स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नए वोटरों को जोड़ने वाले फॉर्म-6 में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज नहीं किया था. मंजूर भी नहीं किया था. सोमवार, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने ये बात एकदम साफ कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को हिदायत भी दी कि वो केवल शब्दों को पकड़ने से बचें. CJI सूर्यकांत ने इसे लेकर जो भी बयान दिया था, उसका मतलब सिर्फ ये बताना था कि बिहार वाले SIR में नए फॉर्म-6 की जांच नहीं की गई थी क्योंकि उस समय वो मौजूद ही नहीं था.
'इस तरह शब्दों को न पकड़ें', चुनाव आयोग के फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने अब क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने SIR के दौरान नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को न तो मंजूरी दी है और न ही खारिज किया है.

ये विवाद फॉर्म-6 को लेकर तब शुरू हुआ, जब एक मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नए वोटरों को लिस्ट में रजिस्टर होने के लिए उनका लिंक 2002 की वोटर लिस्ट से होना जरूरी है. उनके माता-पिता या दादा-दादी में से किसी एक का नाम अगर पुराने एसआईआर लिस्ट में नहीं है तो वो फॉर्म भरने की दिशा में आगे ही नहीं बढ़ पाएंगे.
ईसीआईनेट पोर्टल पर फॉर्म-6 में इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि बिना सरकारी नोटिफिकेशन के फॉर्म-6 में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता. विपक्ष ने भी इसे मुद्दा बनाया और कहा कि ये बदलाव करके नए वोटरों को परेशान किया जा रहा है.
बाद में चुनाव आयोग ने सफाई दी कि इस बदलाव को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयोग के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया. 5 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार से संबंधित एक याचिका की सुनवाई करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 में किए गए किसी भी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है. इसके अलावा उन्होंने ये इशारा भी किया कि बाद में वो इस मामले की जांच भी करेंगे कि बदलाव किसने किया और क्यों किया.
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सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 पर क्या कहा?अब सोमवार, 12 अक्टूबर वाले मामले पर आते हैं. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच चुनाव आयोग से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका डालने वाले के वकील नरेंद्र मिश्रा ने अपनी दलील में जिक्र किया कि CJI ने पिछले हफ्ते निर्वाचन आयोग के उस दावे को खारिज कर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने नए फॉर्म-6 को मंजूरी दी है. मिश्रा ने कहा,
5 अक्टूबर को ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि फॉर्म-6 को कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है. लेकिन ECI ने कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है. इसी सिलसिले में मैं…
वकील के इतना कहते ही जस्टिस बागची ने उन्हें टोक दिया और बोले,
‘नए फॉर्म-6 पर कोई फैसला नहीं दिया गया.' हमने बस इतना ही कहा है. मंजूरी दी गई है या नहीं… इस तरह शब्दों को न पकड़ें.
जस्टिस बागची ने आगे साफ किया कि CJI ने जो कहा, वो बस इतना था कि जब बिहार SIR फैसला आया था, तब नया फॉर्म-6 मौजूद नहीं था. उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी दी है या नामंजूर किया है. हम इसकी जांच करेंगे.’
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