देश की राजधानी नई दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में भयंकर गर्मी पड़ रही है. चिलचिलाती धूप और हीटवेव का आलम ऐसा कि लोगों का घर से बाहर निकलना दुश्वार हो गया है. तापमान 40°C और 45°C के बीच बना हुआ है, जो आपके स्मार्टफोन का वेदर ऐप भी दिखाता है. लेकिन, क्या ये आंकड़े सच हैं? क्योंकि, एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि राजधानी दिल्ली के पूर्वी इलाके में तापमान 65°C तक पहुंच गया. आगे हम इसी दावे पर चर्चा करेंगे.
दिल्ली में टेंपरेचर 65 डिग्री कैसे पहुंच गया?
Delhi Temperature: 65°C तापमान में स्किन जल भी सकती है. दिल्ली की नंदनगरी जैसी बस्तियों में बच्चों की संख्या ज्यादा है. ऐसे में अगर कोई बच्चा बिना जूते-चप्पल के बाहर खेले, तो उसकी त्वचा जलने का खतरा पैदा हो सकता है.


इंडिया टुडे से जुड़े अनमोल नाथ बाली की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली के नंदनगरी इलाके में ग्रीनपीस इंडिया से मिले थर्मल कैमरा और हाथ में पकड़ने वाले थर्मामीटर से तापमान को मापा गया. इस टेस्ट के जो नतीजे आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे. सीधी धूप पड़ने की वजह से सड़कों और खड़ी गाड़ियों की सतह का तापमान 65°C यानी 65 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा हो गया था. टेस्ट में इस्तेमाल किया गया थर्मल कैमरा इंफ्रारेड रेडिएशन का पता लगाकर काम करता है.
यानी कैमरा न दिखने वाली गर्मी को भी पहचान लेता है, जो सभी चीजों से बाहर निकलती है. बाद में कैमरा इसे अलग-अलग रंगों वाली एक विजुअल इमेज में बदल देता है. अगर कोई सतह बहुत ज्यादा गर्म है, तो वो स्क्रीन पर लाल या सफेद रंग में चमकने लगती है. जबकि, ठंडी सतह होने पर यह नीले और हरे रंग में बदल जाती है. टेस्ट के दौरान सड़क की सतह आग की तरह तप रही थी. पेड़ की छांव में तापमान अलग था.

अगर आप इस इलाके से मात्र कुछ मीटर दूर किसी पेड़ के छांव में चले जाएं, तो तापमान करीब 40°C हो जाता है. यानी कुछ ही दूरी पर दोनों जगह के तापमान के बीच करीब 20°C का फर्क दिखने लगता है. हाथ से पकड़ने वाले थर्मामीटर से हवा का टेंपरेचर भी चेक किया गया. सीधे धूप में रखने पर 48°C तापमान आया. स्मार्टफोन के वेदर ऐप ने ठीक उसी जगह का तापमान 42°C दिखाया.
65°C में स्किन जलने का खतराडिवाइस से 65°C तापमान दर्ज किया गया है. इतने ज्यादा तापमान में स्किन जल भी सकती है. दिल्ली की नंदनगरी जैसी बस्तियों में बच्चों की संख्या ज्यादा है. ऐसे में अगर कोई बच्चा बिना जूते-चप्पल के बाहर खेले, तो उसकी त्वचा जलने का खतरा पैदा हो सकता है.

थर्मल कैमरा और थर्मामीटर से नापे गए तापमान और वेदर ऐप से मिले तापमान के बीच फर्क की वजह सीधी है. ऑफिशियल वेदर स्टेशन की रीडिंग आमतौर पर छांव में, जमीन से लगभग 1.2 मीटर की स्टैंडर्ड ऊंचाई पर, गर्मी को रिफ्लेक्ट करने वाली सतहों से दूर ली जाती है.
वेदर ऐप के आंकड़े नियंत्रित हालात में आस-पास की हवा के तापमान दिखाते हैं, लेकिन कंक्रीट, धातु और गाड़ियों के धुएं से भरी किसी भीड़-भाड़ वाली सड़क पर लोगों को जो गर्मी महसूस होती है, वह इससे बहुत ज्यादा होती है.
मोबाइल के वेदर ऐप पर दिखने वाला तापमान, पेड़ की छांव में दिखने वाले तापमान से बिल्कुल मिलता है. ऐसा होने के पीछे प्राकृतिक कारण हैं. दरअसल, पेड़-पौधे Evapotranspiration करते हैं. इससे हवा ठंडी होती है. इस प्रक्रिया में पेड़ों की जड़ों में सोखा गया पानी, पत्तियों के जरिए भाप बनाता है और फिर हवा में जाकर मिल जाता है. इससे पास की हवा थोड़ी ठंडी हो जाती है और गर्मी बाहर निकल जाती है.
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