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CJP Protest: देश भर से दिल्ली पहुंचे स्टूडेंट्स ने कहा- 'NEET ही नहीं हर मुद्दे पर सरकार जवाब दे'

Chalo Sansad March: 'चलो संसद' मार्च में देश भर से छात्र शामिल हुए. मुंबई के तीन छात्रों ने बताया कि उनका NEET पेपर लीक से कोई सीधा संबंध नहीं है, लेकिन फिर भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि वो सरकार की जवाबदेही तय करने दिल्ली आए हैं.

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मुंबई से कई छात्र 'चलो संसद' मार्च में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे हैं. (फाइल फोटो)

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  • 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले 'चलो संसद' मार्च में युवा NEET पेपर लीक, बेरोज़गारी, सोनम वांगचुक के अनशन जैसे मुद्दों को लेकर विरोध में शामिल हुए।
  • युवा प्रदर्शनकारियों ने विरोध में भाग लेने के लिए अपने परिवार की आपत्ति और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद दिल्ली तक लंबा सफर किए, जो उनके मुद्दों की गंभीरता को दर्शाता है।
  • दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और मेडिकल सपोर्ट की कमी की घटनाओं के कारण अब विरोध प्रदर्शनों के प्रति सार्वजनिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया बढ़ने की संभावना है।

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए ‘चलो संसद’ मार्च में ऐसे युवा भी शामिल हुए, जिनका NEET Exam से कोई सीधा संबंध नहीं था. ये युवा बेरोज़गारी, पेपर लीक, सोनम वांगचुक का अनशन और विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार जैसे मुद्दों के लिए आए थे. किसी ने घरवालों से लड़कर सफ़र किया, किसी ने बिना बताए ट्रेन पकड़ ली, तो किसी ने रिज़र्व्ड टिकट नहीं मिलने पर जनरल कोच में ही मुंबई से दिल्ली तक का सफ़र तय कर लिया.

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दी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, मुंबई के रहने वाले फाइनल ईयर के लॉ स्टूडेंट बुधिराज तोराने 19 जुलाई को ट्रेन की जनरल कोच में बैठकर दिल्ली आए. उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगा था कि आंदोलन सिर्फ़ NEET Paper Leak तक सीमित है. लेकिन फिर सोनम वांगचुक से जुड़ी खबरें देखकर उन्हें लगा कि मुद्दा सिर्फ़ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों का है. 

छात्र ने क्या कहा?

रिपोर्ट के मुताबिक बुधिराज ने कहा, 

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‘जो वांगचुक सर के साथ हुआ, वो परेशान करने वाला था. उनका NEET से कोई संबंध नहीं था. वो सिर्फ़ सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे थे. फिर मैंने उन्हें चाइनीज़ एजेंट कहे जाने वाले वीडियो देखे. उसी पल मैंने तय कर लिया कि मुझे दिल्ली जाना है.’

वो आगे कहते हैं,

‘जो कुछ हो रहा है, वो बिल्कुल ठीक नहीं है. सरकार से सवाल पूछना और विरोध करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है. मैं सिर्फ़ तमाशबीन बनकर नहीं रह सकता.’

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आंदोलन में शामिल हुए अन्य छात्र

ऐसी ही कहानी महाराष्ट्र के कल्याण शहर की रहने वाली सुमित्रा कांबले की भी है. जिन्हें मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बावजूद अभी तक नौकरी नहीं मिली. उन्होंने बताया कि दिल्ली जाने को लेकर उनके घर में लंबी बहस हुई. सुमित्रा बताती हैं,

‘मेरे माता-पिता मेरी निराशा समझते हैं, लेकिन उन्हें मेरी सुरक्षा की चिंता थी. मैं उन्हें लगातार यक़ीन दिलाती रही कि जहां हिंसा होगी, वहां नहीं जाऊंगी.’

सुमित्रा ने ये भी बताया कि वो पहले अकेले ही मुंबई के आज़ाद मैदान वाले प्रदर्शन में शामिल हुई थीं. दिल्ली पहुंचने के बाद सुमित्रा ने जो हालात देखे, वो उनके मुताबिक़ काफ़ी परेशान करने वाले थे. उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज हुआ है, लोग घायल हुए हैं, लेकिन उन्हें कोई मेडिकल सपोर्ट नहीं मिला. 

वहीं, कुर्ला के एक 24 साल के सोशल सेक्टर वर्कर ने बताया कि उन्होंने परिवार को बिना बताए ही दिल्ली जाने का फ़ैसला किया. अपनी पहचान सार्वजनिक न करते हुए वो बताते है कि उनके घरवालों को अगर इस बारे में पता चलता तो वो उन्हें सुरक्षा की चिंता में वहीं रोक लेते.

वीडियो: NEET Result में गड़बड़ी के आरोप पर NTA ने क्या जवाब दिया?

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