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'गांजा' ने दिलवाई 7 साल की सजा, अब भांग ने पूरी की पूरी खत्म करवा दी

Ganja vd Bhang: 2020 में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में गश्त के दौरान पुलिस को चाईबासा बस स्टैंड के पास एक शख्स पर शक हुआ. पुलिस ने उसे रुकने के लिए कहा, लेकिन वो भागने लगा. पुलिस ने उसे 12 पॉलिथिन बैग में संदिग्ध 'गांजा' के साथ पकड़ लिया. अब इस मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है.

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FSL रिपोर्ट में जब्त किया पदार्थ भांग निकला था.

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  • झारखंड हाई कोर्ट ने 2020 में पूर्वी सिंहभूम में नशीला पदार्थ रखने के मामले में सात साल की सजा और जुर्माने की सजा पाने वाले व्यक्ति को राहत दी, क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट में पदार्थ भांग बताया गया था।
  • मामला तब शुरू हुआ जब पुलिस ने चाईबासा बस स्टैंड के पास एक व्यक्ति को संदिग्ध गांजा के साथ पकड़ा, लेकिन कोर्ट में फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट ने पदार्थ को गांजा नहीं, बल्कि भांग बताया।
  • हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि भांग को NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थ में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए इससे संबंधित आरोपों की समीक्षा कर आरोपी को बरी किया गया।

2020 में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में एक शख्स को प्रतिबंधित नशीली चीज रखने के आरोप में पकड़ा गया. पुलिस ने दावा किया कि शख्स के पास से 11 किलोग्राम 'गांजा' बरामद किया गया. कोर्ट में केस चला और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत नशीला पदार्थ रखने के जुर्म में पकड़े गए शख्स को 7 साल की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा हो गई. मामला झारखंड हाई कोर्ट में पहुंचा. 'गांजा' और 'भांग' पर बहस हुई और हाई कोर्ट से शख्स बरी हो गया.

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झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने स्पेशल जज-कम-एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (फास्ट ट्रैक कोर्ट-VI), जमशेदपुर के फैसले को पलट दिया. सुनवाई के दौरान यह पता चला कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) रिपोर्ट में जब्त नशीला पदार्थ 'गांजा' नहीं बल्कि 'भांग' बताया गया था.

हाई कोर्ट ने इसी पॉइंट पर गौर करते हुए 7 साल की सजा पाए शख्स को राहत दी. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि NDPS एक्ट के तहत 'भांग' रखना गैर-कानूनी नहीं है. यह प्रतिबंधित Cannabis (कैनबिस) के दायरे में नहीं आता. 'गांजा' इस दायरे में आता है. इसलिए 'गांजा' रखना कानून जुर्म है.

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हाई कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसा कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि 'भांग', ‘चरस’ या गांजे से बनाई जाती है. कोर्ट ने कहा कि ना तो NDPS एक्ट और ना ही राज्य सरकार के किसी नियम या नोटिफिकेशन में 'भांग' को प्रतिबंधित नशीला पदार्थ माना गया है.

हाई कोर्ट जज ने क्या कहा?

जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा,

"ऊपर की चर्चा, कारणों और खास बातों को ध्यान में रखते हुए, यह बिल्कुल साफ है कि 'गांजा' और 'चरस' को कैनबिस (हेम्प) की परिभाषा में शामिल किया गया है, जबकि NDPS एक्ट के तहत 'भांग' को इससे बाहर रखा गया है..."

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हाई कोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 की धारा 2 (iii) का जिक्र किया कि इसमें प्रतिबंधित Cannabis के तहत 'भांग' शामिल नहीं है.

ndps act cannabis
NDPS एक्ट की धारा 2(iii). (dor.gov.in)
चरस, गांजा और भांग में फर्क

#'चरस' कैनेबिस पौधे के रेज़िन से बनता है. रेज़िन गोंद टाइप का द्रव्य होता है जो पेड़ की डालियों पर लटकता है.
#'गांजा' इसी पौधे के फूल को सुखा के उसे खूब दबा के तैयार किया जाता है.
#'भांग' को कैनेबिस के बीज और पत्तियों को पीस-पीस कर तैयार किया जाता है.

क्या था मामला?

2020 में पूर्वी सिंहभूम जिले में गश्त के दौरान पुलिस को चाईबासा बस स्टैंड के पास एक शख्स पर शक हुआ. पुलिस ने उसे रुकने के लिए कहा, लेकिन वो भागने लगा. पुलिस ने उसे 12 पॉलिथिन बैग में संदिग्ध 'गांजा' के साथ पकड़ लिया.

यह भी पढ़ें: गांजा बेचना जुर्म है तो भांग बेचना लीगल क्यों? दोनों एक ही पौधे से बनते हैं

FSL रिपोर्ट में क्या कहा गया?

मामला जमशेदपुर की अदालत में गया तो 29 नवंबर 2002 की FSL की रिपोर्ट जमा की गई. रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि पकड़ा गया माल 'गांजा' नहीं बल्कि 'भांग' है. लेकिन रिपोर्ट में कहा गया कि 'गांजा' और 'भांग' दोनों ही कैनबिस हैं. इस आधार पर कोर्ट ने शख्स को 7 साल की सजा और 50,000 रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था.

वीडियो: झारखंड में 200 किलो गांजा चूहे खा गए, पुलिस की इस कहानी पर कोर्ट ने क्या कहा?

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