अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिका में चल रहा आपराधिक केस अब खत्म हो गया है. एक अमेरिकी जज ने अडानी पर लगे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया है. ये मामला साल 2024 से चल रहा था. अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से केस वापस लेने की मांग की थी. सोमवार 10 अगस्त को ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गराउफिस ने इस मांग को मंजूर कर लिया है.
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Gautam Adani on US Judge: एक अमेरिकी जज ने गौतम अडानी पर लगे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया है. लेकिन जज ने पहले अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर्स से कुछ कड़े सवाल किए तब जाकर चार्जेस हटाए गए. गौतम अडानी ने अमेरिकी जज का शुक्रिया अदा किया है.

लेकिन ये सब इतना सिंपल नहीं था. जज ने केस खत्म करने से पहले अमेरिकी प्रॉसिक्यूटर्स से कई सवाल पूछे. उन्होंने पूछा कि आखिर न्याय विभाग इस केस को वापस क्यों लेना चाहता है. जज ने ये भी सवाल किया कि, क्या अडानी के पहले किए गए उस वादे का इस फैसले में कोई असर पड़ा, जिसमें उन्होंने अमेरिका में 10 अरब डॉलर इनवेस्ट करने की बात कही थी?
कोर्ट ने क्या कहा?रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये केस उन कई हाई प्रोफाइल और वाइट कॉलर मामलों में से एक है, जिन्हें राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी न्याय विभाग ने वापस लिया है. न्याय विभाग के अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर ने कहा कि उन्होंने अडानी के वकीलों और दूसरे अधिकारियों से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने खुद इस मामले की समीक्षा की और केस खत्म करने का फैसला लिया.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स के फैसलों की समीक्षा करने में अदालतों की भूमिका काफी सीमित होती है. इसके बावजूद, जज ने मैककॉट्टर के केस संभालने के तरीके पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मैककॉट्टर ने अडानी के वकीलों के साथ सीधे बातचीत की और उन सरकारी वकीलों और जांचकर्ताओं को इसमें शामिल नहीं किया, जिन्होंने इस मामले की जांच की थी.
गौतम अडानी पर क्या आरोप थे?अमेरिकी अभियोजकों ने 2024 में गौतम अडानी पर कई आरोप लगाए थे. भारतीय उद्योगपति पर आरोप था कि उन्होंने भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई. ताकि एक सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सके.
अमेरिकी अभियोजकों ने यह भी आरोप लगाया था कि अडानी की कंपनी ने अमेरिकी निवेशकों को अपनी एंटी-करप्शन व्यवस्था के बारे में गलत जानकारी दी. हालांकि, अडानी ग्रुप ने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है. गौतम अडानी खुद भी इन आरोपों को लेकर अमेरिका की किसी अदालत में पेश नहीं हुए थे.
गौतम अडानी ने अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन यानी SEC के साथ जुड़े सिविल दावों को निपटाने के लिए 6 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई. साथ ही उनके भतीजे सागर अडानी ने भी 12 मिलियन डॉलर देने पर हामी भरी.
इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े मामले को निपटाने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी को 275 मिलियन डॉलर देने पर सहमति जताई.
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गौतम ने किया धन्यवादअब आते हैं गौतम अडानी ने इस फैसले पर क्या कहा? अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर न्यायिक प्रक्रिया के लिए अपना सम्मान जताया. उन्होंने लिखा,
‘इस मुश्किल दौर में भी हमारा भरोसा सच्चाई, निष्पक्षता और कानून पर बना रहा. उन सभी लोगों का दिल से शुक्रिया, जिन्होंने हम पर, व्यवस्था पर और भारत की न्याय व्यवस्था पर अपना भरोसा कभी नहीं खोया.’
रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई को दाखिल किए गए एक शपथ पत्र में अडानी ने बताया कि उन्होंने पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया था. उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने अमेरिकी न्याय विभाग से इस बारे में बात की थी. वकीलों ने कहा था कि इस निवेश के वादे को केस खत्म करने के समझौते का हिस्सा बनाया जा सकता है.
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