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पनारी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को हरी झंडी, वन विभाग ने जताई थी आपत्ति, MP के बाघों का क्या होगा?

Madhya Pradesh में ‘Panari Hydropower Project’ को आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई है. यह प्रोजेक्ट Panna-Ranipur Tiger Corridor में बनने जा रहा है. इस इलाके में बाघ और दूसरे जानवर रहते हैं. वन विभाग का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से जानवरों की आवाजाही में दिक्कत हो सकती है.

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यह प्रोजेक्ट पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर में बनने जा रहा है. (फोटो: इंडिया टुडे)

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  • नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी ने मध्य प्रदेश के पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर में 1,800 मेगावॉट क्षमता के पनारी पंप-स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को शर्तों के साथ आगे बढ़ाने की सिफारिश की।
  • वन विभाग के एक अधिकारी ने इस प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताई क्योंकि यह टाइगर कॉरिडोर क्षेत्र में है जहाँ बाघ और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
  • मंजूरी के साथ तीन 30 मीटर चौड़े वाइल्डलाइफ ओवरपास बनाए जाएंगे और मलबा फेंकने की जगह बदलने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जानवरों के आवागमन में व्यवधान कम किया जा सके।

मध्य प्रदेश के पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर में एक बड़ा बिजली प्रोजेक्ट बनने जा रहा है. नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी (SC-NBWL) ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है. यह सिफारिश तब की गई जब खुद वन विभाग के एक अधिकारी ने इस पर आपत्ति जताई थी. यह वही इलाका है जहां बाघ और दूसरे जानवर घूमते हैं. अधिकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के बनने के बाद जानवरों की आवाजाही में दिक्कत पैदा हो सकती है.

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क्या है प्रोजेक्ट?

मध्य प्रदेश में प्रस्तावित इस प्रोजेक्ट का नाम ‘पनारी पंप-स्टोरेज हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट’ है. इसकी क्षमता 1,800 मेगावॉट है. इसके लिए 411.48 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत है, जो पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर और पन्ना टाइगर रिजर्व के सैटेलाइट कोर एरिया में आती है. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने इस साल जनवरी में साइट का दौरा करने का आदेश दिया था. इसके बाद चार सदस्यों की टीम ने उस जगह का दौरा किया और कुछ शर्तों के साथ मंजूरी देने की सिफारिश की. इस टीम में पर्यावरण मंत्रालय और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के अधिकारी, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के एक वैज्ञानिक और मध्य प्रदेश के एक डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) शामिल थे.

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विवाद क्यों है?

DFO ने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रोजेक्ट ऐसे इलाके में है जहां बाघ, तेंदुए और भालू लगातार और बिना किसी रुकावट के आते-जाते रहते हैं. DFO ने यह भी बताया कि इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट से कॉरिडोर के ब्लॉक होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट के लागू होने से इस कॉरिडोर में जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है. उनके लिए आने-जाने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

किन शर्तों पर मंजूरी देने की सिफारिश?

रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्टैंडिंग कमेटी (SC-NBWL) ने 9 जुलाई को एक मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की सिफारिश की है. यह भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय का एक हिस्सा है. मंजूरी की सिफारिश के साथ कुछ शर्तें भी रखी गईं.

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- बघाइन नदी के ऊपर 30 मीटर चौड़े तीन वाइल्डलाइफ ओवरपास बनाने होंगे, जिनका इस्तेमाल अक्सर जंगली जानवर करते हैं.

- प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान जो भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा निकलेगा, उसे फेंकने की जगह को बदलने के लिए कहा गया है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मलबे को ले जाने के लिए जंगल के बीचों-बीच कोई नई सड़क न बनानी पड़े और बाघों के शांत माहौल में कोई खलल न पड़े.

- जहां भी मुमकिन हो, टाइगर कॉरिडोर से मलबा फेंकने की जगहों को दूसरी जगह ले जाया जाएगा.

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प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने WII के डायरेक्टर, मध्य प्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन (CWLW) और NTCA के मेंबर सेक्रेटरी की राय मांगी. NTCA के मेंबर सेक्रेटरी ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव की सिफारिश की जा सकती है. WII के डायरेक्टर और CWLW ने भी कहा कि इस प्रस्ताव की सिफारिश की जा सकती है, लेकिन नुकसान कम करने के लिए उपाय पक्के किए जाने चाहिए. 

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