झारखंड से 141 से ज्यादा मामलों में वांटेड नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा को अरेस्ट कर लिया गया है. झारखंड पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के ज्वाइंट ऑपरेशन में उसे गिरफ्तार किया गया. बेसरा लंबे समय से नक्सली संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) में एक्टिव था. पुलिस और रिजर्व फोर्सेज ने धनबाद-गिरीडीह के बॉर्डर इलाके से उसको दबोचा. उसके साथ दो और नक्सलियों की भी गिरफ्तारी हुई है. मेसरा पर 1 करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित था.
कौन है 1 करोड़ का इनामी, 141 से ज्यादा मामलों में वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा? झारखंड से हुआ अरेस्ट
झारखंड से इनामी नक्सली मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया है. सुरक्षा बलों ने उस पर एक करोड़ से ज्यादा का इनाम घोषित कर रखा था. बेसरा को नक्सली नेटवर्क में सागर दा और भास्कर दा के नाम से भी जाना जाता था.

141 से ज्यादा मामलों में था वांटेड
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने बताया कि गिरिडीह और धनबाद के बॉर्डर पर स्थित मनियाडीह इलाके से मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी हुई. सिक्योरिटी फोर्सेज को जानकारी मिली थी कि बेसरा अपने साथियों के साथ टाटा मैजिक गाड़ी से जा रहा है. बेसरा के साथ उसको दो सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार किया गया है. मोछू पर भी 15 लाख का इनाम घोषित किया गया था. पुलिस ऑफिसर के मुताबिक,
बेसरा उर्फ सागर दा उर्फ भास्कर दा ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों में 141 से ज्यादा मामलों में वांटेड था. उस पर 1 करोड़ से ज्यादा का इनाम था.
नक्सली कमांडर प्रशांत बोस से प्रभावित था
मिसिर बेसरा गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव का रहने वाला है. उसने पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज धनबाद से MA की पढ़ाई पूरी की. हालांकि, उसने कॉलेज से अपनी डिग्री नहीं ली. बेसरा स्कूली दिनों से ही नक्सली कमांडर प्रशांत बोस उर्फ किशन दा से प्रभावित था. उनसे प्रभावित होकर ही उसने Maoist Communist Centre (MCC) की बैठकों में हिस्सा लेना शुरू किया. साल 1985 में उसने धनबाद जिले के सिंदरी में ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर के सेकेंड कॉन्फ्रेंस में वालंटियर के तौर पर काम किया.
साल 1986 में मिसिर बेसरा ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन (MCC) की सदस्यता ले ली. किसान क्रांतिकारी कमेटी के नेता सोवन मरांडी ने उसको संगठन की प्राथमिक सदस्यता दिलाई. साल 1990 में किशन दा ने उसको कोलकाता में प्रेस के काम से जुड़ी जिम्मेदारी दी. साथ में उसको सब जोनल लेवल की पोस्ट भी दी गई.
साल 1992 में झारखंड लौटा
झारखंड पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, मिसिर बेसरा साल 1992 में कोलकाता से लौटा. यहां उसने राजेश नाम के एक संथाली युवक के साथ मिलकर रांची और आसपास के जिलों में MCC के नेटवर्क का विस्तार किया. बेसरा ने साल 1997 में प्रतिबंधित संगठन की दक्षिण छोटानागपुर समिति का गठन किया. साल 2000 में उसने झारखंड रीजनल कमेटी की स्थापना करने में किशन दा की मदद की.
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इसी साल रांची जिले के बुंडू इलाके में मिलन नाम के एक मेंबर की लीडरशिप में बेसरा ने गुट की पहली सशस्त्र टुकड़ी का गठन किया. साल 2003 में उसको सेंट्रल कमेटी का मेंबर बनाया गया. सितंबर 2004 में पीपुल्स वार ग्रुप और MCC का विलय करके एक नई पार्टी बनी CPI(Maoist). इसके बाद मिसिर को केंद्रीय मिलिट्री कमीशन (CMC) का मेंबर और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो मिलिट्री कमांड का चीफ बनाया गया. मिसिर बेसरा की एक बेटी थी, जिसकी मौत हो चुकी है. वहीं उसका एक बेटा है, जो झारखंड से बाहर कहीं काम करता है.
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