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'जिन्हें बरी किया, उन्होंने बम नहीं फोड़ा तो किसने... ' मालेगांव ब्लास्ट केस पर बोले पीड़ित परिवार

Malegaon Blast Case में कोर्ट ने पूर्व भाजपा सांसद Pragya Thakur के साथ-साथ, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी को बरी कर दिया है. अब उन लोगों के बयान आए हैं, जिन्होंने अपने घरवालों को खो दिया.

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मालेगांव केस के पीड़ित परिवारों ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

मालेगांव ब्लास्ट केस (Malegaon Blast Case) के सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया गया है. NIA की स्पेशल अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा है कि 17 सालों के इंतजार के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है, सबूतों को नजरअंदाज करके आरोपियों को छोड़ दिया गया है.

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इंडिया टुडे से जुड़े प्रविंद ठाकरे की रिपोर्ट के अनुसार, इस धमाके में सैयद अजहर सैयद निसार की भी मौत हुई थी. उनके पिता ने इंडिया टुडे ग्रुप से कहा,

हमले के 17 साल बाद भी हमारे साथ न्याय नहीं हुआ है. सारे सबूतों को दरकिनार करते हुए फैसला सुनाया गया. हम इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे.

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वड़ा पाव लेने गई थी 10 साल की बच्ची

इस ब्लास्ट में लियाकत शेख नाम के व्यक्ति ने अपनी 10 साल की बेटी फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख लियाकत को खो दिया था. बच्ची भिक्खु चौक पर वड़ा पाव लाने गई थी. पिता को जब धमाके के बारे में पता चला, तो उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी बेटी घर लौट आएगी. लेकिन कुछ समय बाद उनको बताया गया की उनकी बेटी नहीं रही. 

लियाकत शेख के पास अपनी बेटी की बस एक तस्वीर बची है. कोर्ट के फैसले पर उन्होंने कहा,

एकदम गलत फैसला आया है. हेमंत करकरे साहब (मुंबई के आतंक विरोधी दस्ते के पूर्व प्रमुख) ने कई लोगों को पकड़ा था, वो लोग कहां गए. क्या उन्होंने कुछ नहीं किया? जिन्हें बरी किया गया, यदि उन्होंने बम नहीं फोड़ा तो किसने ब्लास्ट किया. हम आगे कोर्ट में जाएंगे. सबूत मिलने पर ही हेमंत करकरे ने उन्हें पकड़ा था लेकिन अब क्या हुआ. मेरी बेटी वड़ा पाव लेने गई थी उसकी ब्लास्ट में मौत हो गई. उसकी मौत का जिम्मेदार कौन है? हमें इंसाफ चाहिए. मेरी बच्ची को न्याय मिले .

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मामले में पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर के साथ-साथ, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी को भी बरी कर दिया गया है. 31 जुलाई को कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी कर दिया है. उनका कहना है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर अपराध साबित करने में कामयाब नहीं रहा. 

ये भी पढ़ें: 'मेरे 17 साल बर्बाद हो गए... ', मालेगांव केस में जज का फैसला सुन रो पड़ीं प्रज्ञा ठाकुर

क्या हुआ था मालेगांव में?

29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में भिक्खु चौक के पास एक जोरदार धमाका हुआ था. इसके महज कुछ मिनट बाद ही गुजरात के मोडासा में भी धमाका हुआ. मालेगांव धमाके में 7 लोगों की मौत हुई थी जबकि मोडासा में एक 15 साल के लड़के की जान चली गई थी. कुल 80 लोग घायल हुए थे. 24 अक्टूबर 2008 को पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर शामिल थीं. 2019 से 2024 तक प्रज्ञा ठाकुर भाजपा के टिकट पर भोपाल से सांसद भी रहीं.

वीडियो: मालेगांव बम ब्लास्ट में कोर्ट का फैसला, साध्वी प्रज्ञा समेत 7 आरोपी बरी

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