मणिपुर में एक बार फिर हिंसा भड़क गई. तामेंगलोंग जिले में रविवार, 13 सितंबर को हथियारबंद हमलावरों ने दो अलग-अलग घटनाओं में गांव वालों को निशाना बनाया. गोलीबारी में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक 6 साल का बच्चा घायल है. घटना तामेंगलोंग जिले की है. अधिकारियों ने दोनों घटनाओं की पुष्टि की है. हमले उस वक्त हुए, जब मणिपुर का कुकी समुदाय 1990 में हुई जातीय हिंसा की याद में 'ब्लैक डे' मना रहा था.
मणिपुर में कुकी 'ब्लैक डे' पर 4 लोगों की हत्या, 6 साल के मासूम को भी नहीं छोड़ा
Manipur Violence: हमले उस वक्त हुए, जब मणिपुर का कुकी समुदाय 1990 में हुई जातीय हिंसा की याद में 'ब्लैक डे' मना रहा था.

इंडिया टुडे से जुड़े अनुपम मिश्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि पहली घटना सुबह करीब 5:30 बजे मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के कैमाई थाना क्षेत्र के टोलन गांव में हुई. अधिकारियों ने कहा कि टोलन फायरिंग में 46 साल की ल्हिंगजंगई सिंशिट की मौके पर ही मौत हो गई. उनके पति सेइनेह सिंशिट और उनके 6 साल के बेटे को गोली लगने से गंभीर चोटें आईं.
सेइनेह सिंशिट को गंभीर हालत में असम के सिलचर मेडकिल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित के घायल बच्चे का अभी इलाज चल रहा है. अफसरों ने यह भी बताया कि अभी तक किसी भी ग्रुप ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. अटैक के पीछे शामिल दोषियों की पहचान की जा रही है.
दूसरी घटना तामेंगलोंग जिले के नुंगबा थाना क्षेत्र की है. दोपहर करीब 3 बजे लोंगपी गांव में हमला हुआ. मणिपुर के कुकी ग्रुप 'वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर' (WVV) ने दावा किया कि इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई. नुंगबा थाने की पुलिस ने घटना की पुष्टि की, लेकिन मृतकों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं दी. पुलिस ने कहा,
NSCN-IM और ZUF-K पर आरोप"लोंगपी गांव पुलिस स्टेशन से करीब 30 किलोमीटर पश्चिम में है. सड़क की हालत खराब होने की वजह से कोई भी पुलिसवाला मौके पर नहीं पहुंच पाया है. लेकिन सोमवार (14 सितंबर) सुबह मौके पर जाकर जांच की जाएगी."
WVV ने अपने इन्फॉर्मेशन और पब्लिसिटी हेड ओबेन सिंगसन के साइन वाला एक बयान जारी किया. इसमें दावा किया कि मरने वालों की पहचान लोंगपी गांव के जिली सिंगसन और रेओल गंगटे के तौर पर हुई है. ग्रुप ने आरोप लगाया कि NSCN-IM और ZUF-K (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा और जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट-कामसन) के कैडर के ग्रुप ने लोंगपी गांव पर हमला किया. WVV ने दावा किया,
शांति कायम रखने की अपील"पीड़ितों पर कथित तौर पर तब हमला किया गया जब वे गांव में घर की जरूरत का सामान लेने गए थे. हत्या करने के बाद, हमलावर कथित तौर पर बीच गांव की ओर बढ़े, लेकिन वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर्स ने गोलीबारी करके उन्हें रोका और पीछे खदेड़ दिया."
'वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर' (WVV) ने पुलिस से 24 घंटे के अंदर दोषियों पर मुकदमा करने की अपील की है. इस बीच, कैमाई विलेज अथॉरिटी ने तामेंगलोंग जिले के टोलन गांव में हुए हमले की कड़ी निंदा की. गांव की अथॉरिटी ने कहा,
"यह काम इस इलाके में लंबे समय से शांति से साथ रहने वाले अलग-अलग समुदायों के बीच मनमुटाव, शक और फूट पैदा करने की एक जानबूझकर की गई और गलत कोशिश लगती है."
गांव अथॉरिटी ने अपराधियों की पहचान करने और उन्हें सजा दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की. अथॉरिटी ने कुकी-नागा समुदाय से अफवाहें ना फैलाने की अपील की. गांव की अथॉरिटी ने कुकी-नागा लोगों से कहा कि वे तनाव बढ़ाने के लिए उकसावे की बातें ना करें.
समुदाय के लीडर्स, बुजुर्गों और सिविल सोसाइटी संगठनों से आगे आकर समुदायों के बीच शांति और आपसी समझ के रिश्तों को मजबूत करने के लिए कहा गया. गांव की अथॉरिटी ने कहा,
"हम कैमाई नागा गांव के लोग शांति, एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए मजबूती से खड़े हैं."
इसके अलावा, कुकी यूथ ऑर्गनाइजेशन विमेंस काउंसिल (कुकी महिलाओं की एक संस्था) ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की. उसने अपने बयान में कहा,
"यह घटना खास तौर पर दर्दनाक है क्योंकि यह उस दिन हुई है जब कुकी समुदाय ब्लैक डे मनाता है, जो 1990 के दशक की हिंसक घटनाओं के दौरान कुकी लोगों की मौत और उनके द्वारा झेली गई तकलीफों की याद में मनाया जाता है.”
KYO विमेंस काउंसिल ने इस हमले की तुरंत निष्पक्ष जांच की मांग की, ताकि दोषियों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया जा सके. इसके अलावा, इलाके में मजबूत इंटेलिजेंस और बचाव के सुरक्षा उपाय, महिलाओं, बच्चों और कमजोर लोगों की ठोस सुरक्षा, और हमलों के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की गई.
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1990 में जमीन और पहचान के मुद्दे पर नागा-कुकी लड़ाई में 1000 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. इसलिए, कुकी समुदाय 13 सितंबर को 'ब्लैक डे' के तौर पर मनाता है.
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