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जामिया में चुनाव कराने का आदेश, फिर भी जारी भूख हड़ताल, छात्रों ने वजह बताई

Jamia Students Protest: छात्र संघ चुनाव कराने के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आदेश के बाद भूख हड़ताल पर बैठे चार छात्रों में से जासिम खान और रिहान हैदर भूख हड़ताल खत्म कर चुके हैं. रिहान खान और एबिन बासिल की Hunger Strike जारी है.

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जामिया मिल्लिया के छात्रों ने भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया. (Courtesy: The Lallantop/PTI)

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  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने 26 अक्टूबर को छात्र संघ चुनाव कराने, प्रदर्शन के दौरान निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कार्रवाई की जांच के लिए कमेटी बनाने का आदेश जारी किया है।
  • छात्र संघ चुनाव न होने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में 12 अक्टूबर से छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है, साथ ही प्रशासन और छात्रों के बीच सार्वजनिक माफी की शर्त को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है।
  • आदेश के बाद भी छात्रों की भूख हड़ताल जारी है क्योंकि वे चुनाव की स्पष्ट तारीख और भविष्य में कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न करने की गारंटी की मांग कर रहे हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने आख‍िरकार छात्र संघ चुनाव कराने पर आदेश जारी कर द‍िया है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने और सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए कमेटी बनाने की बात भी कही है. लेकिन इस आदेश के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ है. कुछ छात्रों की भूख हड़ताल अभी भी जारी है.

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प‍िछले 15 द‍िनों से हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्रों को चुनाव की तारीख तय न होने और सार्वजनिक माफी मांगने की शर्त पर आपत्ति है. छात्रों के प्रतिनिधि नबेल ने द लल्लनटॉप से बातचीत में बताया कि चार भूख हड़तालियों में से दो ने भूख हड़ताल खत्म कर दी है, जबकि दो छात्र अब भी भूख हड़ताल पर हैं.

दरअसल, 26 अक्टूबर की सुबह विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय से एक आदेश जारी हुआ. इसमें छात्र संघ चुनाव कराने, छात्रों के खिलाफ जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने और सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही गई है. लेकिन छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति का दावा किए जाने के बावजूद विवाद खत्म नहीं हुआ है.

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जामिया मिल्लिया के आदेश में क्या ल‍िखा है?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रोफेसर एमडी महताब आलम रिजवी की ओर से जारी आदेश में तीन प्रमुख बातें कही गई हैं.

पहली: छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे.

दूसरी: प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे.

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तीसरी: प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी.

हालांकि, आदेश में ये भी ल‍िखा है कि प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक रूप से माफी मांगेंगे. साथ ही, ऐसे पोस्ट सोशल मीडिया से हटाए जाएंगे.

Jamia Election Order
(Courtesy: @jmiu_official/ X)

प्रशासन ने कहा है कि इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया गया है और इसके पालन की निगरानी की जाएगी. यानी चुनाव और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर राहत के साथ सार्वजनिक माफी की शर्त भी इस आदेश का हिस्सा है.

जामिया के आदेश की किन बातों पर आपत्ति?

छात्रों की आपत्ति जानने के लिए दी लल्लनटॉप ने छात्र प्रतिनिधि नबेल से बात की. नबेल के मुताबिक, आदेश की भाषा और उसमें शामिल शर्तों को लेकर छात्रों के बीच असहमति है. पहली आपत्ति चुनाव की समय सीमा को लेकर है.

छात्रों का कहना है कि संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए पहले से 20 दिसंबर की समयसीमा तय है. लेकिन ड्राफ्ट तैयार होने के बाद उसे मंजूरी कब मिलेगी, इसकी कोई स्पष्ट तारीख नहीं है. छात्रों के मुताबिक, जब तक संविधान को मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक चुनाव कराने के लिए 15 दिन की अवधि शुरू नहीं होगी.

ऐसे में चुनाव की वास्तविक तारीख अनिश्चित बनी हुई है. नबेल ने कहा कि छात्रों को संविधान तैयार करने या उसे मंजूरी देने की प्रक्रिया से आपत्ति नहीं है. उनकी मुख्य मांग है कि प्रशासन चुनाव कराने की एक स्पष्ट और अंतिम समय सीमा तय करे.

