डॉनल्ड ट्रंप को होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करने पर 'हफ्ता' चाहिए, जिसे वो मुआवजा कह रहे हैं. इसके लिए वह होर्मुज से गुजरने वाले सभी मालवाहक जहाजों पर 20 फीसदी की फीस लगाएंगे. इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी ऐलान किया है कि अमेरिकी नेवी फिर से ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी लागू करेगी. यानी, भारत समेत दुनिया के कई देशों में तेल और गैस के ‘संकट के समुद्र’ में ‘राहत का किनारा’ अभी दिखाई नहीं दे रहा है.
होर्मुज में ट्रंप मचाएंगे 'लूट', हर जहाज से होगी वसूली, भारत पर क्या असर होगा?
डॉनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20% शुल्क लगाने और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी फिर से शुरू करने का ऐलान किया है. अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका असर पड़ सकता है.


सब जानते हैं कि दुनिया भर में एनर्जी की सप्लाई के लिए होर्मुज का रास्ता कितना अहम है. मार्च 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बाद से यह रास्ता बार-बार बंद हो रहा है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार, 13 जुलाई को कहा कि वाशिंगटन अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले माल पर 20 फीसदी का शुल्क लगाएगा. साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू करेगा. ट्रंप ने कहा कि 20 फीसदी की ये फीस होर्मुज को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका की ओर से की गई कोशिशों का मुआवजा है.
ट्रंप का ये ऐलान ऐसे समय में आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में कई कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए हैं. इसमें कई भारतीय नाविकों की भी मौत हुई है. वहीं, सीजफायर के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमले भी रुक-रुककर हो ही रहे हैं. इन सबकी वजह से एक बार फिर ये आशंका बढ़ गई है कि स्ट्रेट से कमर्शियल जहाजों का गुजरना और ज्यादा मुश्किल और महंगा होने वाला है. जाहिर है कि भारत में इसका असर पेट्रोल और गैस के दामों पर पड़ेगा. साथ ही सेवा और वस्तुओं की महंगाई भी बढ़ेगी.
इसकी वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. इनका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर शामिल हैं. इन देशों से आने वाला कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने से पहले होर्मुज से होकर गुजरता है. ये रास्ता लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलपीजी के आयात के लिए भी बेहद जरूरी है. इस रास्ते में किसी भी तरह के व्यवधान का सीधा असर भारत के तमाम उद्योगों, फर्टिलाइजर प्लांट्स और जनता के रसोईघरों तक पर पड़ेगा.
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होर्मुज में होने वाली किसी भी घटना का असर सिर्फ खाड़ी देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इस रास्ते में रुकावट, ट्रांसपोर्टेशन की लागत में बढ़ोतरी या तेल की कीमतों में उछाल का असर आखिरकार भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
अब सवाल ये है कि क्या ट्रंप सच में होर्मुज से गुजरने वाले माल पर फीस लगाने का अधिकार रखते हैं?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट एक इंटरनेशन जलमार्ग है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून लागू होता है. ऐसे में सवाल है कि क्या कोई भी देश इस मार्ग का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर एकतरफा शुल्क लगा सकता है? इंडिया टुडे की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के एक प्रवक्ता के बयान से इसका जवाब मिलता है. वह कहते हैं कि किसी अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर जबरन टोल लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है.
ईरान भी ट्रंप के इस प्रस्ताव के विरोध में है. इस प्रस्ताव की राह में अभी कई कानूनी और डिप्लोमेटिक अड़चनें हैं. भले ही उनकी यह घोषणा कभी लागू न हो पाए लेकिन इन आशंकाओं और होर्मुज में पसरे तमाम खतरों और अस्थिरता के बीच बाजार में उथल-पुथल तो मची ही रहेगी.
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