राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वीर सावरकर को भारत रत्न देने में हो रही देरी पर बात की है. उन्होंने कहा कि अगर सावरकर को भारत रत्न मिल जाए तो इस सम्मान की इज्जत और बढ़ जाएगी. उनका कहना है कि भारत रत्न मिले या न मिले, सावरकर पहले से ही लाखों-करोड़ लोगों के दिलों में राज कर रहे हैं.
‘सावरकर को भारत रत्न देने से इज्जत…’ मोहन भागवत ने अब क्या कह दिया?
RSS chief on Bharat Ratna to Savarkar: मोहन भागवत ने जोर दिया कि सावरकर का योगदान इतना बड़ा है कि सम्मान मिलने से पहले ही वो लोगों के दिलों में राज कर रहे हैं.


मोहन भागवत ने ये बयान RSS के 100 साल पूरे होने पर आयोजित एक कार्यक्रम में दिया. वहां मौजूद लोगों ने सावरकर को भारत रत्न न मिलने की देरी पर सवाल पूछा. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार मोहन भागवत ने जवाब देते हुए कहा,
"मैं उस कमेटी (पैनल) में नहीं हूं, जहां ये फैसला होता है. लेकिन अगर मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिला जो उसमें है, तो उनसे जरूर पूछूंगा कि आखिर देरी क्यों हो रही है."
भागवत ने आगे कहा,
“अगर वीर सावरकर को भारत रत्न मिल जाए तो भारत रत्न का सम्मान और बढ़ जाएगा. लेकिन सम्मान मिले या न मिले, सावरकर आज भी लाखों-करोड़ों दिलों पर राज करते हैं.”
वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग लंबे समय से चल रही है. RSS और कई हिंदुत्व संगठन इसे लगातार उठाते रहे हैं. 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने भी इसे अपने घोषणा-पत्र में शामिल किया था. पहले अटल बिहारी वाजपेयी के समय में भी इसकी औपचारिक मांग उठी थी.
2015 में शिवसेना सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सावरकर को ये सम्मान देने की अपील की थी. उनका कहना था कि सावरकर के हिंदुत्व विचारों की वजह से पहले उन्हें नजरअंदाज किया गया.
मोहन भागवत ने जोर दिया कि सावरकर का योगदान इतना बड़ा है कि सम्मान मिलने से पहले ही वो लोगों के दिलों में राज कर रहे हैं. उनका बयान साफ दिखाता है कि RSS इस मुद्दे को महत्व देता है, लेकिन फैसला सरकार की कमेटी के हाथ में है.
सावरकर को भारत रत्न दिए जाने को लेकर विपक्षी दलों की ओर से कई बार विरोध भी किया गया है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सावरकर को क्या उपलब्धि मिली है? उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत दिया और भारत-पाकिस्तान विभाजन में भूमिका निभाई. ऐसे में उन्हें भारत रत्न क्यों दिया जाए?
कुल मिलाकर, ये मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है. एक तरफ RSS और समर्थक सावरकर को भारत रत्न देने की मांग करते हैं. दूसरी तरफ कुछ लोग उनके कुछ विचारों और इतिहास में उनकी भूमिका की वजह से इसका विरोध करते हैं. मोहन भागवत का ताजा बयान इस बहस को फिर से गरमा गया है.
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