आपने एक्टर अनिल कपूर की नायक मूवी देखी होगी. एक दिन का मुख्यमंत्री बन कर अनिल कपूर का किरदार अचानक से राशन की दुकान और ट्रक के चेकपॉइंट्स पर जाकर औचक निरीक्षण करता है. वो आम आदमी बनकर ये देखने की कोशिश करता है कि राज्य में सब काम ठीक से हो रहा है या नहीं. अब ऐसा ही कुछ कर्नाटक में देखने को मिला है. यहां ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर बायरथी सुरेश एक बस में बैठे थे, ताकि जनता की ओर से आने वाली शिकायतों की सच्चाई जान सकें. बस बेंगलुरु मेट्रोपोलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (BMTC) की थी. मंत्री बस में बैठ तो गए लेकिन कुछ देर बाद उतार दिए गए. वजह क्या थी वो आगे बताते हैं.
'नायक' पिक्चर की तरह आम पैसेंजर बने थे कर्नाटक के मंत्री, कंडक्टर ने बस से उतार दिया, फिर...
मिनिस्टर बायरथी सुरेश चेहरे पर मास्क लगाकर लगभग दो घंटे तक 10 से ज्यादा BMTC बसों में सफर करते रहे. मंत्री ने कई ऐसी समस्याओं को देखा जिनकी शिकायत आम यात्री अक्सर करते हैं.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट मंत्री बायरथी सुरेश चेहरे पर मास्क लगाकर लगभग दो घंटे तक 10 से ज्यादा BMTC बसों में सफर करते रहे. इस दौरान मंत्री ने कई ऐसी समस्याओं को देखा जिनकी शिकायत आम यात्री अक्सर करते हैं. लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता. एक BMTC के बस के पैसेंजर को 'फन वर्ल्ड' बस स्टॉप पर उतरना था लेकिन कंडक्टर ने बस रुकने ही नहीं दी. मंत्री ने ये देखा और मौके पर ही कार्रवाई करते हुए ड्राइवर और कंडक्टर दोनों को सस्पेंड करने का आदेश दे दिया.
इस ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के दौरान मंत्री को यात्रियों की एक आम शिकायत का भी सामना करना पड़ा. हेब्बल-नागाशेट्टीहल्ली रूट की बस में सफर करते समय उन्होंने टिकट खरीदने के लिए कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया. लेकिन कंडक्टर ने कहा कि उसके पास खुले पैसे नहीं हैं. उसने टिकट भी नहीं दिया और मंत्री को बस से उतरने के लिए कह दिया. यह वो समस्या थी, जिससे आम लोग हर दिन रूबरू होते थे. मंत्री को भी उस समस्या का सीधा अनुभव हुआ जिसका सामना रोज कई यात्री करते हैं.
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ऑटो-रिक्शा का विवाद भी सुलझायाहालांकि मंत्री का निरीक्षण बस की सवारी के साथ खत्म नहीं हुआ. नागाशेट्टीहल्ली में उतरने के बाद मंत्री सुरेश ने एक ऑटो-रिक्शा ड्राइवर से जुड़े विवाद में दखल दिया. ड्राइवर ने कथित तौर पर पैसेंजर से 36 रुपये मांगे थे, जबकि किराया मीटर 30 रुपये दिखा रहा था. मंत्री ने ये विवाद भी सुलझाया. उन्होंने कहा कि जवाबदेही बढ़ाने, परिवहन कर्मचारियों में अनुशासन बनाए रखने और यात्रियों के सफर के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए इस तरह के अचानक निरीक्षण जारी रहेंगे. यह ‘गुप्त ऑपरेशन’ शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में बेहतर बनाने के लिए है.
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