भारत में ज्यादातर घरों की सुबह चाय की चुस्की से होती है. चाय के साथ बिस्कुट भी खाई जाती है. नमकीन भी कभी-कभी चल जाता है. चाय बनती है चायपत्ती, पानी, शक्कर और दूध से. दूध किससे बनता है? दूध बनता है डिटर्जेंट पाउडर और पाम ऑयल से. मज़ाक नहीं कर रहे ये सच है. महाराष्ट्र के धाराशिव जिले से दूध में मिलावट का मामला सामने आया है. बताया गया कि पिछले छह महीने में 2 लाख 30 हज़ार और 470 किलोग्राम खराब दूध पाउडर का इस्तेमाल किया गया.
महाराष्ट्र: दूध में डिटर्जेंट पाउडर मिलाकर बेच रहे थे, IAS ने ऐसे पकड़ा मिलावट का खेल
FDA action in Maharashtra: पता चला है कि हर 100 लीटर शुद्ध दूध में 10 लीटर बनावटी दूध मिलाया जाता है. और यही दूध पिछले छह महीनों से महाराष्ट्र में सप्लाई किया जा रहा था. अब FDA ने कई ठिकानों पर रेड मारी और सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे महाराष्ट्र में इस दूध की सप्लाई की जाती थी. करीब 2 लाख खराब मिल्क पाउडर से कुल 23 लाख लीटर तक बनावटी दूध तैयार किया गया. इस बनावटी दूध को असली दूध में मिलाकर बेचा जाता. रिपोर्ट के मुताबिक, हर 100 लीटर शुद्ध दूध में करीब 10 लीटर बनावटी दूध मिलाया जाता था. अधिकारियों को आशंका है कि भूम दूध कलेक्शन सेंटर से पूरे राज्य में करीब 2 करोड़ लीटर मिलावटी दूध बेचा गया है.
ये पूरी जांच FDA (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) की टीम कर रही थी. टीम का नेतृत्व IAS अफसर तुकाराम मुंढे कर रहे थे. उन्होंने 25 मई को FDA आयुक्त के तौर पर पद संभाला था. कार्यभार संभालने के साथ ही उन्होंने एक्शन शुरू कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, टीम के हरकत में आने के बाद से कई जगहों पर दूध नाले में बहाए जाने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तैरने लगे.
रिपोर्ट के मुताबिक, दूध को असली जैसा दिखाने और फैट लेवल को मैच कराने के लिए कुछ अप्राकृतिक तत्त्व मिलाए गए. इसके लिए डिटर्जेंट पाउडर (निरमा), पाम ऑयल और केमिकल पाउडर का इस्तेमाल किया जाता था. जांचकर्ताओं ने कुल 61 मिलावटी दूध के बैग जब्त किए हैं.

इस मामले में सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, मामला दर्ज होने के आठ दिन बाद भी सभी आरोपी फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए SIT का गठन किया गया है जो लगातार छापेमारी कर रही है.
कितना घातक है ये मिलावटी दूध?मेडिकल एक्सपर्ट ने चेताया है कि इस बनावटी दूध के लगातार सेवन से बहुत सी बीमारियां हो सकती हैं. लिवर, किडनी और डाइजेस्टिव सिस्टम पर असर पड़ सकता है. डिटर्जेंट वाला दूध बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जान तक ले सकता है.
फूड सेफ्टी एक्ट के तहत आरोपियों को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है और आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है.
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FDA आयुक्त ने क्या कहा?IAS तुकाराम मुंढे ने कहा,
‘दूध सिर्फ एक प्रोडक्ट नहीं है. बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीज़ों के लिए एक पोषण का स्त्रोत है. महाराष्ट्र में ऐसा नहीं चलेगा. ये अभियान हर उस प्रोडक्ट के खिलाफ है जो FSSAI के नियमों का पालन नहीं करते हैं.’
इसके अलावा तुकाराम मुंढे राज्य भर में एंटी गुटखा कैम्पेन भी चला रहे हैं. इसके तहत उन्होंने अब तक कुल 94 ठिकानों पर छापेमारी की है. इस एक्शन ने पुराने FDA आयुक्तों के काम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. लेकिन तुकाराम ने कहा कि वो केवल अपने काम की गारंटी ले सकते हैं.
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