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प्लॉट, बंगले और ट्रांसफार्मर फैक्ट्रियां खोल दीं... सरकारी इंजीनियर की काली कमाई का खेल पकड़ा गया

MP में लोकायुक्त की टीम ने बिजली कंपनी के इंजीनियर पर शिकंजा कसा है. शुरुआती जांच में आय से 275% अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है. टीम ने इंजीनियर के इंदौर समेत 9 ठिकानों पर छापेमारी की. वहां से सोना-चांदी, नकदी, फैक्ट्रियां और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं.

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छापेमारी में बिजली इंजीनियर के घर सोना-चांदी बरामद हुआ. (ITG)

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  • मध्यप्रदेश लोकायुक्त ने बिजली कंपनी के एडिशनल चीफ इंजीनियर शिवराम सेमिल के खिलाफ 33 सालों में आय से 275 फीसदी अधिक संपत्ति जुटाने के आरोप में 9 ठिकानों पर छापेमारी की।
  • जांच में पाया गया कि शिवराम सेमिल ने 2 करोड़ रुपये वैध आय के बजाय लगभग 7.16 करोड़ रुपये की संपत्ति और निवेश अपने परिवार एवं करीबियों के नाम पर किए।
  • लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच और संपत्तियों का मूल्यांकन जारी रखा है।
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धर्मेंद्र कुमार शर्मा

मध्यप्रदेश में लोकायुक्त ने बिजली कंपनी के एक ऐसे अधिकारी को ढूंढ निकाला, जिसने 33 सालों की सर्विस में कथित तौर पर अपनी आय से 275 फीसदी ज्यादा कमाई कर डाली. जांच में पता चला कि आरोपी ने 2 करोड़ रुपये की कानूनी कमाई की जगह करीब 7.16 करोड़ रुपये इकट्ठा कर डाले. 9 ठिकानों पर दी गई दबिश में सोना-चांदी, नकदी, फैक्ट्रियां और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले. इन 'महाशय' का नाम शिवराम सेमिल है, जो मध्य प्रदेश की बिजली कंपनी 'मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड' (MPPKVVCL) में एडिशनल चीफ इंजीनियर हैं.

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1.20 करोड़ का घर?

सोमवार, 20 जुलाई को लोकायुक्त पुलिस ने शिवराम सेमिल के इंदौर, पीथमपुर, धार और मुरैना समेत कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की. इंडिया टुडे से जुड़े धर्मेंद्र कुमार शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, इन ठिकानों में लोकायुक्त टीम को सिलिकॉन सिटी में एक आलीशान तीन मंजिला बंगला भी मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1.20 करोड़ रुपये है.

लोकायुक्त टीम को दबिश में क्या मिला?

शुरुआती जांच के आधार पर शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. इंदौर में लोकायुक्त की टीमों ने सिलिकॉन सिटी के तीन मंजिला मकान, एडिशनल चीफ इंजीनियर के ऑफिस, पीथमपुर और धार में ट्रांसफार्मर निर्माण और मरम्मत से जुड़ी फैक्ट्रियों और मुरैना स्थित मकान समेत कुल 9 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी.

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लोकायुक्त के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सुनील कुमार तलन ने बताया कि शुरुआती जांच में पता चला कि शिवराम सेमिल की 33 सालों की सर्विस में कुल वैध नेट आय लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई. जबकि जांच में उनके द्वारा लगभग 7.50 करोड़ रुपये तक संपत्ति और खर्च सामने आया. यह उनकी कानूनी कमाई से करीब 275 फीसदी ज्यादा है.

लोकायुक्त की तलाशी में इंदौर स्थित घर से लगभग 300 ग्राम सोने की ज्वेलरी, 3 से 3.5 किलोग्राम चांदी के जेवरात, करीब 3 लाख रुपये नकद, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का एक लॉकर और कई संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं.

निवेश, प्लॉट और फर्म का पता चला

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के परिवार के सदस्यों और करीबियों के नाम पर कई प्लॉट, फर्म और ट्रांसफार्मर बनाने और सुधारने वाली फैक्ट्रियां चलती हैं, जिन्हें बिजली कंपनी के खराब ट्रांसफार्मर के टेंडर मिलते रहे हैं.

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शिवराम सेमिल के बेटे, बहू, दामाद और रिश्तेदारों के नाम पर निवेश भी मिला है. मामले में शुभम इलेक्ट्रिकल, कर्निश पावरजोन, एस.एस. इलेक्ट्रिकल्स समेत कई फर्म जांच के घेरे में आई गई हैं. लोकायुक्त पुलिस ने शिवराम सेमिल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. फिलहाल सभी 9 ठिकानों पर मिले दस्तावेजों की जांच, संपत्तियों की इन्वेंट्री और वैल्यूएशन की कार्रवाई जारी है.

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