ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेनाओं की प्रेस कांफ्रेंस में DG एयर ऑपरेशंस, एयर मार्शल एके भारती से एक सवाल पूछा गया. सवाल था कि क्या पाकिस्तान के न्यूक्लियर ठिकाने किराना हिल्स निशाने पर था? क्या वहां भारत ने हमला किया है? इस पर एयर मार्शल भारती दो सेकेंड रुके. फिर उन्होंने जो जवाब दिया, वो इंटरनेट पर वायरल हो गया था. आज भी हर भारतीय उसे देख कर मुस्कुरा देता है.
पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने Kirana Hills पर गिरा था ड्रोन? पूर्व CDS ने खोले Operation Sindoor के राज
Operation Sindoor के दौरान सरगोधा एयरबेस और किराना हिल्स (Kirana Hills) पर हमले का दावा किया गया था. अब पूर्व CDS Gen Anil Chauhan ने बताया कि सरगोधा पर कार्रवाई की मंजूरी कैसे मिली और किराना हिल्स में क्या हुआ था.

एयर मार्शल भारती ने कहा था,
सबसे पहले तो ये बताने के लिए शुक्रिया कि किराना हिल्स में पाकिस्तान का न्यूक्लियर ठिकाना है. हमें इस बारे में नहीं पता था. वैसे वहां जो भी है, हमने किराना हिल्स को हिट नहीं किया है.
हालांकि, इंटरनेट पर घूमने वाला एक वीडियो एयर मार्शल भारती की इस बात से थोड़ा अलग था. वीडियो में एक उड़ता हुआ ऑब्जेक्ट जाकर किराना हिल्स पर लगा. असल में वहां क्या हुआ था, अब जाकर क्लियर हुआ है. भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल अनिल चौहान ने इस पर बात की है. साथ ही, उन्होंने ऑपरेशन की प्लानिंग, टारगेट सिलेक्शन और हाल ही में पाकिस्तान-तुर्किए-चीन के बीच हुए मक्का पैक्ट पर भी बात की है. जनरल चौहान ने क्या बताया है, एक-एक करके समझते हैं.
बहावलपुर को टारगेट कैसे चुना गया?
बहावलपुर में भारत ने मरकज सुभानअल्लाह पर स्ट्राइक की थी. ये जगह आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर है. जनरल चौहान बताते हैं कि टारगेट्स में बहावलपुर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कहने पर जोड़ा गया था. उनके मुताबिक इस प्लान को पीएम ने हरी झंडी दे दी थी. जनरल चौहान कहते हैं,
जब हमने बहावलपुर को टारगेट की लिस्ट में डाला, तब एयरफोर्स का इस्तेमाल जरूरी हो गया. हमारे लॉइटर म्युनिशंस और ड्रोन्स वहां नहीं पहुंच सकते थे. क्योंकि बहावलपुर पाकिस्तान में काफी अंदर है.

जनरल चौहान बताते हैं कि 24 अप्रैल के बाद कई आतंकी कैंप खाली हो गए थे. कुछ दूसरी जगह शिफ्ट हो गए, तो कुछ नए बने. हमारी इंटेलिजेंस ने उनकी जानकारी जुटाई. टारगेट्स के हिसाब से तय किया गया कि हमला कहां और किस तरह का करना है.
पाकिस्तान में इतने अंदर सटीक हमले कैसे हुए?जनरल चौहान ने जंग को लेकर एक बहुत ही अहम बात कही. उन्होंने कहा कि आप चाहे जितनी भी तैयारी कर के जाओ, हमेशा कुछ न कुछ कमी रह ही जाएगी. ये जंग है, तो जंग की तैयारी एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. तीनों सेनाओं ने सरकार से कहा कि आप जो भी फैसला लेंगे, हम उसे पूरा करने की क्षमता रखते हैं.
जनरल चौहान ने अतीत में भारत द्वारा आतंकियों के खिलाफ किए गए ऑपरेशंस का जिक्र किया. वो बताते हैं कि उरी हमले के बाद हम जमीन के रास्ते गए थे. फिर पुलवामा के बाद हमने 40 से अधिक जहाजों के साथ हवाई हमला किया. लेकिन सिंदूर में हमने एक तीसरा ऑप्शन चुना. क्योंकि आप हमेशा वहीं नहीं कर सकते जो पहले किया है. हर बार आपको कुछ नया सोचना होता है. हमने 'लोअर एयरस्पेस' को चुना. यानी काफी नीचे उड़ान भरते हुए हमने हमले किए.