छात्रों की दूसरी बड़ी आपत्ति सार्वजनिक माफी और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की शर्त पर है. आदेश के मुताबिक, प्रर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों और पोस्ट को हटाना होगा और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक माफी मांगनी होगी.

नबेल के मुताबिक, भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को माफी मांगने की शर्त मंजूर नहीं है. उनका कहना है कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक माफी नहीं मांगना चाहते. छात्रों की एक और चिंता ये है कि आदेश में पहले जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की बात तो है, लेकिन भविष्य में कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होगी, इसकी स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है.

छात्र चाहते हैं कि प्रदर्शन के सिलसिले में आगे कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए.

डिमांड पर छात्रों के हस्ताक्षर कैसे?

नबेल ने बताया कि 26 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी. इस दौरान चार अन्य छात्र प्रतिनिधि भी बातचीत में शामिल थे. उनके मुताबिक, उस वक्त माहौल तनावपूर्ण था और आदेश की कुछ शर्तों को लेकर भ्रम की स्थिति थी.

Jamia Students Demand
(Courtesy: @jmiu_official/ X)

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और प्रतिनिधियों ने अपनी डिमांड से जुड़े दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. इसमें छात्रों की अपनी मांग और मांग पूरी होने पर माफी मांगने का जिक्र है. 26 अक्टूूबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट से छात्रों का ये डिमांड डॉक्यूमेंट और अपना आदेश शेयर किया.

लेकिन, बाद में दूसरे छात्रों के साथ चर्चा हुई तो उसकी भाषा और शर्तों को लेकर सवाल उठे. नबेल का कहना है कि इसके बाद भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया गया. ये फि‍लहाल छात्रों के प्रतिनिधि का पक्ष है. प्रशासन की ओर से इस बातचीत और हस्ताक्षर को लेकर सि‍र्फ ये आदेश ही आया है.

भूख हड़ताल पर बैठे चार छात्रों में से जासिम खान और रिहान हैदर भूख हड़ताल खत्म कर चुके हैं. जबक‍ि, रिहान खान और एबिन बासिल ने भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है. एक अन्य छात्रा रिदा भी पहले भूख हड़ताल पर बैठी थीं. ले‍क‍िन फैम‍िली इमरजेंसी के कारण उन्होंने पहले ही भूख हड़ताल खत्म कर दी थी.

अब कुल म‍िलाकर छात्रों की मांग है कि प्रशासन चुनाव कराने की निश्चित समयसीमा दे, भविष्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई न करने का आश्वासन दे और सार्वजनिक माफी की शर्त पर पुनर्विचार करे.

अब आपको इस मामले का एक ब्रीफ बैकग्राउंड भी बता देते हैं.

जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से प्रदर्शन चल रहा है. छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में 20 साल से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं और वे अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार चाहते हैं. साल 2006 में आखिरी बार जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ का चुनाव हुआ था.

प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई. इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कमेटी बनाई. छात्रों का कहना था कि केवल संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करना काफी नहीं है. उन्हें चुनाव की तारीख भी चाहिए.

24 अक्टूबर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सभी क्लास अगले आदेश तक ऑनलाइन करने का फैसला किया था. 26 अक्टूबर को प्रशासन ने चुनाव, अनुशासनात्मक नोटिस और सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच को लेकर आदेश जारी किया.

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लेकिन अब सवाल है कि क्या इस आदेश से आंदोलन खत्म होगा या चुनाव की निश्चित समयसीमा और माफी की शर्त को लेकर विवाद जारी रहेगा? जामिया में छात्र संघ चुनाव का रास्ता खोलने की दिशा में प्रशासन का आदेश आ चुका है. लेकिन छात्रों के प्रतिनिधि के मुताबिक, जब तक उनकी प्रमुख आपत्तियों का समाधान नहीं होता, भूख हड़ताल जारी रहेगी.

वीडियो: जामिया मिलिया में छात्र प्रोटेस्ट क्यों कर रहे हैं?

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