जामिया मिलिया इस्लामिया के 106वें फाउंडेशन डे पर छात्रों की जीत हुई. हफ़्तों तक चले विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बाद आखिरकार यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने घुटने टेक दिए. गुरुवार, 29 अक्टूबर को प्रशासन ने नोटिस जारी कर बताया कि अगस्त 2027 तक छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. जामिया में लगभग दो दशक यानी 20 साल बाद छात्र संघ के चुनाव होंगे. इस ऐलान के बाद छात्रों ने जमकर सेलिब्रेट किया.
जामिया में छात्रसंघ चुनाव को मिली हरी झंडी, तारीख तय, छात्रों की भूख हड़ताल खत्म
जामिया मिलिया इस्लामिया का 29 अक्टूबर को 106वां फाउंडेशन डे है. इसी दिन प्रशासन ने छात्रों की शर्तें मान लीं. प्रशासन ने स्टूडेंट इलेक्शन की टाइमलाइन बताई. साथ ही कहा कि विरोध में शामिल हुए छात्रों पर हुए एक्शन को वापस ले लिया जाएगा.

ऑफिस ऑर्डर के मुताबिक, प्रशासन ने जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार करने, उसे मंजूरी देने और लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी करने का निर्देश दिया है. बताया कि अगला अकादमिक सत्र 16 जुलाई, 2027 से शुरू हो रहा है. सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के अंदर चुनाव कराए जाएंगे. यूनिवर्सिटी में आखिरी बार चुनाव 2006 में हुआ था.
छात्रों ने ख़त्म की भूख हड़तालप्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रोफ़ेसर महताब आलम रिज़वी ने उनसे मुलाकात की और उन्हें छात्र संघ का संविधान बनाने और चुनाव कराने के लिए एक निश्चित समय-सीमा का आश्वासन दिया. इससे पहले 26 अक्टूबर को प्रशासन ने चुनाव कराने की बात कही थी. मगर तब एक तय डेडलाइन नहीं दी गई थी. छात्र इसी डेडलाइन की मांग पर अड़े हुए थे.

यूनिवर्सिटी के आदेश में कहा गया है कि ये प्रक्रिया लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार होगी. जिसके तहत छात्र संघ चुनावों की जिम्मेदारी छात्रों के हाथों में होती है. आदेश में ये भी बताया गया कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से जुड़े मौजूदा 'कारण बताओ' नोटिस, अनुशासनात्मक कार्यवाही, निष्कासन, निलंबन और कैंपस में प्रवेश पर रोक के आदेश वापस ले लिए जाएंगे.
29 अक्टूबर को जारी एक अलग नोटिस में, जामिया ने ये भी ऐलान किया कि सभी अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए ऑफलाइन क्लासेज और एग्जाम सोमवार, 2 नवंबर से फिर से शुरू होंगे. इसमें कहा गया है कि क्लास में अटेंडन्स ‘mandatory’ यानी ज़रूरी है.
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गुलिस्तां-ए-ग़ालिब कम्पाउंड में ग़ालिब की मूर्ति के नीचे रजिस्ट्रार ने छात्रों से बात की. कुछ देर तक वहां शांति रही. इसके बाद ‘इंक़िलाब जिंदाबाद’ और 'स्टूडेंट यूनिटी' के नारों से कैंपस गूंज उठा. हफ़्तों से बंद कैंपस का गेट नंबर 7 भी खोल दिया गया. जश्न जामिया के मेन सड़क तक फैल गया, जहां 1,000 से ज़्यादा छात्र एक मार्च में शामिल हुए. ढोल बज रहे थे, नारे लग रहे थे और कैंपस में बारिश हो रही थी, और छात्र जीत का जश्न मना रहे थे.
इस ऐलान के बाद पांच छात्रों ने अपना भूख हड़ताल ख़त्म किया. हड़ताल पर बैठे एक छात्र एबिन ने बताया कि ‘ये छात्रों की जीत है.’ इससे पहले दिन में भी छात्र गुलिस्तां-ए-ग़ालिब में इकट्ठा हुए थे. वहां छात्रों ने जामिया तराना भी गाया. यूनिवर्सिटी ने 22 अक्टूबर को फाउंडेशन डे सेलिब्रेशन और तालीमी मेला कैंसिल कर दिया था. अब उसी दिन प्रशासन ने ये ऑर्डर जारी किया है.
वीडियो: जामिया मिलिया में छात्र प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं?













