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'सावरकर को भारत रत्न में देरी क्यों?', अपनी ही सरकार से BJP विधायक ने 'कठोर' सवाल पूछ लिया

महाराष्ट्र विधानसभा में हिंदुत्ववादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित करने में हो रही देरी को लेकर बीजेपी के विधायक ने अपनी ही सरकार को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद विचारधारा नहीं बदलना चाहिए.

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महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक ने सावरकर को भारत रत्न देने के मसले पर अपनी सरकार को घेर लिया. (इंडिया टुडे)

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  • महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने विनायक दामोदर सावरकर को मरणोपरांत भारत रत्न देने का प्रस्ताव मार्च में पेश किया, पर इसे अभी तक सदन में विचार के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया है।
  • सरकार ने प्रस्ताव को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में नहीं रखे जाने के कारण सदन की कार्यसूची में शामिल नहीं किया, जिसके चलते सावरकर को भारत रत्न देने की मांग लंबित है।
  • सरकार ने बताया है कि अगले सत्र में इस प्रस्ताव को BAC में चर्चा के लिए रखा जाएगा, जिससे सदन में आगे विचार करके फैसला लिया जा सकेगा।

महाराष्ट्र में एक बार फिर से हिंदुत्ववादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर को ‘भारत रत्न’ देने की मांग उठी है. राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार है. बीजेपी के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने इस मसले पर अपने ही पार्टी को घेर लिया. उन्होंने विधानसभा में सावरकर को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ देने का प्रस्ताव पारित करने में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए.  

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मुनगंटीवार ने पेश किया था प्रस्ताव

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सुधीर मुनगंटीवार ने इस साल मार्च में महाराष्ट्र विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया था. इसमें विनायक दामोदर सावरकर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की गई थी. मुनगंटीवार ने मानसून सत्र के आखिरी दिन यह मामला उठाया. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने 5 मार्च को सदन को आश्वासन दिया था कि प्रस्ताव पर जितनी जल्दी हो सके विचार किया जाएगा. लेकिन यह प्रस्ताव पिछले बजट सत्र या मौजूदा मानसून सत्र के दौरान लिस्ट ऑफ बिजनेस (कार्यसूची) में शामिल नहीं हुआ. मुनगंटीवार ने कहा,

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वीर सावरकर को अंग्रेजों के हाथों तो यातनाएं झेलनी ही पड़ी. कम से कम हम तो अनजाने में अपनी देरी के चलते उनको कष्ट नहीं पहुंचाएं. हमें केवल एक प्रस्ताव पास करना है. क्या एक फाइल को भी इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ सकता है? 5 मार्च से 10 जुलाई तक दो सत्र हो चुके हैं.

उन्होंने आगे अपनी सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा,

 अगर सत्ता में आने के बाद आपकी विचारधारा बदल गई है तो मैं इस मुद्दे को कभी नहीं उठाऊंगा. लेकिन आपके काम उस विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं, जिसके पालन करने का आप दावा करते हैं. जब कोई पार्टी सत्ता में आती है तो उसे अपनी विचारधारा नहीं बदलनी चाहिए. अगर इस मुद्दे पर सरकार का रुख बदल गया है तो उसे खुलकर इस बात को बताना चाहिए.

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सुधीर मुनगंटीवार ने संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटिल से इस मसले पर सरकार का रुख साफ करने का अनुरोध किया. बीजेपी नेता ने आगे कहा, ‘मुझे इस बात का बेहद दुख है कि एक कार्यकर्ता के तौर पर जिसने अपना जीवन सावरकर की विचारधारा को समर्पित कर दिया. हमारी अपनी सरकार इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है. मुझे इसका बेहद अफसोस है. अब से मैं इस मुद्दे को दोबारा कभी नहीं उठाऊंगा.’

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विधानसभा अध्यक्ष ने दी सफाई

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने इस मसले पर सफाई देते हुए बताया कि प्रस्ताव सदन के सामने नहीं रखा गया क्योंकि इस पर बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में चर्चा नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से यह मुद्दा BAC के सामने नहीं आया. मुझे सदन के सभी नेताओं से चर्चा किए बिना इस तरह का प्रस्ताव सदन के सामने लाना उचित नहीं लगा.

राहुल नार्वेकर ने आगे बताया कि सरकार की तरफ से उनको बताया गया है कि वह इस मामले को आगे बढ़ा रही है. अगले सत्र के दौरान बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी. 

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