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संभल हिंसा के आरोपियों की सपा नेताओं से कराई मीटिंग, सस्पेंड हुए जेलर-डिप्टी जेलर, पता है क्यों?

सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन, विधायक नवाब जान खान और विधायक चौधरी समरपाल सिंह समेत कई सपा नेताओं ने जेल में जाकर संभल हिंसा के आरोपियों से मुलाकात की थी. लेकिन इसमें गलत क्या हो गया? जांच में क्या पता लगा?

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मुरादाबाद जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों से समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुलाकात की थी | फोटो: समाजवादी पार्टी

समाजवादी पार्टी (सपा) के कुछ नेता संभल हिंसा के आरोपियों (Sambhal violence accused) से मिलने मुरादाबाद की जेल में पहुंचे. सोमवार, 02 दिसंबर को इनकी मुलाकात हुई. ये खबर बाहर आई और अगले दिन जेल के दो अधिकारी सस्पेंड कर दिए गए (Moradabad jail officials suspended). मंगलवार की शाम को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने जिन दो अधिकारियों को सस्पेंड किया, उनके नाम जेलर विक्रम यादव और डिप्टी जेलर प्रवीण सिंह हैं. ये भी कहा जा रहा है कि इस मामले में मुरादाबाद जेल के वरिष्ठ अधीक्षक पीपी सिंह पर भी कार्रवाई हो सकती है.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को सपा के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन, ठाकुरद्वारा के सपा विधायक नवाब जान खान और अमरोहा में नौगावां सादात के सपा विधायक चौधरी समरपाल सिंह समेत कई सपा नेताओं ने जेल में जाकर संभल हिंसा के आरोपियों से मुलाकात की थी.

मुलाकात के बाद में नेताओं ने दावा किया था कि लगभग सभी आरोपियों के शरीर पर चोट के निशान हैं. जेल के बाहर बोलते हुए एसटी हसन ने कहा था,

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'संभल हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए कई लोग यहां कैद हैं. ऐसी घटनाओं के दौरान अक्सर आसपास मौजूद निर्दोष लोग फंस जाते हैं, ऐसे लोगों पर झूठा मामला दर्ज किया गया है, उन्हें कानूनी सहायता देने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हमने उनसे मुलाकात की.'

एसटी हसन ने आगे कहा,

'जेल में बंद संभल हिंसा के आरोपियों पर पुलिस ने बर्बरता की... अलग-अलग थानों में रखकर मारपीट करने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया. इनसे जेल में मिलकर मेरा दिल भर आया.'

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किस नियम का पालन ना होने की बात कही जा रही

संभल हिंसा के घायलों और आरोपियों से मिलने पर शासन ने रोक लगा रखी है. ऐसे में सोमवार को जब मुरादाबाद जेल में सपा के प्रतिनिधि मंडल ने हिंसा के आरोपियों से मुलाकात कर ली, तो शासन को इसकी जानकारी होते ही मुरादाबाद के डीएम अनुज सिंह से रिपोर्ट तलब की गई.

अनुज सिंह ने शासन के निर्देश पर एक दिन के अंदर ही अपनी रिपोर्ट भेज दी. डीएम की रिपोर्ट के बाद शासन ने दो अफसरों को सस्पेंड कर दिया और डीजी जेल को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दे दिए. शुरुआती जांच में ये भी पता चला है कि इस मुलाकात के लिए जेल मैनुअल का पालन नहीं किया गया था, उसके हिसाब से मुलाकात के लिए पर्ची जारी नहीं की गई थी. यानी विधायकों, पूर्व सांसद और सपा नेताओं को ऐसे ही जेल में एंट्री दे दी गई थी.

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जेल के वरिष्ठ अधीक्षक की क्या सफाई आई?

इस मामले में मुरादाबाद जेल के वरिष्ठ अधीक्षक पीपी सिंह ने कहा कि स्थानीय विधायक या सांसद जेल विजिट कर सकते हैं, उन्हें इसके लिए रोका नहीं जाता है, ऐसी परंपरा रही है. पीपी सिंह ने ये भी कहा कि उन्हें पहले से ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए गए थे कि संभल हिंसा के आरोपियों की मुलाकात किसी से नहीं कराई जानी है.

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