उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के एक गांव में 14 अप्रैल को एक नाबालिग दलित लड़की ने अपनी जान ले ली. होली के दिन यानी 4 मार्च को लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था. उसे दो घंटे तक कमरे में बंद करके रखा गया था. लड़की के परिवार ने बताया कि जब वो FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने शिकायत नहीं लिखी. जबकि पुलिस ने इसके उलट कहानी सुनाई. मौत के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.
'रेप मत बोलो, कहो लड़कों ने सिर्फ रंग लगाया', पुलिस के ये बोलने के 40 दिन बाद दलित लड़की ने जान दी
Chitrakoot Rape Case: होली वाले दिन लड़की के साथ गैंगरेप हुआ था, जिसके बाद परिवार शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा. लेकिन पुलिस ने शिकायत नहीं लिखी. घरवालों ने बताया कि आरोपियों को आज़ाद घूमता देख लड़की परेशान थी और अंत में उसने अपनी जान ले ली. परिवार ने अब एक-एक बात बताई है.


आजतक से जुड़े अखिलेश सोनकर की रिपोर्ट के मुताबिक़, पीड़िता की उम्र 17 साल है. होली वाले दिन वो पानी भरने के लिए घर से निकली थी. तभी उसी गांव के 3 लड़कों ने उसे पकड़ लिया. आरोपियों के नाम भूषण प्रजापति, शीतल प्रजापति और बोधि शुक्ला हैं. तीनों आरोपी पीड़िता को अरहर के खेत में ले गए. वहां उसे बंधक बना लिया. आरोप है कि तीनों ने लड़की के मुंह में कपड़ा ठूंसा और 2 घंटे तक गैंगरेप किया. जब बहुत देर तक पीड़िता घर नहीं पहुंची तो छोटा भाई उसे ढूंढने निकला. काफी देर बाद पीड़िता संदिग्ध हालत में मिली. उसे घर लाया गया तो पता चला कि उसके साथ रेप हुआ है.
घरवालों ने अब सब बतायाघरवालों के मुताबिक, वो उसी दिन शिकायत लिखवाने पुलिस के पास गए थे. लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की. घरवालों के मुताबिक़, पुलिस ने कहा ‘रेप मत बोलो, कह दो कि जबरदस्ती रंग लगा दिया था.’ घरवालों ने ये भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने पहले तो आरोपियों को पकड़ा, लेकिन बाद में पैसे लेकर छोड़ दिया था. बताया कि आरोपी बार-बार उनकी बेटी के सामने आते थे. जिससे वो परेशान थी और कुछ दिन बाद उसने अपनी जान दे दी.
लड़की के पिता ने कहा,
‘जब रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचे तो पुलिस ने कहा कि हल्का कुछ बोल दो. पुलिस ने कहा कि आरोपी जेल में बंद हैं, जबकि उन्हें छोड़ दिया गया था.’
पीड़िता की बहन ने बताया,
‘जब मेरी बहन बाहर जाती तो देखती कि आरोपी बाहर आज़ाद घूम रहे हैं. उन्हें देखकर उसे टेंशन होती थी. न तो ठीक से खाना खा रही थी, न सो पा रही थी. 14 तारीख को उसने मेरे साथ ही आखिरी बार खाना खाया था, जिसके बाद उसने जान दे दी.’
पुलिस की कहानी पीड़िता के घरवालों की बात से बिलकुल अलग है. पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने कहा,
‘6 मार्च को पीड़िता की मां ने मौखिक शिकायत दी थी. जब थाना प्रभारी ने उन्हें दोबारा बुलाया तब उन्होंने दो पन्ने की शिकायत दर्ज की. बताया कि लड़की को तीन लड़कों ने जबरदस्ती रंग लगा दिया था. उनके घरवालों ने पुलिस से गुज़ारिश की कि आरोपियों को डांट कर छोड़ दिया जाए.’
पुलिस ने बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने रेप की शिकायत नहीं लिखी, और पुलिस का आरोप है कि परिवार ने नहीं लिखवाई. इस लड़ाई में करीब 40 दिनों तक एक नाबालिग रेप पीड़िता पिसती रही और अंत में उसने अपनी जान ले ली.
वीडियो: असम में लड़की से गैंगरेप के मामले में लोगों ने पुलिस से क्या मांग की?


















