जर्जर बिल्डिंग, गर्द और धूल भरे कमरे और गेट पर पड़ा बड़ा सा ताला. ये तस्वीर महाराष्ट्र के उन 'घोस्ट हॉस्टल्स' की है, जिनके नाम पर करोड़ों का वारा न्यारा किया जा रहा था. यहां कोई भी स्टूडेंट नहीं रहता. लेकिन कागजों में उनकी उपस्थिति दिखा कर सरकारी पैसे की लूट की जा रही थी. हाल ही में आई कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट ने इस खेल का भंडाफोड़ किया है.
CAG ने सरकारी 'भूतहा हॉस्टलों' की पोल खोली, फंड करोड़ों में, लेकिन रहता कोई नहीं
महाराष्ट्र में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल्स की फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है. कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में उन हॉस्टल्स का भंडाफोड़ हुआ है, जो कागजों पर चलाए जा रहे थे और उनके नाम पर सरकार से लाखों रुपये की मदद ली जा रही थी.


कागज पर चल रहे हॉस्टल्स को मिले 1.62 करोड़
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, CAG ने 10 जुलाई को राज्य विधानसभा में 'अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट 2024' पेश किया. इस रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में छह ऐसे हॉस्टल्स हैं, जिनको बीते चार साल में सरकारी फंड से 1 करोड़ 62 लाख रुपये मिले है. लेकिन वहां न कोई छात्र रहता है, ना ही किसी तरह की बुनियादी सुविधाएं. ये हॉस्टल्स सिर्फ कागजों पर चल रहे थे. इनको 'घोस्ट हॉस्टल' नाम दिया गया है.
CAG की रिपोर्ट में पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए सरकारी और सरकारी सहायता पाने वाले हॉस्टल्स की कमियों का जिक्र है. घोस्ट हॉस्टल्स से इतर जिनमें छात्र रह रहे हैं, उनमें बेसिक सुविधाओं की भारी कमी है. मसलन सुरक्षा और स्वच्छता पर कोई जोर नहीं है. स्टाफ की कमी है. साथ ही सरकारी फंड का ढंग से इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है. मार्च 2024 तक महाराष्ट्र में 443 सरकारी और 2,388 सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल्स थे. इनमें 1 लाख 21 हजार 971 लड़के और 40 हजार 543 लड़कियां रहती थीं. CAG रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस हॉस्टल्स को 2,321 करोड़ रुपये की मदद दी.
ये भी पढ़ें - पेंशन फंड से केंद्र सरकार ने करोड़ों की ‘हेराफेरी’ कर दी, CAG की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है
CAG के निरीक्षण में पकड़े गए ‘घोस्ट हॉस्टल्स’
CAG के अधिकारियों ने 18 सरकारी और 21 सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्टल्स में खुद जाकर ऑडिट किया. रिपोर्ट में जालना स्थित मोदीखान हॉस्टल का जिक्र है. इस हॉस्टल की बिल्डिंग बेहद जर्जर थी और गेट पर ताला लगा हुआ था. वहां कोई भी स्टूडेंट नहीं रह रहा था. लेकिन कागजों में इस हॉस्टल में 38 स्टूडेंट और एक सुपरिटेंडेंट रह रहे थे. राज्य सरकार की ओर से चार सालों में इस हॉस्टल को 18 लाख की मदद मिली. ऑडिट टीम को जालना जिले के जाफराबाद में 24 स्टूडेंट्स के लिए बना एक हॉस्टल भी धूल फांकता मिला. रिपोर्ट के मुताबिक, टीम को जालना में चार, बुलढाणा में एक और लातूर में एक जगह इसी तरह के 'घोस्ट हॉस्टल 'मिले.
वीडियो: क्या महाराष्ट्र में UCC लागू होने वाला है?