जनरल चौहान अपने संबोधन के दौरान सरगोधा पर हुए हमलों का भी जिक्र करते हैं. सरगोधा वही जगह हैं जहां पाकिस्तानी एयरफोर्स का Combat Commanders' School और Airpower Centre of Excellence है. दिलचस्प बात ये है कि इस बहुत ही सिक्योर बेस के लगभग 10 किलोमीटर दूर किराना हिल्स है.
जनरल चौहान बताते हैं कि 10 मई की सुबह 10 बजे के आसपास पाकिस्तानी DGMO फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे. बातचीत की संभावना थी. इसलिए एयरफोर्स के चीफ, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह उनसे पूछा,
सरगोधा पर हमला करें क्या?
जनरल चौहान ने कहा - Go Ahead. और यहीं से कहानी में एंट्री हुई किराना हिल्स की. वही किराना हिल्स जिसके बारे में जितने मुंह, उतनी बातें सुनने को मिलती हैं. किसी ने कहा कि ड्रोन हमला हुआ है. किसी ने ब्रह्मोस हमले की बात की. वहीं जनरल चौहान ने अब इस पर खुल कर बात की है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कोई लॉइटरिंग म्युनिशन (सुसाइड ड्रोन) वहां गिरा हो. वजह, तमाम ड्रोन्स को सरगोधा बेस के रडार ढूंढने के लिए लगाया गया था. लेकिन इन ड्रोन्स का पावर बैकअप अधिक नहीं होता. इसलिए उनकी बैटरी/फ्यूल खत्म होने की वजह से वो गिर गए होंगे.
लेकिन इंटरनेट पर इसको लेकर भी तमाम अटकलें चल रही हैं. कई लोगों का कहना है कि हमले को देख कर ये बिल्कुल नहीं लग रहा कि ये कोई ड्रोन है. रफ्तार और पाथ को देख कर लग रहा है कि ये ब्रह्मोस मिसाइल है. कई लोगों ने पूछा कि क्या हमारा लॉइटरिंग म्युनिशन इस सुपसॉनिक स्पीड से जाता है?
कुदरत की वजह से बच गया स्कर्दु एयरबेसजनरल चौहान ने एयर चीफ से कहा कि 2 और टारगेट्स ढूंढे जाएं. एयर चीफ ने दोनों टारगेट ढूंढ़ लिए जिसपर हम तुरंत हमले कर सकते थे. उनमें से एक था स्कर्दु एयरबेस. हमला करने के लिए मंजूरी भी मिल गई. लेकिन तभी कुदरत ने पाकिस्तान के इस बेस को बचा लिया.
दरअसल स्कर्दु भारत के जम्मू-कश्मीर का इलाका है. लेकिन पाकिस्तान ने इसपर अवैध कब्जा किया हुआ है. हिमालय में होने की वजह से स्कर्दु में मौसम बहुत तेजी से बदलता है. ऐन वक्त पर मौसम खराब हो गया. इसलिए स्कर्दु की जगह भोलारी एयरबेस पर हमला किया गया. भोलारी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के कराची में पड़ता है.

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मक्का पैक्ट से भारत को खतरा?पाकिस्तान अगर किसी देश के साथ डिफेंस पैक्ट या एग्रीमेंट जैसा कुछ साइन करता है, तो इसका प्रभाव भारत पर भी पड़ता है. जनरल चौहान ने इस पैक्ट पर भी बात की. उन्होंने बताया कि बीते 7 अगस्त को पाकिस्तान-तुर्किए और सऊदी अरब ने मक्का पैक्ट साइन किया है. इसमें डेटरेंस की बात है. ये भी है कि किसी एक देश पर हमला, सभी पर हमला माना जाएगा. जनरल चौहान कहते हैं,
मेरे विचार से भारत की सुरक्षा के लिए ये काफी अहम है. जब तक पैक्ट में ये नहीं कहा जाता कि ये भारत के खिलाफ नहीं है, तब तक हमें ये मान कर चलना होगा कि ये भारत के खिलाफ ही है.
एक साल बीतने के बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कई नई बातें पता चल रही हैं. डिस्कवरी चैनल पर डॉक्यूमेंट्री में उस समय सेवा में रहे कई अधिकारियों ने बताया कि उस दौरान क्या हुआ था. सैन्य अधिकारियों की बातों से न सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर बल्कि उसके पीछे लगे अनगिनत लोगों की मेहनत, बलिदान और शौर्य की कहानियां भी सामने आ रही हैं. ब्रह्मोस को लेकर पाकिस्तान में जो खौफ था, उसका कारण पता चल रहा है. फिर भी कुछ कहानियां ऐसी हैं जो कभी पता नहीं चलती. इस ऑपरेशन का हिस्सा रहे कुछ जवानों और अधिकारियों की पहचान गुप्त रखी गई है. सुरक्षा के लिहाज से ऐसा किया गया.
वीडियो: ऑपरेशन सिंदूर से हमें क्या सीख मिली? CDS जनरल अनिल चौहान ने बताया










