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'लॉ स्टूडेंट्स पर एक्शन की ताकत आपके पास नहीं', SC ने बार काउंसिल को उसकी सीमा बताई

Supreme Court ने कहा कि कानून के छात्रों के खिलाफ एक्शन सिर्फ उनका कॉलेज ले सकता है, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) नहीं. कोर्ट ने Nalsar University of Law के स्टूडेंट्स से जुड़े एक विवाद की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया. क्या-क्या कहा? विस्तार से जानिए.

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BCI प्रमुख मनन मिश्रा के एक आदेश पर नालसार यूनिवर्सिटी में विवाद हुआ था, इसी पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया (फाइल फोटो: फेसबुक, AI)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लॉ की पढ़ाई करने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार केवल उनके शैक्षणिक संस्थान के पास है, न कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास।
  • यह फैसला NALSAR यूनिवर्सिटी में छात्रों और प्रशासन के बीच CJI की उपस्थिति को लेकर हुए विवाद के कारण आया, जहां छात्रों ने CJI को दीक्षांत समारोह में बुलाने का विरोध किया था।
  • BCI द्वारा छात्रों के बार काउंसिल में नामांकन पर रोक लगाने के फैसले के बाद व्याप्त विरोध और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया के बावजूद, BCI ने जांच रिपोर्ट तक किसी भी कार्रवाई से विराम रखने का निर्णय लिया।
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संजय शर्मा

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कानून (लॉ) की पढ़ाई करने वाले छात्रों के खिलाफ एक्शन लेने का अधिकार ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) के पास नहीं है. कोर्ट के मुताबिक, अगर कोई छात्र कॉलेज में कोई गलती या अनुशासनहीनता करता है, तो उस पर कार्रवाई करने का पूरा हक केवल उसी शिक्षण संस्थान या यूनिवर्सिटी का है, जहां वो पढ़ाई कर रहा है.

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कोर्ट ने क्या कहा?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला गुरुवार, 3 सितंबर को ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ के स्टूडेंट्स से जुड़े एक विवाद की सुनवाई के दौरान दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने अपने आदेश में कहा, 

“BCI को एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत कानूनी तौर पर बनाया गया है. हमारी राय है कि यह एक्ट BCI या किसी स्टेट बार काउंसिल को लॉ के स्टूडेंट्स के खिलाफ कोई डिसिप्लिनरी एक्शन लेने की कोई ताकत नहीं देता है. ऐसा अधिकार तभी मिलता है जब कोई लॉ ग्रेजुएट उस एक्ट के तहत एडवोकेट के तौर पर रजिस्टर हो चुका हो."

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कोर्ट ने आगे कहा कि जहां तक ​​छात्रों की बात है, तो अनुशासनात्मक (डिसिप्लिनरी) कार्रवाई करने का अधिकार केवल उनके संस्थान के पास ही है.

क्या है पूरा मामला?

NALSAR यानी ‘नेशनल अकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च’ हैदराबाद की एक प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी है. मामला यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह से जुड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक, NALSAR के दीक्षांत समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर CJI जस्टिस सूर्यकांत को बुलाने की बात चल रही थी. लेकिन 2026 बैच के कई छात्र इसके खिलाफ थे.

450 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की थी कि CJI को कॉन्वोकेशन में बुलाने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए. स्टूडेंट्स ने CJI की कुछ हालिया न्यायिक सुनवाइयों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी. खास तौर पर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की तरफ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले का जिक्र किया गया था.

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BCI ने लिया था एक्शन

इसके बाद ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (BCI) ने इस मामले में कड़ा एक्शन लिया. BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की तरफ से जारी एक लेटर में कहा गया कि 2026 में NALSAR से लॉ डिग्री लेने वाले छात्रों को फिलहाल किसी स्टेट बार काउंसिल में वकील के तौर पर एनरोल नहीं किया जाए.

BCI की वेबसाइट के मुताबिक, मनन कुमार मिश्रा पहली बार 17 अप्रैल 2012 से 16 अप्रैल 2014 तक BCI के चेयरमैन रहे. इसके बाद 9 नवंबर 2014 से अब तक वे लगातार BCI के चेयरमैन पद पर बने हुए हैं.

फिर कुछ ही घंटो में यू-टर्न क्यों लिया?

सोशल मीडिया पर बार काउंसिल के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ. भारी दबाव के बीच BCI ने अपने फैसले में बदलाव किया है. नए लेटर में BCI की ओर से बताया गया कि ज्यादातर स्टूडेंट बेकसूर थे. यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को बुलाने का विरोध करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी. BCI की ओर से आगे बताया गया कि मामले की जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी छात्र के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा.

CJI ने क्यों लगाई फटकार?

BCI के एक्शन के खिलाफ भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि यह उनके और छात्रों के बीच का मामला है. CJI ने कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और BCI को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है.

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छात्रों ने माफी की मांग की थी 

NALSAR छात्रों के खिलाफ एक्शन भले ही वापस ले लिया गया, लेकिन जिस तरह से BCI ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया, उसे लेकर उनकी आलोचना होती रही. BCI चेयरमैन के पत्र की भाषा की भी आलोचना हुई, क्योंकि उन्होंने इस कथित कैंपेन को ‘घिनौनी राजनीति’ कहा था. NALSAR और ‘नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी’(NLSIU) के छात्रों और पूर्व छात्रों ने मनन मिश्रा से बिना शर्त माफी की मांग की थी. 

इसके बाद 15 अगस्त को उन्होंने एक पत्र जारी कर माफी मांगी. BCI अध्यक्ष ने खेद जताया कि अगर उनकी किसी बात से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें इसका अफसोस है. मनन मिश्रा ने कहा कि मतभेदों को बातचीत और आपसी सम्मान के जरिए सुलझाया जाना चाहिए.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: किसके कहने पर मनन मिश्रा ने NALSAR स्टूडेंट्स को डराने की कोशिश की?

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