दिल्ली के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का विवाद लगातार गहराता जा रहा है. इस मामले ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लगातार नए दावे और खुलासे RAF के आधिकारिक दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इसी बीच कथित पैलेट गन पीड़ित प्रशांत कुमार सिंह ने एक और बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि उन्होंने पैलेट गन से घायल हुए छठे व्यक्ति को भी देखा था. प्रशांत के शरीर में अभी भी छर्रे फंसे हैं. जब वे खुद को छूते हैं, तो शरीर में छर्रे साफ महसूस होते हैं.
'शरीर में अभी छर्रे फंसे हैं', पांचवे पीड़ित ने पैलेट गन के छठे शिकार के बारे में बताया
Delhi Pellet Gun Victims: कथित पैलेट गन पीड़ित प्रशांत ने दावा किया कि फोर्स ने गोली चलाने से पहले कोई चेतावनी नहीं दी थी. उन्होंने बताया कि उन्हें और उनके पास खड़े एक और शख्स को गोली लगी. गोली लगने से प्रशांत वहीं गिर गए. उनके दाहिने हाथ और सीने में छर्रे घुस गए.

अब तक पांच लोगों के बारे में पता चला है, जो नई दिल्ली प्रोटेस्ट के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन से घायल हुए थे. इंडिया टुडे से जुड़े आनंद सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत कुमार सिंह ने बातचीत में पैलेट गन से कम से कम एक अन्य व्यक्ति के भी घायल होने का दावा किया. उनके दावे को मानें तो छर्रों से घायल ये छठा व्यक्ति है.
प्रशांत एक पेंटर हैं. उन्होंने पहले दिन से ही जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट को पेस्टल, वाटर कलर, ऑयल और विजुल आर्ट के जरिए कैनवास पर उतारना शुरू कर दिया था. वे 'चलो संसद' के तहत 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों में शामिल थे.
प्रशांत ने बताया कि प्रोटेस्टर्स शांत थे, लेकिन पुलिस और RAF ने उन पर फोर्स का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. आंसू गैस के गोले दागे. प्रशांत इन्हें बम के गोले बताते हैं, क्योंकि उन्हें वे बम जैसे लगे थे. फिर लाठीचार्ज हुआ. उन्होंने कहा,
"वे सच में बहुत बेरहम थे... कुछ ही मिनटों में, फोर्स ने भीड़ पर शॉटगन से गोलियां चला दीं."
प्रशांत ने दावा किया कि फोर्स ने गोली चलाने से पहले कोई चेतावनी नहीं दी थी. उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके पास एक और शख्स को गोली लगी. गोली लगने से प्रशांत वहीं गिर गए. उनके दाहिने हाथ और सीने में छर्रे घुस गए. आंसू गैस और शॉटगन से घबराकर और लोग भी नीचे झुक गए.
प्रशांत कुमार सिंह पैलेट गन से कथित तौर पर घायल छठे व्यक्ति का नाम नहीं जानते. उन्होंने बताया कि 20 जुलाई को शाम करीब 4:30 बजे वे दोनों साथ में लेडी हार्डिंग अस्पताल गए थे. मीडिया में अब तक पांच पैलेट गन पीड़ितों के नाम सामने आए हैं.
इन पांच पीड़ितों में साहिल लोचाब, शेख इरशाद मंसूरी, आउटलुक मैगजीन के पत्रकार, नूतन टोप्पो और प्रशांत कुमार सिंह शामिल हैं. प्रशांत ने जिस व्यक्ति का जिक्र किया, उसका नाम अब तक मीडिया में सामने नहीं आया है.
RAF ने क्या बताया?RAF अब तक प्लास्टिक और रबर की गोली चलाने के अपने रुख पर ही कायम है. लेकिन प्रशांत की X-ray रिपोर्ट और हॉस्पिटल का पर्चा इस रुख पर सवाल खड़े करते हैं. लेडी हार्डिंग अस्पताल ने प्रशांत के केवल बाहरी जख्मों का इलाज किया और कथित छर्रे निकाले.
छर्रे मेडिकल वेस्ट के तौर पर डिस्पोज कर दिए गए, जिन्हें प्रशांत ने खुद नहीं देखा. लोकनायक अस्पताल जाना और होली फैमिली अस्पताल का X-ray साबित करते हैं कि उनके शरीर में छर्रे फंसे हैं.
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दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल करने से इनकार किया, लेकिन उसका यह दावा चला नहीं. द हिंदू की खबर के मुताबिक, 22 जुलाई को तड़के संसद मार्ग थाने में दर्ज RAF की जनरल डायरी (GD) में पैलेट गन के इस्तेमाल का जिक्र था. घटना के बाद RAF ने जंतर-मंतर पर तैनात जवानों से पंप-एक्शन गन (PAGs), इलेक्ट्रिक शील्ड, एंटी-रॉयट गन और शॉक बैटन वापस ले लिए.
वीडियो: CJP प्रदर्शन में पैलेट गन चलाने वाले RAF जवान पर CRPF का बड़ा एक्शन













