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Success Story: पिता बीनते हैं कबाड़, बेटे ने पास की NEET परीक्षा, अब बनेगा डॉक्टर

राजस्थान के कोटा में एक कबाड़ बीनने वाले के बेटे ने NEET क्वालीफाई किया है. सागर रेगर के 564 नंबर आए हैं और अब डॉक्टर बनेंगे. घरवालों ने बताया कि सागर की चचेरी बहन की मौत कैंसर से हो गई थी. इस घटना ने उस पर काफी असर डाला और उसने डॉक्टर बनने की ठानी.

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राजस्थान के कोटा में एक कबाड़ बीनने वाले का बेटा बनेगा डॉक्टर. (फाइल फोटो-इंडिया टुडे)

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  • सागर रेगर ने NEET 2026 में ऑल इंडिया रैंक 27157 और कैटेगरी रैंक 684 हासिल कर डॉक्टर बनने का पहला कदम पूरा किया है।
  • सागर का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, पिता कूड़ा बीनते हैं और बहन की बीमारी ने उन्हें डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी।
  • सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल की मदद से सागर को ALLEN कोचिंग मिली, जिससे उनका मेडिकल के लिए तैयारी का खर्च संभव हुआ।
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चेतन गुर्जर

"कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता
एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो"

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राजस्थान के सागर रेगर ने दुष्यंत कुमार के इस शेर को अपनी ज़िंदगी में सच करके दिखाया है. उन्होंने एक सपना देखा और उसे पूरा भी किया. सागर के पिता घर-घर जाकर कबाड़ बटोरते हैं. बताने की ज़रूरत नहीं कि उनका परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमज़ोर है. फिर भी सागर रेगर ने वो कर दिखाया जो तमाम सुविधाओं के बावजूद कई लोग नहीं कर पाते. NEET 2026 क्वालीफाई किया. 564 नंबर आए और ऑल इंडिया रैंक 27157 रहा. जानिए उनकी कहानी.

बहन की बीमारी ने दी डॉक्टर बनने की प्रेरणा

आजतक से जुड़े पत्रकार चेतन गुर्जर की रिपोर्ट के मुताबिक, कोटा जिले के कैथून कस्बे के गोदल्याहेड़ी गांव में सागर रहते हैं. NEET एग्जाम में उनकी कैटेगरी रैंक 684 है. उन्होंने ALLEN से अपनी पढ़ाई की जिसके बाद वे एग्जाम में सफल रहे. 

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सागर के परिवार के ज्यादातर लोग निरक्षर हैं. उनकी मां कक्षा 8 तक पढ़ीं हैं, जब्कि पिता लिखना-पढ़ना नहीं जानते. उनके परिवार के कई सदस्यों को नशे की लत रही है. उनकी बुआ की बेटी लंबे समय से गुटखा खाती थी, जिसकी वजह से उसे कैंसर हो गया. 

इस घटना ने सागर को अंदर से झकझोर दिया. फिर उन्होंने खुद डॉक्टर बन लोगों का इलाज करने का सोचा और इस दिशा में कदम बढ़ाया. 

स्कूल के प्रिंसिपल ने दिया साथ

सागर ने बताया कि उनके आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि मेडिकल की तैयारी करने का खर्च उठाना मुमकिन नहीं था. ऐसे में उनके प्रिंसिपल ने काफी मदद की. सागर राजकीय विद्यालय में पढ़ते थे. उनके 10वीं कक्षा में 76 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत आए. प्रिंसिपल ने उन्हें शिक्षा संबल योजना के बारे में बताया. ये एग्जाम ALLEN कोचिंग कराता है. इसमें छात्र के रहने, खाने और पढ़ाई का खर्च कोचिंग उठाता है. सागर इसमें सफल रहे और यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई. 

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सागर के पिता करते हैं कूड़ा बीनने का काम

सागर के पिता मुरली रेगर घर-घर कबाड़ इकट्ठा करने का काम करते हैं. इसी से पांच लोगों का परिवार पलता है. उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनना सागर का बचपन का सपना है. कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद उन्होंने अपने बेटे को आगे पढ़ने का हौसला दिया. उनका कहना है कि सही समय पर उन्हें मदद भी मिल गई जिससे उनके बेटे की लगन सफल रही. 

घर में सागर की दो बहनें भी हैं. बड़ी बहन 12वीं कक्षा में बायोलॉजी पढ़ रही है और दूसरी 10वीं कक्षा की छात्रा है. सागर का कहना है कि अगर उनका NEET में सलेक्शन नहीं होता, तो मजबूरन BSc. में दाखिला लेना पड़ता.

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