकई में किसी की हालत खराब हो सकती है. हालांकि होता ये भी मजाक ही है, लेकिन इसमें थोड़ा डर और खौफ भी मिक्स होता है. ऐसा ही कुछ खौफ एक 12 साल की बच्ची ने फैला दिया. 17 अक्टूबर को अहमदाबाद-हैदराबाद फ्लाइट में 12 साल की एक बच्ची ने ऐसा प्रैंक किया कि एक पूरा एयरपोर्ट हाई अलर्ट पर चला गया.
फ्लाइट में बम की बात से मचा हड़कंप, बाद में 12 साल की बच्ची का ‘प्रैंक’ निकला
अहमदाबाद से हैदराबाद आ रही फ्लाइट में 12 साल की बच्ची ने अपनी क्लासमेट से कहा कि विमान में बम है. केबिन क्रू ने पायलट को अलर्ट किया. लैंडिंग के बाद विमान की तलाशी ली गई, लेकिन कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पूरी घटना तेलंगाना के हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (RGI Airport) की है. यहां 7वीं क्लास में पढ़ने वाली एक स्टूडेंट गुजरात से वापस लौट रही थी. बच्ची स्कूल ट्रिप के लिए हैदराबाद गई थी. फ्लाइट में उसके स्कूल के कई क्लासमेट और दोस्त भी थे. इसी दौरान बच्ची ने मजाक में अपनी एक क्लासमेट से कह दिया कि फ्लाइट में बम है. अब फ्लाइट और बम. ये दो शब्द अपने आप में सुनकर ही सिहरन पैदा कर देते हैं.
हुआ भी कुछ ऐसा ही. यह बात केबिन क्रू के एक सदस्य ने सुन ली. क्रू मेंबर ने बिना देरी किए तुरंत कैप्टन (मुख्य पायलट) को इसकी जानकारी दी. विमान को इस संभावित खतरे की जानकारी मिलते ही कैप्टन ने ग्राउंड अथॉरिटीज को अलर्ट भेजा. फ्लाइट के लैंड होने तक सभी अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया. सुबह के लगभग 7 बजकर 45 मिनट पर जब विमान हैदराबाद में उतरा तो उसकी पूरी तरह से तलाशी ली गई लेकिन प्लेन में कोई विस्फोटक या बम नहीं मिला.
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पुलिस ने क्या बताया?इस घटना पर जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्ची कुथबुल्लापुर के एक प्राइवेट स्कूल के 45 स्टूडेंट्स और तीन टीचर्स के साथ यात्रा कर रही थी. फ्लाइट के लैंड होने से लगभग 10 मिनट पहले केबिन क्रू ने बच्ची को यह कहते हुए सुन लिया कि फ्लाइट में बम है. प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विमान के उतरने के बाद उसे एक आइसोलेशन बे (Isolation Bay) में ले जाया गया. आइसोलेशन बे एयरपोर्स पर बना एक रिजर्व्ड और सेफ पार्किंग एरिया जैसा होता है.
यह मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग, रनवे और बाकी विमानों से काफी दूरी पर बनाया जाता है ताकि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में पूरे एयरपोर्ट को खतरे से बचाया जा सका. यहां पहुंचने के बाद यात्रियों को नीचे उतारा गया. इसके बाद CISF और पुलिस ने विमान और सामानों की गहन सुरक्षा जांच की. आखिरकार बम न मिलने पर सब ने राहत की सांस ली.
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