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ड्राइविंग लाइसेंस होल्डर्स की दो कैटेगरी होंगी? दूसरे वाले DL रिन्यू कराने में रो देंगे!

गाड़ी लेकर सड़क पर पायलट बनने वाले हेवी ड्राइवरों के लिए के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करवाना मुश्किल (Driving test mandatory for repeat offenders) हो सकता है. नई व्यवस्था में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को टेस्ट देने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है.

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ड्राइविंग लाइसेंस रीन्यू करवाना मुश्किल होगा

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  • सरकार ने ट्रैफिक नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल प्रक्रिया में अनिवार्य ड्राइविंग टेस्ट लागू करने का निर्णय लिया है।
  • मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में ट्रैफिक उल्लंघनों की बढ़ती संख्या और सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि प्रमुख कारण हैं, जिनके खिलाफ कड़े नियम बनाना आवश्यक माना गया है।
  • प्रस्तावित नए नियमों के तहत ड्राइविंग टेस्ट अस्वीकृति से लाइसेंस रिन्यूअल रुक सकता है और सड़क हादसों में पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने तथा तुरंत राहत देने की व्यवस्था की जाएगी।

ट्रैफिक नियम तोड़ना अब सिर्फ जेब पर भारी नहीं होगा बल्कि इसका असर ड्राइविंग लाइसेंस के प्रोसेस पर भी पड़ेगा. गाड़ी लेकर सड़क पर 'पायलट' बनने वाले हेवी ड्राइवरों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू करवाना मुश्किल हो सकता है (Driving test mandatory for repeat offenders). सरकार उन वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य करने जा रही है जो अपने ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण (रिन्यूअल) करवाना चाहते हैं और जिनका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का इतिहास रहा है. वैसे एक और बदलाव सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों को दिए जाने वाले अंतरिम मुआवजे में भी हो सकता है. दोनों बातें जान लीजिए.

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टेस्ट नहीं देना तो हिस्ट्री क्लीन चाहिए

पहली बार ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने पर तो तमाम तरीके के टेस्ट देने होते हैं. मगर नॉर्मल लाइसेंस रिन्यूअल के लिए ऐसा नहीं होता. RTO ऑफिस जाने से काम हो जाता है, बशर्ते आपका वर्तमान लाइसेंस एक्सपायर हुए एक साल से ज्यादा ना हुआ हो. बोले तो 20 साल वाली वर्तमान वैधता के अंदर आप बिना टेस्ट के लाइसेंस रिन्यू करवा सकते हैं. लेकिन ये व्यवस्था नियम कानून मानने वालों के लिए है.

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नई व्यवस्था में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों को टेस्ट देने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. यानी ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू कराने की प्रक्रिया में दो कैटेगरी हो सकती हैं. एक वो डीएल होल्डर्स जिनका ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह या काफी हद तक क्लीन है, यानी नियम-कायदों में गाड़ी चलाते हैं. दूसरे वो जो गाड़ी के टायर से सड़क चीरने घर से निकलते हैं. आए दिन चालान कटवाते हैं, गाड़ी ठोकते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग दो साल तक राज्यों और मंत्रालयों के साथ बातचीत के बाद मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित बदलावों को पिछले हफ़्ते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह (iGoM) के सामने रखा गया. पैनल ने मंत्रालय को बिल को अंतिम रूप देने की मंज़ूरी दे दी है, जिसे संसद के आगामी मॉनसून सत्र में पेश किया जा सकता है.

इन प्रस्तावों का मकसद लापरवाह ड्राइवरों और बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के इस्तेमाल पर लगाम लगाना है. साथ ही, इनमें पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिसके तहत इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI गाड़ी की उम्र और चालान हिस्ट्री के आधार पर थर्ड-पार्टी प्रीमियम तय करता था. 2019 के संशोधन में यह अधिकार सड़क परिवहन मंत्रालय को सौंप दिया गया था.

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सड़क हादसों में अंतरिम राहत

पैनल ने सड़क हादसों में मौत या गंभीर चोट लगने पर मुआवज़े से जुड़े प्रोसेस में बदलाव की बात भी कही है. अभी, MACT (Motor Accidents Claims Tribunal) पीड़ितों को कोई अंतरिम राहत नहीं दे सकते. मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि क्लेम ट्रिब्यूनल 'ऐसी अंतरिम राहत दे सकता है जो उसे सही लगे'. यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि अगर कोई बीमा कंपनी या दोषी पक्ष क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देता है, तो उसे 10 लाख रुपये या तय मुआवज़े का 50% (जो भी कम हो) पहले जमा करना होगा. अभी यह रकम 25,000 रुपये या तय मुआवज़े का 50% (जो भी कम हो) है. माने भविष्य में सड़क दुर्घटना के पीड़ित को राहत की रकम तुरंत मिल सकती है. 

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